Home जयपुर ऋण माफी का दंश : राजस्थान के केंद्रीय सहकारी बैंक भारी घाटे में, कर्मचारी संघ ने सरकार से मांगा राहत पैकेज

ऋण माफी का दंश : राजस्थान के केंद्रीय सहकारी बैंक भारी घाटे में, कर्मचारी संघ ने सरकार से मांगा राहत पैकेज

सार 

Jaipur : राजस्थान के केंद्रीय सहकारी बैंक ऋण माफी योजना का बकाया ब्याज न मिलने से भारी घाटे में हैं। कर्मचारी संघ ने सरकार से तुरंत भुगतान, राहत पैकेज और नियमों के उल्लंघन की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

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विस्तार 

जयपुर । डिजिटल डेस्क | 22 मई | राजस्थान के केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCBs) की वित्तीय स्थिति इस समय बेहद खराब हो चुकी है। ऋण माफी योजना के कारण वे गहरे संकट में फंस गए हैं। इसे लेकर अखिल राजस्थान सहकारी बैंक्स अधिकारी एसोसिएशन और राजस्थान सहकारी बैंक कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष रघुवीर शर्मा ने राज्य सरकार के सामने अपनी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सहकारिता मंत्री को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने बताया है कि प्रदेश के कई बैंक भारी घाटे में चल रहे हैं। वे इस नुकसान का सबसे बड़ा कारण वर्ष 2018-19 की ऋण माफी योजना को मानते हैं। सरकार ने इसके तहत देय करोड़ों रुपये की ब्याज राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया है। समय पर यह राशि न मिलने से कई बैंक बहुत कमजोर हो गए हैं। इससे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा संकट आ गया है।

पत्र में विशेष रूप से बूंदी केंद्रीय सहकारी बैंक का हवाला दिया गया है। 31 मार्च 2026 तक इस बैंक की राज्य सरकार की ओर 19.90 करोड़ रुपये की ब्याज राशि बकाया थी। भुगतान न होने के कारण बैंक का घाटा बढ़ गया है और इसका CRAR (Capital to Risk-weighted Assets Ratio) गिरकर महज 6.46 प्रतिशत रह गया है, जो निर्धारित मापदंडों से काफी कम है। CRAR कम होने की वजह से बूंदी बैंक को नाबार्ड (NABARD) से पुनर्भरण (Refinance) नहीं मिल सकेगा। इसके चलते जिले के किसानों को फसली ऋण (Crop Loan) और सहकारी समितियों को खाद-बीज के लिए लोन मिलने में भारी दिक्कत आ सकती है। प्रदेश के अन्य कमजोर श्रेणी के सहकारी बैंकों की भी यही स्थिति होने की आशंका जताई गई है।

सरकार द्वारा घाटे में चल रहे इन कमजोर सहकारी बैंकों को उबारने के लिए “Turn Around Plan” अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, कर्मचारी संघ का कहना है कि इस योजना और प्रयासों की पूरी कवायद इन्हीं घाटे में चल रहे बैंकों के स्तर से करवाई जा रही है, जो कि न्यायसंगत नहीं है। उनकी मांग है कि वर्ष 2018-19 की ऋण माफी योजना के तहत बकाया ब्याज राशि बैंकों को तुरंत दी जाए। यदि राज्य सरकार के पास बजट की कमी है, तो केंद्र की ‘डबल इंजन सरकार’ से विशेष राहत पैकेज की मांग की जाए। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया है कि सरकारी विभागों की राशि इन्हीं सहकारी बैंकों में जमा करवाई जाए । इसके अतिरिक्त, सहकारिता के क्षेत्र में बढ़ते घोटालों को रोकने के लिए उन्होंने एक ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ बनाने की वकालत भी की है।

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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