Home जयपुर सहकारी समितियों की ऑडिट में लापरवाही पर विभाग सख्त, मुख्यालय पर उपस्थित होकर ही करना होगा अंकेक्षण कार्य

सहकारी समितियों की ऑडिट में लापरवाही पर विभाग सख्त, मुख्यालय पर उपस्थित होकर ही करना होगा अंकेक्षण कार्य

सार 

Jaipur : सहकारिता विभाग पंजीयक (Registrar) ने सहकारी समितियों की ऑडिट में लापरवाही रोकने के लिए ऑडिटरों और सीए फर्मों का मुख्यालय पर उपस्थित होना अनिवार्य कर दिया है। नियमों का उल्लंघन या वित्तीय गड़बड़ियां छिपाने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विस्तार 

जयपुर । डिजिटल डेस्क | 29 मई | सहकारिता विभाग ने प्रदेश की सहकारी समितियों की वार्षिक वैधानिक लेखा परीक्षा (ऑडिट) में सामने आ रही गंभीर लापरवाहियों को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया है । सहकारिता विभाग पंजीयक (Registrar) द्वारा जारी एक ताजा परिपत्र के अनुसार, विभाग के संज्ञान में आया है कि कई विभागीय लेखा परीक्षक और चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) फर्में सहकारी समितियों के मुख्यालय पर उपस्थित हुए बिना ही ऑडिट कार्य निपटा रही हैं इसे सहकारिता विभाग पंजीयक (Registrar) डॉ. समित शर्मा ने राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम 2001, नियम 2003 और विभागीय दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन माना है अब रजिस्ट्रार ने यह पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है कि सभी विभागीय अंकेक्षकों और सीए फर्मों को संबंधित सहकारी समिति के मुख्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा और वहां मौजूद मूल अभिलेखों एवं लेखा पुस्तकों के गहन भौतिक आधार पर ही अंकेक्षण कार्य संपादित करना होगा मुख्यालय से नदारद रहकर मनमाने तरीके से ऑडिट करने की परिपाटी पर अब पूरी तरह रोक लगा दी गई है

सहकारिता विभाग पंजीयक, डॉ. समित शर्मा

इस नए आदेश के तहत रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया है कि ऑडिट महज एक कागजी औपचारिकता बनकर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह वास्तविक और धरातलीय परीक्षण पर आधारित होनी चाहिए अक्सर देखा गया है कि ऑडिट रिपोर्टों में वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र तो कर दिया जाता है, लेकिन उन्हें प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं होते इसी वजह से अब मुख्यालय पर उपस्थिति दर्ज कराकर स्टॉक, नकद राशि, बैंक खातों, ऋण वितरण, लोन रिकवरी और एनपीए जैसे महत्वपूर्ण वित्तीय बिंदुओं का मौके पर ही वास्तविक सत्यापन करना होगा यदि कोई समिति या उसका अधिकारी ऑडिट के दौरान कैश बुक, लेजर, वाउचर या स्टॉक रजिस्टर जैसे जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराता है या सहयोग नहीं करता है, तो ऑडिटरों को इसकी स्पष्ट टिप्पणी अपनी रिपोर्ट में उत्तरदायित्व तय करते हुए दर्ज करनी होगी ऐसे असहयोग करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए मामला उप पंजीयक को भेजा जाएगा

रजिस्ट्रार ने चेतावनी दी है कि गबन, धन का दुरुपयोग या नियमों के खिलाफ जाकर बांटे गए कर्ज जैसी वित्तीय गड़बड़ियों को छुपाने की कोशिश अब भारी पड़ेगी यदि भविष्य में किसी जांच, निरीक्षण या आगामी ऑडिट के दौरान पुरानी वित्तीय अनियमितताओं को छुपाने का मामला सामने आता है, तो संबंधित अंकेक्षक या सीए फर्म की सीधी जिम्मेदारी तय की जाएगी और उनके खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक प्रावधानों के अंतर्गत कठोर कार्रवाई अमल में लाते हुए दायित्व निर्धारण किया जाएगा इसके अलावा सीए फर्मों के लिए यह भी साफ कर दिया गया है कि निर्धारित समयावधि में मूल ऑडिट रिपोर्ट संबंधित कार्यालय में प्रस्तुत किए बिना उन्हें किसी भी प्रकार के अंकेक्षण शुल्क का भुगतान नहीं किया जाएगा और उन्हें विभाग की मासिक समीक्षा बैठकों में भी अनिवार्य रूप से शामिल होना होगा

लापरवाही रोकने के लिए नियमित मॉनिटरिंग पर जोर

इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए क्षेत्रीय अंकेक्षण अधिकारियों और विशेष लेखा परीक्षकों को नियमित निगरानी एवं प्रभावी पर्यवेक्षण का जिम्मा सौंपा गया है । उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे अधीनस्थ लेखा परीक्षकों की प्रगति की मासिक समीक्षा करें और रिपोर्टों के पूरी तरह जांचने के बाद ही उन्हें आगे बढ़ाएं । यदि कार्य के दौरान किसी भी स्तर पर बड़ी वित्तीय धांधली या गबन उजागर होता है, तो अधिनियम की धारा 57 के तहत तुरंत सक्षम स्तर पर मामला दर्ज कराने की अनुशंसा की जाएगी । सहकारिता विभाग की इस सख्ती का मुख्य उद्देश्य सहकारी संस्थाओं की पूरी लेखा परीक्षा प्रणाली को अधिक तथ्यपरक, जिम्मेदार और पारदर्शी बनाना है ।

 

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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