Home जोधपुर हाईकोर्ट का सहकारिता विभाग को निर्देश नियमों के तहत ही करें नई ग्राम सेवा सहकारी समिति का गठन या विभाजन

हाईकोर्ट का सहकारिता विभाग को निर्देश नियमों के तहत ही करें नई ग्राम सेवा सहकारी समिति का गठन या विभाजन

सार 

Jodhpur : राजस्थान हाईकोर्ट ने सामराऊ, एकलखोरी, नांदिया कलां सहित तीन अन्य ग्राम सेवा सहकारी समिति (Pacs) की याचिका निस्तारित करते हुए सहकारिता विभाग को निर्देश दिया है कि भविष्य में किसी भी नई समिति का गठन या विभाजन कानूनी नियमों के अनुसार ही किया जाए।

विस्तार 

जोधपुर । डिजिटल डेस्क | 22 मई | राजस्थान उच्च न्यायालय ने सामराऊ, एकलखोरी, नांदिया कलां सहित तीन अन्य ग्राम सेवा सहकारी समितियों के अध्यक्षों द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सहकारिता विभाग को निर्देश दिए हैं कि वह किसी भी नई ग्राम सेवा सहकारी समिति का गठन अथवा विभाजन सहकारी नियमों के अनुसार ही करे। इस मामले में दोनों पक्षों की सहमति के बाद न्यायालय ने इस याचिका को पूरी तरह से निस्तारित कर दिया है। इस मामले में सहकारिता विभाग शासन सचिव, सहकारिता विभाग पंजीयक (Registrar) सहित उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां जोधपुर को प्रतिवादी बनाया गया था।

इन समितियों की मुख्य चिंता यह थी कि सरकार उनके कार्यक्षेत्र का विभाजन करके किसी नई सहकारी समिति का गठन करने की योजना बना रही थी। समितियों का स्पष्ट कहना था कि विभाग ने उन्हें अपनी बात रखने का कोई उचित अवसर नहीं दिया, जो कि स्थापित नियमों के खिलाफ है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता डॉ. अशोक चौधरी और सरकारी पक्ष के अधिवक्ता अर्पित समरिया ने न्यायाधीश के सामने एक पुराना संदर्भ रखा। दोनों ही पक्षों ने आपसी सहमति से यह स्वीकार किया कि ऐसा ही एक मिलता-जुलता मामला साल 2023 में ‘22 ए ग्राम सेवा सहकारी समिति लिमिटेड’ के नाम से भी आया था, जिसका फैसला उच्च न्यायालय ने 29 मई 2023 को किया था।

उस पुराने मामले में भी विभाग को सख्त निर्देश दिए गए थे कि वे जब भी किसी नई समिति का गठन करें, तो राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की धारा 13 और नियम 2003 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करें। हाईकोर्ट जस्टिस मुकेश राजपुरोहित ने इस पूरे मामले को गंभीरता से समझा और दोनों पक्षों के वकीलों की आपसी सहमति को ध्यान में रखते हुए अपना अंतिम निर्णय सुनाया। उन्होंने सहकारिता विभाग को आदेश दिया है कि भविष्य में अगर इन समितियों के क्षेत्र में कोई भी नया बदलाव या गठन किया जाता है, तो वह पूरी तरह से कानूनी नियमों के दायरे में रहकर ही किया जाए। इस अंतिम आदेश के साथ ही हाईकोर्ट ने मुख्य रिट याचिका और उसके साथ लगे स्थगन को भी निस्तारित कर दिया है।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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