#Jalore भौगोलिक पृष्ठभूमि से लेकर प्रांतीय नेतृत्व तक: सहकारी आंदोलन के चार दशकों की गौरवगाथा

विशेष रिपोर्ट: |प्रकाश वैष्णव | जालोर 5 अगस्त |जालोर। पश्चिम राजस्थान की धवल मरुधरा, ग्रेनाइट नगरी और ऐतिहासिक विरासत से सुसज्जित जालोर जिला अपनी अनूठी भौगोलिक एवं कृषि-जलवायुिक विशेषताओं के लिए पूरे प्रदेश में विशिष्ट पहचान रखता है। यहां के पैक्स (PACS) और लैम्पस (LAMPS) कर्मियों के अधिकारों, संगठन के सुदृढ़ीकरण तथा सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में जालोर जिला पैक्स व्यवस्थापक यूनियन का इतिहास बेहद संघर्षशील और प्रेरणादायी रहा है। वर्ष 1977 में रोपी गई सहकारिता संगठन की यह पौध आज एक मजबूत वटवृक्ष का रूप ले चुकी है, जिसके सफर में कई नेतृत्वकर्ताओं ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है।जालोर जिले की भौगोलिक बनावट बेहद विविध है। अरावली पर्वतमाला की छिटपुट श्रृंखलाएं और जसवंतपुरा की पहाड़ियाँ (जिन्हें सुंधा माता पर्वत क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है) इस क्षेत्र के भू-दृश्य को अनूठा बनाती हैं। जिले की मुख्य जीवनदायिनी नदी लूनी नदी तथा उसकी सहायक नदियाँ (जैसे सुकड़ी, जवाई, खारी और बांडी) इस भू-भाग से गुजरती हैं, जो यहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि की रीढ़ हैं। अरावली के आंचल से निकलने वाली इन नदियों के बहाव क्षेत्र के आसपास की उपजाऊ भूमि पर यहाँ के किसान पारंपरिक खेती करते हैं।कृषि-जलवायु खंड (Agro-Climatic Zone) के दृष्टिकोण से जालोर शुष्क एवं अर्ध-शुष्क संक्रांति क्षेत्र (Zone II-B Transitional Plain of Luni Basin) के अंतर्गत आता है। यहाँ बाजरा, ज्वार, इसागोल (साइलियम भूसी), जीरा, कपास, मूंग और सरसों की बंपर पैदावार होती है। कृषि आधारित इस अर्थव्यवस्था में किसानों को समय पर खाद, बीज और ऋण उपलब्ध कराने में पैक्स (Primary Agricultural Credit Societies) और लैम्पस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
सहकारी आंदोलन का त्रिस्तरीय ढांचागत अतीत और व्यवस्थापक यूनियन की नींव (1977)
राजस्थान में सहकारी आंदोलन का त्रिस्तरीय ढांचा सक्रिय है—शीर्ष स्तर पर अपेक्स बैंक (राजफैड/कोआपरेटिव बैंक), मध्यवर्ती स्तर पर केंद्रीय सहकारी बैंक (Central Cooperative Bank), और आधार स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में पैक्स एवं लैम्पस कार्यरत हैं। इस त्रिस्तरीय व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी ग्रामीण स्तर के पैक्स हैं, जिनका संचालन व्यवस्थापक और कार्मिक करते हैं।वर्ष 1977 से जालोर जिले में कार्यरत सहकारी समितियों के पैक्स कर्मियों के हितों, संगठन एकीकरण और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए ‘व्यवस्थापक यूनियन’ की नींव रखी गई। जब पहली बार जालोर में संगठन की पहल हुई, तो पैक्स कर्मियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक मजबूत जिला संगठन की आवश्यकता महसूस हुई, जिसके परिणामस्वरूप जालोर जिला व्यवस्थापक यूनियन का औपचारिक गठन किया गया।
