सार
जयपुर में आयोजित ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्पलाइज यूनियन की जयपुर सीसीबी युनिट की आमसभा में नई कार्यकारिणी का गठन हुआ। बैठक में कर्मचारियों के हितों, बैंक की सुदृढ़ता और एकता पर जोर दिया गया।
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जयपुर | प्रदेश डेस्क 21 सितंबर |सहकारी आंदोलन को नई गति और मजबूती देने की दिशा में, ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्पलाइज यूनियन एवं ऑफिसर्स एसोसिएशन (केंद्रीय सहकारी बैंक, जयपुर यूनिट) की संयुक्त आमसभा होटल स्वाद में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। इस आयोजन में सीसीबी बैंकिंग सेक्टर (CCB Banking Sector) के कर्मचारियों और अधिकारियों ने भारी संख्या में भाग लेकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया और एक सशक्त सहकारी बैंकिंग सेक्टर के निर्माण के लिए एक मजबूत संगठनात्मक ढांचे पर बल दिया। बैठक का मुख्य आकर्षण संगठन का निर्वाचन (Election) रहा, जिसमें कर्मचारियों और अधिकारियों के हितों की रक्षा के लिए नई कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया। कर्मचारी संघ (Employees Union) की कमान एक बार फिर अध्यक्ष संतोष मीणा और सचिव सतीश स्वामी को सौंपी गई, जबकि अधिकारी एसोसिएशन (Officers Association) के अध्यक्ष पद पर कपिल माथुर और सचिव पद पर मनीष गंगवाल निर्विरोध चुने गए।
नवनिर्वाचित टीम का मुख्य उद्देश्य बैंक की आर्थिक सुदृढ़ता (Financial Strength), पारदर्शी स्थानांतरण नीति (Transparent Transfer Policy), स्टाफ स्ट्रेंथ (Staff Strength), रिक्त पदों पर भर्ती (Recruitment for Vacant Posts), आरक्षित बैंकिंग सहायक भर्ती (Reserved Banking Assistant Recruitment), आरजीएचएस (RGHS Facility) सुविधा और पांच दिवसीय बैंकिंग (Five-Day Banking) जैसे अहम मुद्दों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना है। कार्यक्रम का कुशल संचालन संगठन सचिव नरेंद्र रणवाह ने किया और हेमंत वर्मा के धन्यवाद ज्ञापन (Vote of Thanks) के बाद सभी साथियों ने सामूहिक सहभोज में भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद यूनियन के प्रांतीय महासचिव एवं प्रदेश के सहकारिता क्षेत्र के प्रखर नेता सूरजभान सिंह आमेरा ने सहकारिता के ऐतिहासिक और वर्तमान स्वरूप पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत में सहकारी आंदोलन की शुरुआत ग्रामीण ऋण (Rural Credit) और किसानों को महाजनों के चंगुल से बचाने के लिए हुई थी। राजस्थान में केंद्रीय सहकारी बैंकों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy), कृषि वित्तपोषण (Agricultural Financing) तथा कमजोर वर्ग के उत्थान में रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य किया है।आज सहकारी बैंकों के समक्ष व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा (Business Competition), आर्थिक सक्षमता (Economic Viability) और सेवा सुरक्षा (Service Security) की त्रिविध चुनौतियां हैं, जिनसे निपटने का एकमात्र हथियार संगठन की अटूट एकता (Organizational Unity) है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि कार्मिकों को बेहतर ग्राहक सेवा (Better Customer Service), शत-प्रतिशत ऋण वसूली (100% Loan Recovery) और बैंक की लाभप्रदता (Bank Profitability) के लिए कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करने के साथ-साथ, अपने अधिकारों के लिए संघर्ष (Struggle for Rights) हेतु भी सदैव तैयार रहना चाहिए।


