सार
Jodhpur : राजस्थान हाईकोर्ट ने ग्राम सेवा सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों के नियमितीकरण और स्क्रीनिंग कमेटी के गठन में देरी पर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह में जवाब मांगा है।

विस्तार
जोधपुर । डिजिटल डेस्क | 8 मई | राजस्थान हाईकोर्ट ने ग्राम सेवा सहकारी समितियों (Pacs-Lamps) के व्यवस्थापकों की स्क्रीनिंग और नियमितीकरण से जुड़े एक गंभीर मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह आदेश भीलवाड़ा की अखेपुर ग्राम सेवा सहकारी समिति के व्यवस्थापक रमेश चंद्र सुथार द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता (Advocate) अशोक कुमार चौधरी ने जस्टिस (Justice) कुलदीप माथुर की एकलपीठ में तर्क दिया कि रमेश चंद्र सुथार वर्ष 2009 से निरंतर अपनी सेवाएं दे रहा है। शुरू में सेल्समैन, फिर सहायक व्यवस्थापक और वर्तमान में व्यवस्थापक के रूप में कार्यरत होने के बावजूद उसे आज तक नियमित नहीं किया गया है। वर्तमान में उसे केवल एक निश्चित मानदेय दिया जा रहा है, जो पद के निर्धारित वेतनमान से काफी कम है। याचिका में ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ के सिद्धांत के आधार पर उचित वेतन की मांग भी की गई है।
अधिवक्ता अशोक कुमार चौधरी ने न्यायालय का ध्यान पैक्स लैम्प्स सेवा नियम, 2022 की ओर आकर्षित करते हुए बताया कि इन नियमों में वर्ष 2017 से पूर्व नियुक्त कर्मचारियों के लिए एकमुश्त स्क्रीनिंग का स्पष्ट प्रावधान है। इसके लिए एक स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया जाना अनिवार्य है, लेकिन सरकार ने अभी तक ऐसी किसी कमेटी का गठन नहीं किया है। यह देरी सेवा नियमों का सीधा उल्लंघन है और सैकड़ों कर्मचारियों के भविष्य को प्रभावित कर रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस कुलदीप माथुर ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण मांगा है। एकलपीठ ने प्रकरण की आगामी सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की है, जिसमें सरकार को स्क्रीनिंग कमेटी के गठन और नियमितीकरण की प्रक्रिया पर अपना पक्ष रखना होगा।