व्यवस्थापक यूनियन नेतृत्व का संघर्ष, व्यावहारिक नीतिगत निर्णय एवं वर्तमान कार्य-परिदृश्य
सहकारिता क्षेत्र में पैक्स-लैम्पस कार्मिक और व्यवस्थापक रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। किसानों को खाद-बीज वितरण, अल्पकालीन ऋण प्रबंधन और सरकारी योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन में इनकी भूमिका सर्वोपरि है। हालांकि, लंबे समय तक पैक्स कार्मिकों को उचित वेतनमान, जॉब सिक्योरिटी और प्रशासनिक संरक्षण जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।इन चुनौतियों के समाधान के लिए व्यवस्थापक यूनियन के नेतृत्व ने हमेशा संघर्ष का मार्ग चुना। पूर्ववर्ती नेतृत्व से लेकर वर्तमान नेतृत्व तक, यूनियन ने शासन-प्रशासन के साथ संवाद और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन के माध्यम से व्यावहारिक नीतिगत निर्णय करवाएं। पैक्स कार्मिकों के सेवा नियमों (Service Rules) को दुरुस्त करवाने, समय पर वेतन भुगतान और मानदेय विसंगतियों को दूर करने में यूनियन के संघर्ष ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

वर्तमान नेतृत्व: हनुमानसिंह राजावत का प्रांतीय स्तर पर विजन, संघर्ष और मान-सम्मान
वर्ष 2019 से जालोर जिला पैक्स व्यवस्थापक यूनियन की कमान संभाल रहे हनुमानसिंह राजावत ने अपने कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व से न केवल जालोर जिले में बल्कि पूरे राजस्थान (प्रांतीय स्तर) पर व्यवस्थापक यूनियन का मान-सम्मान कई गुना बढ़ा दिया है। उनके नेतृत्व में यूनियन ने स्थानीय मुद्दों से ऊपर उठकर प्रांतीय स्तर पर नीति-निर्धारक (Policy Maker) की भूमिका निभाई है।
श्री राजावत के नेतृत्व की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- प्रांतीय स्तर पर मुखर पैरवी: प्रदेश भर के पैक्स-लैम्पस कार्मिकों के अधिकारों, कैडर रिव्यू, और पारदर्शी नीति-निर्धारण के लिए जयपुर से लेकर जिला मुख्यालयों तक सशक्त आवाज बुलंद की है।
- व्यावहारिक नीतिगत निर्णय: शासन के उच्च स्तर पर सहकारिता विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर कार्मिकहित में कई व्यावहारिक नीतिगत बदलाव और निर्णय लागू करवाए हैं।
- कर्मचारियों का हक और सुरक्षा: पैक्स कार्मिकों की जॉब सिक्योरिटी, पेंशन/ग्रैच्युटी और वित्तीय सुरक्षा के मुद्दों पर ऐतिहासिक संघर्ष का नेतृत्व किया है।
- यूनियन की गरिमा और प्रतिष्ठा: जालोर जिले के सहकारिता इतिहास में यूनियन को एक सम्मानित और अनुशासित संगठन के रूप में स्थापित किया है, जिससे प्रदेशभर में जालोर का नाम रोशन हुआ है।
एक्सपर्ट व्यू -सहकारिता की नई ऊंचाइयां
वरीगाराम विश्नोई द्वारा 1977 में जलाई गई सहकारिता संघर्ष की मशाल आज हनुमानसिंह राजावत के ओजस्वी नेतृत्व में और अधिक प्रखर हो चुकी है। पुराने नेतृत्व के त्याग, तपस्या और समर्पण की नींव पर खड़े वर्तमान नेतृत्व ने पैक्स आंदोलन को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। जालोर जिले का यह सहकार सफर इस बात का प्रमाण है कि जब नेतृत्व निष्ठावान, संघर्षशील और नीति-कुशल हो, तो कठिन से कठिन प्रशासनिक चुनौतियों को भी सकारात्मक पहलों में बदला जा सकता है।


