सार
Jaipur : राजस्थान के भूमि विकास बैंकों की आर्थिक स्थिति सुधारने हेतु कर्मचारी संगठनों ने नई एकमुश्त समझौता योजना (OTS) 2026-27 की मांग की है। इसका उद्देश्य 2014 के बाद के ऋणी किसानों को राहत देना और एनपीए (NPA) कम करना है।

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 8 मई | राजस्थान के भूमि विकास बैंकों की आर्थिक स्थिति सुधारने और कर्जदार किसानों को राहत देने के लिए ‘ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्पलॉइज यूनियन’ और ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन’ ने राज्य सरकार से एक नई विशेष एकमुश्त समझौता योजना (OTS) लागू करने की मांग की है। यूनियन के प्रांतीय महासचिव सूरज भान सिंह आमेरा ने सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक को पत्र लिखकर वर्ष 2026-27 के लिए इस विशेष योजना को शुरू करने का आग्रह किया है।
पत्र में बताया गया है कि वर्तमान में जारी ‘CM OTS 2025-26’ योजना के परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं, लेकिन इस योजना में केवल 1 अप्रैल 2014 से पूर्व के ऋणों को ही शामिल किया गया है। इसके कारण 1 अप्रैल 2014 के बाद ऋण लेने वाले हजारों किसान लाभ से वंचित रह गए हैं। पत्रानुसार, लगभग 7000 ऐसे किसान हैं जिन पर 155 करोड़ रुपये की वसूली बकाया है। इसके अतिरिक्त, राज्य में हाल ही में हुई अतिवृष्टि और ओलावृष्टि के कारण फसलों को नुकसान हुआ है, जिससे किसान कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं।
यूनियन का तर्क है कि वर्तमान में नीलामी और कुर्की जैसी कानूनी कार्रवाइयां स्थगित होने के कारण बैंकों के लिए केवल समझाइश के आधार पर वसूली करना मुश्किल हो रहा है। भूमि विकास बैंकों में लगभग 600 करोड़ रुपये का एनपीए (NPA) प्रावधान बना हुआ है। यदि नई OTS योजना लागू की जाती है, तो बैंकों पर मात्र 20 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा, जबकि बड़े पैमाने पर एनपीए की वसूली संभव हो सकेगी। इससे बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और उन्हें भविष्य में नाबार्ड से पुनर्वित्त (Refinance) प्राप्त करने में भी आसानी होगी। कर्मचारी संगठनों ने सरकार से अपील की है कि “सहकारिता से समृद्धि” के संकल्प को साकार करने के लिए इस प्रस्ताव को जल्द स्वीकृति प्रदान की जाए।


