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सहकारिता के जरिए देश की समृद्धि के लिए कार्य करें – राज्यपाल

सार 

सहकार भारती का महाराष्ट्र त्रैवार्षिक सम्मेलन आयोजित, स्व. अन्ना साहेब गोडबोले स्मृति पुरस्कार प्रदान किया, सहकार महर्षि पुस्तक का किया लोकार्पण

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विस्तार

जयपुर, 21 सितम्बर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने सहकारिता के जरिए देश की समृद्धि के लिए कार्य करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि सहकारिता संस्थाओं ने राष्ट्र विकास में निरंतर महती भूमिका निभाई हैं। पर संस्थाओं के आर्थिक व्यवहार में गड़बड़ी से वे डूब जाती है। इसलिए इस बात पर सदैव ध्यान दें कि सहकारी संस्था में कहीं कोई आर्थिक भ्रष्टाचार नहीं हो। यह नहीं होगा तभी संस्थाएं अच्छे से चलेगी।

02 1657 e1727017471797सहकार भारती के महाराष्ट्र राज्य सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे

श्री बागडे शनिवार को सहकार भारती के महाराष्ट्र राज्य सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि  आर्थिक आयोजना को प्रजातांत्रिक बनाने के लिए ही देश में सहकारी समितियों को सबसे उपयुक्त माध्यम पाया गया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी योरोपीय देशों डेनमार्क, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन, इटली आदि ने सहकारिता के जरिए बहुत विकास किया है। डेनमार्क में यह आंदोलन इतना सफल रहा है कि व्यावहारिक रूप से हर किसान वहां एक सहकारी समिति का सदस्य है।
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अन्ना साहेब गोडबोले स्मृति पुरस्कार प्रदान करते हुए
राज्यपाल ने कहा कि देश में सहकारिता के जरिए किसानों के लिए सबसे पहले किसी ने कार्य किया है तो वह लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल हैं। सरदार पटेल ने खेड़ा आंदोलन में सहकारिता के जरिए ही सफलता पाई। गुजरात में खेड़ा आंदोलन की सफलता के बाद खेड़ा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक मिल्क यूनियन पंजीकृत हुई जिसे अमूल के नाम से आज जाना जाता है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल नहीं, वह सहकार पटेल थे। सहकारिता की जो नींव भारत में उन्होंने डाली वह आज वटवृक्ष बन चुका है। गांव—गांव में सहकारिता के जरिए जिस तरह से पशुपालकों को अपने दूध का और अन्य उत्पादों का लाभ मिल रहा है, उससे देशभर में सहकारिता आंदोलन तेजी से विकसित हुआ है।
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सहकार महर्षि” पुस्तक का लोकार्पण करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे
श्री बागडे ने ‘सहकार से समृद्धि’ की चर्चा करते हुए कहा कि शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों को मजबूत बनाने के लिए सभी मिलकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि सहकारिता में आप काम करें परन्तु अहंकार का भाव नहीं रखें। सब—मिलकर कार्य करते है। कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। उन्होंने ‘आत्म निर्भर भारत’ के सपने को पूरा करने के लिए सहकारिता से विकास की राह अपनाने का आह्वान किया।  इससे पहले उन्होंने अन्ना साहेब गोडबोले स्मृति पुरस्कार प्रदान किया तथा “सहकार महर्षि” पुस्तक का लोकार्पण किया।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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