कागजी दावों और वादों के बीच हांफता सहकारिता तंत्र: देश से लेकर राजस्थान तक बदहाली की दास्तान

देश में आवासयन सहित 1.41 लाख से अधिक सहकारी समितियां निष्क्रिय हैं, जबकि राजस्थान में भी 13 हजार से ज्यादा समितियां ताले में बंद हैं।   ​वित्तीय कुप्रबंधन के चलते देश की 2.50 लाख और राजस्थान की 9614 से अधिक कार्यशील समितियां भारी घाटे के दलदल में धंसी हैं। नई दिल्ली / जयपुर | सहकारी जगत…

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बीमा कंपनियों की ‘चांदी’ और आपदा में क्लेम का “क्लेश” — प्रीमियम तो पूरा वसूला, पर क्लेम के नाम पर मिला ठेंगा!

फसल बीमा का ‘गणित’: प्रीमियम से भरी तिजोरी, क्लेम के नाम पर सिर्फ मजबूरी! तिजोरी भरी, हाथ खाली: पिछले 5 वर्षों में बीमा कंपनियों के खातों में ₹26,757.63 करोड़ का भारी-भरकम प्रीमियम बरसा, लेकिन अन्नदाताओं को मुआवजे के नाम पर सिर्फ ₹18,189.16 करोड़ ही थमाए गए। ​मुनाफे की बहार: कुल प्रीमियम का 32% हिस्सा (लगभग…

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..पूरा हुआ बीस वर्षों का सफर

पाक्षिक मारवाड़ का मित्र के प्रकाशन के बीस वर्ष पूरे हो गये हैं। आज से पाक्षिक मारवाड़ का मित्र बीसवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। जनवरी 2003 को इसका पहला अंक प्रकाशित हुआ था। इसके बाद सतत रूप से जालोर जिले पर आधारित और केंद्रित खबरों का प्रकाशन पाक्षिक मारवाड़ का मित्र के द्वारा…

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