Home स्‍पेशल “सहकारी संस्थाओं के बकाया ऋणों की वसूली के लिए चुनाव नामांकन में ‘नो-ड्यज़’ प्रमाण पत्र अनिवार्य करने की उठी ज़ोरदार मांग”

“सहकारी संस्थाओं के बकाया ऋणों की वसूली के लिए चुनाव नामांकन में ‘नो-ड्यज़’ प्रमाण पत्र अनिवार्य करने की उठी ज़ोरदार मांग”

सार

Rajasthan सहकारी क्षेत्र के दिग्गज सहकार नेतृत्व आमेरा ने मांग की है कि राजस्थान में पंचायतीराज व निकाय चुनावों के प्रत्याशियों के लिए सहकारी बैंकों का ‘नो-ड्यूज प्रमाण पत्र’ अनिवार्य किया जाए, जिससे डिफाल्टरों से कर्ज वसूला जा सके।

विस्तार

जयपुर | सहकारी जगत से विशेष संवाददाता की रिपोर्ट | 25 अगस्त|ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने और बैंकों के फंसे हुए कर्ज की वसूली को सुनिश्चित करने के लिए अब राज्य में एक प्रभावी कदम उठाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्प्लाइज यूनियन, ऑफिसर्स एसोसिएशन और सहकारी साख समितियाँ एम्प्लाइज यूनियन राजस्थान ने संयुक्त रूप से राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के समक्ष एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। इसके तहत आगामी पंचायतीराज और नगरीय निकाय चुनावों में नामांकन पत्र दाखिल करने वाले प्रत्याशियों के लिए ग्राम सेवा सहकारी समितियों (PACS/LAMPS), जिला केन्द्रीय सहकारी बैंकों और अपैक्स बैंक से “नो-ड्यूज / अनापत्ति प्रमाण पत्र” लेना अनिवार्य करने की मांग की गई है।

​यूनियन के प्रांतीय महासचिव सूरज भान सिंह आमेरा के अनुसार, वर्तमान में विभिन्न विभागों के बकाया ऋणों या शुल्कों के संबंध में तो नो-ड्यूज लिया जाता है, लेकिन सहकारी क्षेत्र के करोड़ों रुपये के अवधिपार (Overdue) ऋणों को इस दायरे से बाहर रखा गया है। प्रदेश की 9 हजार से अधिक पैक्स समितियों और केंद्रीय सहकारी बैंकों का भारी-भरकम कर्ज कई डिफाल्टरों पर बकाया है। हैरानी की बात यह है कि यही कर्जदार लोग चुनाव लड़कर जनप्रतिनिधि बन जाते हैं और फिर प्रशासनिक व राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर ऋण वसूली की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करते हैं।

​यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि चुनाव नामांकन के साथ सहकारी संस्थाओं का नो-ड्यूज प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया जाता है, तो इससे बकाया ऋणों की वसूली स्वतः और सुगमता से हो सकेगी। इससे सहकारी बैंकों के एनपीए में भारी सुधार होगा, वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और केवल कर्ज चुकाने वाले ईमानदार किसानों को ही इसका वास्तविक लाभ मिल सकेगा। सहकार संगठनों का मानना है कि इस नियम के लागू होने से राज्य सरकार के “सहकार से समृद्धि” और “ऋण मुक्त किसान” के संकल्प को और अधिक गति तथा मजबूती मिलेगी।

​ चुनाव में नो-ड्यूज अनिवार्य होने से पटरी पर आएगी सहकारी बैंकों की वित्तीय सेहत

​राजस्थान के सहकारी बैंकों और पैक्स समितियों के करोड़ों रुपये के फंसे हुए कर्ज को बाहर निकालने के लिए कर्मचारियों ने अनूठी मांग उठाई है। यूनियनों का तर्क है कि यदि निकाय और पंचायत चुनावों में नामांकन के समय पैक्स, केंद्रीय सहकारी बैंक और अपैक्स बैंक का नो-ड्यूज प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया जाए, तो ओवरड्यू ऋणों की वसूली अपने आप सुनिश्चित हो जाएगी। वर्तमान में डिफाल्टर लोग चुनाव जीतकर पदों पर काबिज हो जाते हैं, जिससे वसूली प्रक्रिया ठप पड़ जाती है। इस ऐतिहासिक बदलाव से बैंकों के एनपीए में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

​ डिफाल्टरों पर कसेगा शिकंजा, सहकारिता बचाने के लिए चुनाव नियमों में बदलाव की उठी मांग

निकाय और पंचायत चुनावों के माहौल के बीच सहकारी संगठनों ने शासन-प्रशासन के सामने एक कड़ा और व्यावहारिक प्रस्ताव रखा है। सहकार नेताओं का कहना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले सहकारी क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए चुनावी नियमों में संशोधन बेहद जरूरी है। अन्य विभागों की भांति अब चुनाव लड़ने वाले हर प्रत्याशी के लिए संबंधित ग्राम सेवा सहकारी समितियों और सहकारी बैंकों से ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ लाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे कर्ज न चुकाने वाले डिफाल्टरों पर स्वतः लगाम लगेगी और सहकारी संस्थाओं का साख दायरा मजबूत होगा।

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

error: Content is protected !!