Home जोधपुर राजस्थान हाईकोर्ट: 20 साल से काम कर रहे संविदाकर्मी को हटाकर नया कर्मी रखना गलत, सहकारिता विभाग और पीएलडीबी बैंक की दलीले खारिज

राजस्थान हाईकोर्ट: 20 साल से काम कर रहे संविदाकर्मी को हटाकर नया कर्मी रखना गलत, सहकारिता विभाग और पीएलडीबी बैंक की दलीले खारिज

सार

राजस्थान उच्च न्यायालय ने दो दशकों से कार्यरत संविदा कर्मियों को हटाने पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि एक एजेंसी के कर्मियों को हटाकर अन्य संविदा कर्मियों को रखना अनुचित है। जब तक नियमित चयन या अन्य वैध कारण न हो, वे पद पर बने रहेंगे।

विस्तार Rajasthan High Court decision on contractual employee 20 years servic

जोधपुर |लीगल अपडेट्स – 23 सितंबर | राजस्थान उच्च न्यायालय ( High Court) ने सहकारिता विभाग (Department of Cooperatives) और बालोतरा को ऑपरेटिव लैंड डेवलपमेंट बैंक लिमिटेड (Balotra Cooperative Land Development Bank Limited) में संविदा (Contractual) पर कार्यरत कर्मियों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए, लगभग दो दशकों से निरंतर सेवाएं दे रहे संविदा कर्मियों (Contractual Employees) को हटाने पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इतने लंबे समय से कार्यरत कर्मियों को केवल इसलिए सेवामुक्त (Terminate) नहीं किया जा सकता, क्योंकि विभाग किसी अन्य प्लेसमेंट एजेंसी (Placement Agency) के माध्यम से नए संविदा कर्मियों को रखना चाहता है। न्यायमूर्ति कुलदीप माथुर (Justice Kuldeep Mathur) की अदालत ने वादी राजू, दलपत दान, रमेश माली और रोशन दीन सहित अन्य याचिकाकर्ताओं (Petitioners) की रिट याचिकाओं (Writ Petitions) का निस्तारण करते हुए यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ता पिछले लगभग दो दशकों से विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे थे और वर्ष 2016 से अदालत के अंतरिम संरक्षण (Interim Protection) के तहत कार्यरत थे। जब विभाग ने उन्हें नई प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए नए संविदा कर्मियों से विस्थापित (Displace) करने का प्रयास किया, तब उन्होंने उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाया था।सुनवाई के दौरान विभाग के अधिवक्ता (Advocate) ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं और विभाग के बीच सीधे तौर पर नियोक्ता और कर्मचारी (Employer-Employee) का संबंध नहीं है, क्योंकि उनकी नियुक्ति प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से हुई थी; इसलिए अनुबंध (Contract) की अवधि समाप्त होने पर उन्हें बदला जा सकता है।

हालांकि, अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी लंबी अवधि से निरंतर कार्य कर रहा है, कार्य समाप्त नहीं हुआ है, वित्तीय फंड (Financial Funds) की कोई कमी नहीं है और उनका कार्य-प्रदर्शन (Performance) संतोषजनक रहा है, तो उन्हें केवल अन्य संविदा कर्मियों से रिप्लेस (Replace) करने के उद्देश्य से नहीं हटाया जा सकता।अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को उनके पदों पर संविदा सेवा (Contractual Service) में यथावत रखा जाए। साथ ही, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में वे किसी दुराचार (Misconduct) के दोषी पाए जाते हैं, उनका प्रदर्शन खराब रहता है, संबंधित कार्य समाप्त हो जाता है, फंड उपलब्ध नहीं रहता, अथवा विधिवत चयनित नियमित उम्मीदवार (Regular Selected Candidates) उपलब्ध हो जाते हैं, तो नियमानुसार उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकेंगी।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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