सार
#SIROHI सीसीबी बैंक प्रबंधन ने जारी किए निर्देश, 31 मार्च व 30 जून को समितियों के पक्ष में बकाया ब्याज को मूलधन में नहीं जोड़ा जाएगा अधिक वसूला ब्याज भी होगा रिफंड
विस्तार

सिरोही |जिला ङेस्क 30 जुलाई |दी सिरोही सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लि. (DCCBs), सिरोही ने ब्याज मुक्त फसली ऋण योजना के तहत समय पर ऋण चुकता करने वाली ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स/लैम्पस) को बड़ी राहत दी है। बैंक प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि जिन पैक्स/लैम्पस द्वारा ऋणों की समय पर वसूली जमा हो जाती है, उनसे किसी भी प्रकार का ब्याज नहीं लिया जाएगा। साथ ही, 31 मार्च एवं 30 जून को समितियों के पक्ष में बकाया रहने वाले ब्याज को मूलधन में जोड़कर उस पर चक्रवर्ती ब्याज की वसूली नहीं की जाएगी।बैंक के प्रबंध निदेशक पूनाराम चोयल द्वारा समस्त शाखा प्रबंधकों को जारी निर्देशों में कहा गया है कि यदि कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (TCS/CBS) द्वारा स्वचालित रूप से (ऑटोमैटिक) ब्याज डेबिट कर लिया जाता है, तो उसे तुरंत रिफंड किया जाए।बैंक प्रबंधन ने सभी शाखा प्रबंधकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक 06 माह में खाता मिलान (Reconciliation) सुनिश्चित किया जाए। समायोजन के बाद यदि ब्याज की कोई शेष राशि बचती है, तो सबसे पुराने समिति ऋण खाते में बकाया ब्याज की वसूली वरीयता के आधार पर की जाएगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित शाखा प्रबंधक और ऋण पर्यवेक्षक की होगी।
जारी दिशा-निर्देश
- रिफंड की व्यवस्था: यदि गलती से या सिस्टम द्वारा ऑटोमैटिक ब्याज कट जाता है, तो उसे तत्काल पैक्स/लैम्पस के बचत खाते में रिफंड किया जाएगा।
- अनुदान से होगा समायोजन: राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मिलने वाली 4 प्रतिशत ब्याज सहायता राशि (अनुदान) प्राप्त होने पर उसका समायोजन सीधे समिति के ऋण खाते में किया जाएगा।
- KRP पोर्टल पर क्लेम: पैक्स/लैम्पस के अध्यक्ष एवं व्यवस्थापकों को निर्देश दिए गए हैं कि समय पर वसूली राशि बैंक शाखा में जमा कराकर केआरपी (KRP) पोर्टल पर PRI व IS क्लेम समय पर प्रस्तुत करें।
- प्राथमिकता से निस्तारण: इस व्यवस्था को प्राथमिकता के साथ लागू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सहकारी समितियों को अनावश्यक वित्तीय भार से बचाया जा सके।
सहकारिता तंत्र में व्यवस्थागत सुधार: पैक्स और लैम्पस कर्मियों के लंबे संघर्ष को मिली सफलता
सहकारी आंदोलन त्रिस्तरीय ढांचागत परिदृश्य मे प्रशासनिक सुधारों और व्यवस्थागत बदलावों के पीछे ‘राजस्थान सहकारी कर्मचारी विकास मंच’ के प्रदेश प्रमुख नेतृत्वकर्ता नरपतसिंह चारण तथा अन्य कर्मचारियों का लंबा संघर्ष रहा है। उनके द्वारा लगातार उठाई गई मांगों और प्रशासनिक स्तर पर किए गए निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप, सहकारिता तंत्र में पैक्स (PACS) और लैम्पस (LAMPS) से जुड़ी तकनीकी और प्रक्रियात्मक समस्याओं के समाधान की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।इन दिशा-निर्देश से जिले की सहकारी समितियों और उनके कार्मिकों को बड़ी राहत मिलने तथा वित्तीय प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता आने की पूरी उम्मीद है


