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राजस्थान में स्वदेशी नैनो उर्वरकों (Nano Fertilizers) को मिलेगा बढ़ावा सहकारिता विभाग (Cooperative Department) ने दिए निर्देश

सारांश :

राजस्थान में सहकारिता विभाग ने किसानों की लागत घटाने और पैदावार बढ़ाने के लिए नैनो यूरिया व नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सहकारी समितियों से निर्बाध आपूर्ति और ग्रामीण गोष्ठियों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। 

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जयपुर | प्रदेश डेस्क 24 अक्टूबर |राज्य में खेती की लागत  को कम करने और कृषि उत्पादन को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए सहकारिता विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सहकारिता विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने प्रदेश के सभी खण्डीय अतिरिक्त रजिस्ट्रार (Divisional Additional Registrars) और उप रजिस्ट्रार (Deputy Registrars) को पत्र जारी कर स्वदेशी नैनो उर्वरकों—विशेषकर नैनो यूरिया (Nano Urea) और नैनो डीएपी (Nano DAP)—के उपयोग को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित (Encourage/Promote) करने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री (Union Minister of Home Affairs and Cooperation) द्वारा राजस्थान के मुख्यमंत्री (Chief Minister) को भेजे गए पत्र के संदर्भ (Reference) में जारी किए गए हैं।

सहकारी संस्थाओं  के जरिए सुनिश्चित होगी नैनो यूरिया और डीएपी की उपलब्धता 

प्रदेश के किसानों तक स्वदेशी नैनो उर्वरकों की सुगम पहुंच (Easy Access) बनाने के लिए सहकारिता विभाग ने पुख्ता इंतजाम (Robust Arrangements) करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत, सभी सहकारी संस्थाओं को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने क्षेत्र के कृषकों की मांग का सटीक आकलन (Accurate Demand Assessment) करें। इसके बाद विभिन्न एजेंसियों (Agencies) के साथ आपसी समन्वय स्थापित करके नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता और निर्बाध वितरण व्यवस्था (Uninterrupted Distribution System) सुनिश्चित की जाएगी।इसके साथ ही, इफको (IFFCO) के राज्य और जिला स्तर (State and District Level) के प्रतिनिधियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने को कहा गया है ताकि उर्वरकों की आपूर्ति (Supply), उनके मूल्य (Price/Cost) और वितरण में किसी भी प्रकार की बाधा न आए। क्षेत्रीय अधिकारियों (Regional Officers) को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ आने वाली प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों और केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से स्थिति पर कड़ी नजर (Close Monitoring) रखें। इस व्यवस्था के लागू होने से किसानों को समय पर और उचित मूल्य (Reasonable Price) पर नैनो उर्वरक मिल सकेंगे, जिससे पारंपरिक उर्वरकों (Traditional Fertilizers) पर उनकी निर्भरता (Dependence) कम होगी और उनकी कृषि लागत में भी खासी बचत देखने को मिलेगी।

विभाग के अनुसार, इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) द्वारा इन स्वदेशी नैनो उर्वरकों का व्यापक स्तर (Large Scale) पर उत्पादन किया जा रहा है। इनके इस्तेमाल से न केवल उर्वरक उपयोग की दक्षता (Fertilizer Efficiency) में सुधार होगा, बल्कि किसानों की लागत में भी भारी कमी आएगी। शासन ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण स्तर पर किसानों को इनसे जोड़ने के लिए केंद्रीय सहकारी बैंकों (Central Cooperative Banks) और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (Primary Agricultural Credit Societies – PACS) के माध्यम से युद्धस्तर (War Footing) पर कार्य किया जाए।इस पूरी प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी (Effective Monitoring) सुनिश्चित करने और संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय (Coordination) बिठाने के भी निर्देश दिए गए हैं। सहकारिता विभाग के इस कदम से राज्य के अन्नदाताओं (Farmers) को खेती में आधुनिक (Modern) और वैज्ञानिक तरीकों (Scientific Methods) को अपनाने में मदद मिलेगी।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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