सार
New Delhi : सहकारिता मंत्रालय ने आरबीआई से राज्य सहकारी बैंकों को राहत देने का अनुरोध किया है। मांग है कि सरकारी प्रतिभूतियों पर हुए मूल्यांकन नुकसान को पांच वर्षों में समायोजित करने की अनुमति दी जाए।

विस्तार
नई दिल्ली । डिजिटल डेस्क । 18 अप्रैल । सहकारिता मंत्रालय ने राज्य सहकारी बैंकों (StCBs) की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर को पत्र लिखकर विशेष रियायत देने का अनुरोध किया है। वैश्विक अस्थिरता के कारण बॉन्ड की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे बैंकों को ‘एवेलेबल फॉर सेल’ (AFS) श्रेणी की सरकारी प्रतिभूतियों पर भारी ‘मार्क-टू-मार्केट’ (MTM) घाटा उठाना पड़ रहा है। मंत्रालय ने मांग की है कि 31 मार्च 2026 तक हुए इस मूल्यांकन नुकसान को बैंकों को एक साथ दिखाने के बजाय, अगले 5 वर्षों में किस्तों में समायोजित (Amortize) करने की अनुमति दी जाए। इस मांग के लिए 2005 के उस नियम का आधार लिया गया है, जिसमें शहरी सहकारी बैंकों को इसी तरह की राहत दी गई थी। यदि आरबीआई इसे स्वीकार करता है, तो सहकारी बैंकों की लाभप्रदता और पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) पर पड़ने वाला तत्काल दबाव कम हो जाएगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राष्ट्रीय महासंघ ने बैंकों की वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर की थी।


