Home राष्ट्रीय लखनऊ में सहकार भारती की राष्ट्रीय चिंतन बैठक संपन्न, पैक्स को आत्मनिर्भर और स्वायत्त बनाने पर दिया जोर

लखनऊ में सहकार भारती की राष्ट्रीय चिंतन बैठक संपन्न, पैक्स को आत्मनिर्भर और स्वायत्त बनाने पर दिया जोर

सार 

लखनऊ में सहकार भारती की राष्ट्रीय बैठक में पैक्स समितियों को आत्मनिर्भर और पारदर्शी बनाने पर चर्चा हुई। इसमें बिना सहमति पैक्स विभाजन रोकने, समय पर चुनाव कराने और बजट बढ़ाने की मांग की गई।

विस्तार 

लखनऊ। डिजिटल डेस्क | 2 जून | सहकार भारती उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में लखनऊ में दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन बैठक एवं गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया, जिसका मुख्य विषय “सहकारी समितियों एवं पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों) के आर्थिक उन्नयन और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना” रहा। इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (अपैक्स बैंक) के चेयरमैन जितेंद्र बहादुर सिंह ने अध्यक्षता की, जबकि सहकार भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय पाचपोर ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

इस राष्ट्रीय गोष्ठी में राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए सहकार भारती के पदाधिकारियों, पैक्स समितियों के अध्यक्षों, निदेशकों और मुख्य प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। राजस्थान की ओर से वरिष्ठ सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा सहित अन्य पैक्स प्रतिनिधियों ने इसमें प्रमुखता से भागीदारी की।

बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता संजय पाचपोर ने कहा कि सहकारिता व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और पैक्स समितियां इसकी बुनियादी इकाई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों की वास्तविक उन्नति के लिए पैक्स समितियों को सक्षम, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि सहकारी समितियों को सरकार पर अपनी निर्भरता पूरी तरह खत्म कर आत्मनिर्भर बनना होगा, क्योंकि अत्यधिक सरकारी निर्भरता से संस्थाओं की स्वायत्तता कमजोर होती है। उन्होंने पैक्स जनप्रतिनिधियों को अपने अधिकारों, दायित्वों और समिति के ‘बाय-लॉज’ का गहन अध्ययन करने की सलाह दी ताकि वे कुशलता से काम कर सकें।

वहीं, सहकार भारती पैक्स प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रमुख राजदत्त पांडेय ने संगठन की मजबूती के लिए निरंतर प्रवास और संवाद को आवश्यक बताया।  इस चिंतन बैठक में पैक्स के सामने आ रही चुनौतियों और उनके व्यावहारिक समाधानों पर देश भर के प्रतिनिधियों ने गहन विचार-विमर्श किया | समारोह के समापन पर उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार और महामंत्री अरविंद सिंह सहित सभी उपस्थित पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर ग्राम, समृद्ध किसान और सशक्त राष्ट्र के निर्माण का संकल्प लिया। 

बिना सहमति न हो पैक्स का विभाजन, समय पर हो चुनाव

बैठक के निष्कर्षों की जानकारी देते हुए राजस्थान के प्रतिनिधि सूरज भान सिंह आमेरा ने बताया कि सहकार भारती जल्द ही केंद्र और राज्य सरकारों को पैक्स की मजबूती के लिए एक मांग पत्र और नीतिगत सुझाव भेजेगी। इन सुझावों में प्रमुख रूप से यह मांग की जाएगी कि नई पैक्स के गठन के लिए पुरानी पैक्स का विभाजन केवल उनकी आपसी सहमति से ही हो, क्योंकि बिना सोचे-समझे किए गए विभाजन से पैक्स आर्थिक रूप से कमजोर होती हैं। इसके साथ ही नई समितियों में न्यूनतम सदस्य संख्या 500 तय करने, पैक्स कर्मचारियों के लिए समुचित तकनीकी प्रशिक्षण की व्यवस्था करने और उनके न्यूनतम पारिश्रमिक के लिए सरकार से प्रशासनिक व आर्थिक अनुदान दिलाने की मांग भी शामिल है।

चर्चा के दौरान इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि सहकारी पैक्स से लेकर शीर्ष संस्थाओं तक लोकतांत्रिक और निष्पक्ष चुनाव समय पर होने चाहिए। इसके अलावा, पैक्स को इफ्को और कृभको जैसी संस्थाओं से पर्याप्त मात्रा में खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और उनका कमीशन मार्जिन बढ़ाया जाए। राज्य सरकारों से यह भी मांग की गई कि वे पैक्स के सभी बकाया भुगतानों, जैसे ब्याज अनुदान और ऋण माफी की राशि का समय पर भुगतान करें, और बढ़ती हुई पैक्स संख्या के अनुपात में फसली ऋण के बजट में बढ़ोतरी कर नाबार्ड से उचित पुनर्वित्त की व्यवस्था कराएं।

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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