सार
राजस्थान के सहकारी बैंकों से संविदा कर्मियों की अचानक छंटनी पर भारी रोष है। यूनियन ने श्रम संहिताओं के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए शासन सचिव से हस्तक्षेप और तत्काल न्याय की मांग की है।
विस्तार

जयपुर:|प्रदेश डेस्क 3 अगस्त |प्रदेश के सहकारी बैंकों में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे संविदा कर्मियों को अचानक नौकरी से हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आउटसोर्सिंग और संविदा के जरिए अपैक्स बैंक, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCB), भूमि विकास बैंकों (SLDB/PLDB) में कार्यरत सहायक कर्मचारियों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और वाहन चालकों की छंटनी को श्रम संहिताओं (Labour Codes) के प्रावधानों के विरुद्ध बताया गया है। ऑल राजस्थान कॉ-ऑपरेटिव बैंक एम्प्लॉइज यूनियन एव ऑफिसर्स एसोसिएशन युनियन ने इसे अमानवीय और मनमाना रवैया करार देते हुए शासन सचिव सहकारिता और रजिस्ट्रार सहकारी समितियां को ज्ञापन सौंपकर तत्काल सख्त हस्तक्षेप की मांग की है।संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित संविदा कर्मचारियों को शीघ्र राहत नहीं दिलाई गई और न्याय सुनिश्चित नहीं किया गया, तो असंगठित कर्मियों के हक के लिए सक्षम स्तर पर कानूनी एवं लोकतांत्रिक संघर्ष करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी बैंक प्रबंधन की होगी।
अतीत के अनुभव और वर्तमान परिदृश्य: खाली पड़े हैं नियमित पद
सहकारी आंदोलन के जानकारों और श्रमिक प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रदेश के सहकारी बैंकों में पिछले 40 वर्षों से चपरासी (सहायक कर्मचारी) और वाहन चालकों के नियमित पदों पर सीधी भर्तियां नहीं की गई हैं। बैंकों में नियमित प्रकृति के ये कार्य अनिवार्य रूप से चलते हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए ही वर्षों पहले संविदा कर्मियों की व्यवस्था की गई थी।अब जबकि राज्य सरकार ने प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी और सहायक कर्मचारियों के नियमित पदों पर भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत की है, ऐसे समय में पहले से कार्यरत अनुभवी संविदा कर्मियों को हटाना न्यायसंगत नहीं है।
जैसलमेर सीसीबी की घटना बनी बड़ा मुद्दा

ज्ञापन में हाल ही में जैसलमेर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक (CCB) का विशेष रूप से हवाला दिया गया है, जहां पिछले 16 वर्षों से कार्यरत लगभग 11 संविदा कर्मचारियों को अचानक बिना किसी उचित प्रक्रिया के सेवामुक्त कर दिया गया। इनमें एक विधवा महिला भी शामिल हैं।संगठन के अनुसार, इस अचानक छंटनी के चलते मानसिक अवसाद में आए एक 32 वर्षीय युवा संविदा कर्मी की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने मजबूर होकर जैसलमेर सीसीबी मुख्यालय में शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया था। सहकारी जगत में इस प्रकार की घटनाओं से रोष व्याप्त है और अंदेशा जताया जा रहा है कि यदि समय रहते मनमानी पर रोक नहीं लगी, तो यह किसी बड़े हादसे का रूप ले सकती है।


