सार
Jaipur : सहकारिता विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने केंद्रीय सहकारी बैंकों में डिप्टी मैनेजर, बैंकिंग सहायक और लोन सुपरवाइजर की शीघ्र भर्ती, पैक्स कम्प्यूटराइजेशन, आधुनिक बैंकिंग सेवाओं और बायोमेट्रिक उपस्थिति (AEBAS) को अनिवार्य करने के निर्देश दिए।

विस्तार
जयपुर, 7 मई। प्रदेश के केंद्रीय सहकारी बैंकों का कामकाज अधिक सुचारू बनाने के लिए लोन सुपरवाइजर्स, बैंकिंग सहायक तथा डिप्टी मैनेजर्स की भर्ती की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। यह वक्तव्य सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, डॉ. समित शर्मा ने गुरुवार को अपेक्स बैंक सभागार में दिया । दरअसल, डॉ. समित शर्मा केंद्रीय सहकारी बैंकों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहें थे । उन्होने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सहकारी संस्थाओं में जनता की जमा पूंजी की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने विश्वास आधारित व्यवस्था के साथ-साथ साक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली पर जोर देते हुए कहा कि पैक्स (PACS) कम्प्यूटराइजेशन इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इससे लेनदेन ऑनलाइन होगा और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि राजस्थान को पैक्स कम्प्यूटराइजेशन में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए सभी तकनीकी कमियों को जल्द दूर किया जाए और आगामी बैठक से पहले सभी पैक्स में ‘डायनामिक डे-एंड’ का कार्य पूरा किया जाए। भविष्य में निर्धारित मानकों के आधार पर पैक्स की रेटिंग भी की जाएगी।
शासन सचिव ने अपेक्स बैंक को देश का सर्वश्रेष्ठ सहकारी बैंक बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने कहा कि निजी बैंकों से मिल रही प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करने के लिए सहकारी बैंकों को अपनी सेवाओं का स्तर सुधारना होगा। अब सभी सहकारी बैंकों में मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और डेबिट कार्ड जैसी आधुनिक सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने बैंक शाखाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए।

इस समीक्षा बैठक में राजफेड के प्रबंध निदेशक श्री सौरभ स्वामी, राइसेम के निदेशक श्री संजय पाठक, अपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक श्री रणजीत सिंह चूण्डावत सहित नाबार्ड और सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं सभी केंद्रीय सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशक उपस्थित रहे।
AEBAS के जरिए अनुशासन
वित्तीय अनुशासन पर चर्चा करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि अपात्र व्यक्तियों को ऋण न दिया जाए और ऋण वसूली की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उन्होंने बैंकों को अपना सीआरएआर (CRAR) मानकों के अनुरूप रखने, डिपॉजिट बढ़ाने, जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के खाते सहकारी बैंकों में खुलवाने और एनपीए (NPA) के स्तर को कम करने के कड़े निर्देश दिए।प्रशासनिक सुधारों के तहत अब सभी केंद्रीय सहकारी बैंकों और उनकी शाखाओं में ‘आधार इनेबल्ड बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम’ (AEBAS) अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा ताकि कर्मचारियों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।


