सार
सहकारिता विभाग में अधिकारियों द्वारा जेब या बैग में अटेंडेंस रजिस्टर लेकर घूमने का मामला सामने आया है। इस पर शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने सख्त चेतावनी देते हुए एक ही अनिवार्य रजिस्टर कार्यालय में रखने के निर्देश दिए हैं।
विस्तार

जयपुर।|प्रदेश ङेस्क 28 जुलाई |सहकारिता विभाग (Cooperative Department) में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। विभाग के भीतर चल रहे ‘अनोखे कारनामों’ को देखकर तो यही लगता है कि यहाँ कानून और नियमों से ज्यादा साहबों की मर्जी ही सर्वोपरि है। आलम यह है कि विभाग के अधिकारी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए भी सहकारी दफ्तर के नियमों को ठेंगा दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला सामने आने के बाद शासन सचिव को खुद मैदान में उतरकर कड़े आदेश जारी करने पड़े हैं।विभाग के संज्ञान में आया है कि कई कार्यालयों में अधिकारी और कर्मचारी अपनी सुविधा के मुताबिक अलग-अलग अटेंडेंस रजिस्टर चला रहे हैं। हद तो तब हो गई जब कुछ साहबान अपनी उपस्थिति वाली हाजिरी पुस्तिका को दफ्तर के काउंटर या रिकॉर्ड में रखने के बजाय अपने साथ जेब या बैग में लेकर घूम रहे हैं।विभाग के मुखिया और शासन सचिव डॉ. समित शर्मा तक जब यह अजीबोगरीब वाकया पहुँचा, तो उनके भी कान खड़े हो गए। बार-बार सख्त निर्देश देने के बावजूद इस मनमानी पर रोक नहीं लग पा रही थी, जिसे विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्था की ‘घोर अवहेलना’ माना है।
अब एक ही रजिस्टर, वरना खैर नहीं!
इस लचर रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए शासन सचिव एवं सहकारिता रजिस्ट्रार ने विभाग के समस्त कार्यालयों के लिए नया फरमान जारी किया है। आदेश में साफ कर दिया गया है कि—
- एक दफ्तर, एक रजिस्टर: अब विभाग के हर कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए केवल एक ही उपस्थिति पंजीका संधारित होगी, जो उसी कार्यालय में सुरक्षित रखी जाएगी।
- जेब में नहीं, टेबल पर दिखेगी हाजिरी: कोई भी अधिकारी अपने साथ अलग से व्यक्तिगत रजिस्टर रखकर हाजिरी दर्ज नहीं कर सकेगा।
- गाज गिरेगी जिम्मेदारों पर: यदि अब आदेश की अवहेलना हुई, तो संबंधित कार्यालय अध्यक्ष (Head of Office) के खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सहकारी आंदोलन का हाल बेहाल
एक तरफ सरकार सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और डिजिटल वर्क कल्चर (राज-काज) को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी सहकारिता विभाग के नुमाइंदों का यह हाल है कि वे साधारण उपस्थिति रजिस्टर को भी दफ्तर में स्थिर रखने को तैयार नहीं हैं। महकमे में चर्चा का विषय यही है कि जब अधिकारी खुद अपनी हाजिरी छिपाकर जेब में रखेंगे, तो आम जनता के कामों में पारदर्शिता की उम्मीद भला किससे की जाए?


