Home जालोर डिफॉल्टरों के चंगुल में जालोर का सहकारी ढांचा, सीसीबी बैंक ने झोंकी पूरी ताकत…?

डिफॉल्टरों के चंगुल में जालोर का सहकारी ढांचा, सीसीबी बैंक ने झोंकी पूरी ताकत…?

सार

जालोर जिले में पैक्स समितियों के 108 करोड़ से अधिक के एनपीए और अवधिपार ऋणों से सहकारिता ढांचा संकट में है। विभाग ने सख्त एसओपी के तहत वसूली तेज कर दी है।

विस्तार

जालोर /सहकारी जगत की ग्राउंड रिपोर्ट| 26 अगस्त| जालोर जिले में सहकारी आंदोलन का त्रिस्तरीय ढांचा इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर और संकटपूर्ण दौर से गुजर रहा है। जालोर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के अंतर्गत संचालित पैक्स (PACS) स्तर पर अल्पकालीन फसली ऋणों की लगातार वसुली कार्य  की अनदेखी और लचर कार्यसंस्कृति ने इस वित्तीय व्यवस्था की चूलें हिला कर रख दी हैं। हालिया ऑनलाइन डीएमआर आउटस्टैंडिंग रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 से लेकर अब तक जिलेभर में अवधिपार (ओवरड्यू) और एनपीए ऋणों का ग्राफ खतरनाक सीमाओं को पार करते हुए 108 करोड़ 26 लाख रुपये— के विशाल आंकड़े तक पहुंच चुका है—जिसमें कुल 28,368 खाते सीधे तौर पर अवधिपार की श्रेणी में फंसे हुए हैं। अतीत में जो सहकारिता किसानों की आर्थिक रीढ़ हुआ करती थी और ग्रामीण अंचल की अर्थव्यवस्था को संजीवनी प्रदान करती थी, वह वर्तमान में सुस्त मॉनिटरिंग, प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक संरक्षण के चलते अंदर से दीमक की तरह खोखली हो चुकी है।त्रिस्तरीय सहकारिता ढांचे के शीर्ष पर बैठा केंद्रीय बैंक और आधार स्तर पर कार्य करने वाली प्राथमिक कृषि ऋणदात्री समितियों (पैक्स) के बीच आपसी समन्वय और मैदानी नियंत्रण का पूरी तरह अभाव रहा है, जिसके कारण रिकवरी की रफ्तार लगभग शून्य पर सिमट गई है और बकाये का ग्राफ लगातार आसमान छू रहा है। स्थिति की भीषणता को भांपते हुए अब सीसीबी प्रबंध निदेशक द्वारा जारी सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत सघन फील्ड मॉनिटरिंग और उच्चाधिकारियों को विशेष शाखाएं आवंटित कर ताबड़तोड़ विधिक कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए गए हैं। जिले की कई पैक्स समितियों में तो बकाया राशि लाखो रुपये से लेकर करोड़ों रुपये तक पहुंच चुकी है, जहां चंद रसूखदार वर्षों से पैसा दबाए बैठे हैं। यदि समय रहते इन डिफॉल्टरों पर कानूनी शिकंजा नहीं कसा गया और पैक्स स्तर पर बकायेदारों की सूचियां चस्पा कर कुर्की या धारा के तहत सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो जालोर जिले का पूरा सहकारिता ढांचा दिवालिया होने की कगार पर पहुंच जाएगा, जिससे अन्नदाताओं का भविष्य और ग्रामीण साख पूरी तरह तबाह हो जाएगी।

आहोर, सांचौर और भीनमाल में फैला डिफॉल्टरों का मकड़जाल; करोड़ों के बकाया ऋणों से पैक्स समितियों की स्थिति चिंताजनक

जिले की पैक्स समितियों में बकायेदारों का मकड़जाल इस कदर फैल चुका है कि कई पैक्स में बकाया ऋण राशि लाखों रुपये से लेकर करोड़ों रुपये तक पहुंच चुकी है। आहोर, सांचौर, भीनमाल और रानीवाड़ा जैसी प्रमुख शाखाओं के अंतर्गत आने वाली पैक्स समितियों में हालात बेहद चिंताजनक हैं, जहां कई डिफाल्टर ऋणी वर्षों से कर्ज दबाए बैठे हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि बैंक के कुल 108 करोड़ रुपये से अधिक के ओवरड्यू में इन बड़ी पैक्स समितियों का हिस्सा सबसे बड़ा है। हालात सुधारने के लिए अब सहकारिता विभाग ने कड़े तेवर अपनाते हुए प्रत्येक पैक्स में पृथक वसूली रजिस्टर अनिवार्य कर दिया है तथा हर एक डिफॉल्टर को नोटिस तामिल करवाकर वीडियो और फोटो रिकॉर्ड रखने के आदेश दिए हैं, ताकि रिकवरी में कोई ढिलाई न बरती जा सके।

 वसूली के लिए सीसीबी बैंक प्रबंधन का ‘युद्धस्तर’ पर एक्शन; अधिकारियों को विशेष शाखाएं आवंटित, लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई

सीसीबी स्तर से जिले में अवधिपार ऋणों की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करने के लिए युद्धस्तर पर विभागीय तथा बैकिंग प्रशासनिक अमले को मैदान में उतार दिया गया है। बैंक प्रबंध निदेशक द्वारा जारी आदेशों के तहत वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष शाखाओं का आवंटन कर साप्ताहिक समीक्षा का कड़ा चक्रव्यूह रचा गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि वसूली कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों व शाखा प्रबंधकों पर सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। बैंक प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि पैक्स स्तर पर हर हाल में रिकवरी रजिस्टर का संधारण हो और पुराने से पुराने बकायेदारों को चिन्हित कर प्राथमिकता से आरसी जारी की जाए। इस हाई-वोल्टेज प्रशासनिक सख्ती से स्थानीय डिफॉल्टरों में हड़कंप मच गया है, लेकिन देखना यह है कि यह कागजी चाबुक मैदानी स्तर पर कितना असर दिखाता है।

         एक्सपर्ट व्यू (Expert View)

  • ​जालोर जिले में सहकारी के त्रिस्तरीय ढांचे का मौजूदा संकट केवल वित्तीय घाटे का नहीं, बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मैदानी मॉनिटरिंग की विफलता का परिणाम है। 108 करोड़ रुपये से अधिक का अवधिपार ऋण और 28,000 से अधिक डिफॉल्टर्स इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि पैक्स स्तर पर जमीनी स्तर की जवाबदेही लंबे समय से नदारद रही है। जब तक शीर्ष स्तर का केंद्रीय बैंक और आधार स्तर की पैक्स समितियां आपसी समन्वय और कड़े विधिक शिकंजे के साथ काम नहीं करेंगी, तब तक केवल कागजी आदेशों या एसओपी से सुधार संभव नहीं है। यदि इस बार रसूखदार बकायेदारों पर कुर्की और आरसी जारी करने जैसी सख्त कार्रवाई को अंजाम तक नहीं पहुंचाया गया, तो ग्रामीण साख और सहकारी आंदोलन की रीढ़ पूरी तरह चरमरा जाएगी।

 

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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