सार
कम बारिश के कारण गहराते जल संकट और खरीफ फसलों के नष्ट होने पर आपदा प्रबंधन विभाग ने राजस्थान के 13 जिलों की 53 तहसीलों (44 गंभीर और 9 मध्यम) को सूखाग्रस्त घोषित किया है।
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जयपुर |प्रदेश डेस्क रिपोर्ट | 25 अक्टूबर|प्रदेश में मानसून की बेवफाई, भू-जल स्तर में गिरावट और फसलों की बर्बादी ने एक बार फिर अकाल और सूखे की संकटपूर्ण आहट दे दी है। खरीफ फसल वर्ष 2026 (संवत् 2083) में कम बारिश और पानी की भारी किल्लत को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग ने अधिसूचना जारी कर राज्य के 13 जिलों की 53 तहसीलों को ‘अभावग्रस्त’ (सूखाग्रस्त) घोषित कर दिया है। इसमें से 44 तहसीलों में गंभीर और 9 तहसीलों में मध्यम श्रेणी का सूखा माना गया है।सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सूखा प्रभावित इन ग्रामीण क्षेत्रों में ‘राजस्थान एफेक्टेड एरियाज (सस्पेंशन ऑफ प्रोसिडिंग्स) एक्ट, 1952’ के तहत राहत प्रावधान आगामी 6 महीनों के लिए तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
एक्ट लागू होते ही मिली बड़ी राहत: किसानों की कुर्की और कर्ज वसूली पर लगा 6 महीने का ब्रेक’
सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों के लिए सरकार का यह आदेश केवल एक कागजी घोषणा नहीं, बल्कि संकट की इस घड़ी में बड़ी कानूनी राहत की ढाल बनकर आया है। आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के साथ ही प्रभावित 13 जिलों की 53 तहसीलों में ‘राजस्थान एफेक्टेड एरियाज एक्ट, 1952’ की धारा 5 से 10 तक के सख्त प्रावधान लागू कर दिए गए हैं।यह कानून लागू होने के बाद अगले 6 महीनों तक इन चिन्हित सूखाग्रस्त गांवों में किसानों के खिलाफ किसी भी तरह की अदालती या प्रशासनिक कुर्की, जमीन की नीलामी और कृषि ऋणों की जबरन वसूली की प्रक्रियाओं पर स्वतः ही रोक लग जाएगी।अकाल और सूखे के दौरान आमतौर पर फसलें जल जाने के कारण किसान आर्थिक रूप से टूट जाता है। ऐसे समय में बैंक लोन, सहकारी समितियों के बकाया या अन्य देनदारियों की वसूली के लिए दबाव बनाए जाने पर किसान हतोत्साहित हो जाते हैं। इस एक्ट के तहत कानूनी रोक लगने से अब कोई भी वित्तीय संस्थान या साहूकार किसानों को प्रताड़ित नहीं कर सकेगा। सरकार ने सभी संभागीय आयुक्तों और संबंधित 13 जिलों के जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन नियमों का कड़ाई से पालन करवाएं ताकि संकटग्रस्त अन्नदाता को तत्काल राहत मिल सके।
केंद्र सरकार के ‘ड्रॉट मॉनिटरिंग पोर्टल’ से मिले आंकड़ों और सूखा प्रबंधन संहिता 2016 के तहत किए गए आकलन के बाद आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त शासन सचिव उत्साह चौधरी (IAS) की ओर से यह आदेश जारी किया गया है।सूखे का सबसे भयानक प्रभाव पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती और रेगिस्तानी इलाकों पर पड़ा है। सीमावर्ती बाड़मेर जिले में सर्वाधिक 9 तहसीलें सूखे की चपेट में आई हैं, जिन्हें गंभीर सूखाग्रस्त माना गया है। इसी प्रकार जालौर जिले में भी 9 तहसीलों को गंभीर सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। जोधपुर की 7 तहसीलें (6 गंभीर व 1 मध्यम), डूंगरपुर की 7 तहसीलें (4 गंभीर व 3 मध्यम), जैसलमेर की 5 तहसीलें (4 गंभीर व 1 मध्यम) और फलोदी की 5 तहसीलें (4 गंभीर व 1 मध्यम) सूखा प्रभावित सूची में शामिल हैं। इसके अतिरिक्त बांसवाड़ा (3), बालोतरा (3), चूरू (1), ब्यावर (1), नागौर (1), पाली (1) तथा सिरोही (1) जिले की तहसीलों में फसल खराबे की पुष्टि हुई है।


