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सहकारिता से समृद्धि के दावे खोखले, पैक्स कर्मियों को न वेतन न पेंशन: आमेरा

सार

श्रीगंगानगर में आयोजित पैक्स कर्मियों के सम्मेलन में सहकार नेता सूरजभान सिंह आमेरा ने कर्मियों के शोषण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बिना वेतन, पेंशन और बुनियादी सुविधाओं के ‘सहकार से समृद्धि’ का नारा खोखला है। आमेरा ने अव्यवहारिक ‘एम-पैक्स’ गठन का विरोध करते हुए सरकार से बैंक कर्मियों की तर्ज पर सुविधाओं की मांग की।

विस्तार 

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श्रीगंगानगर।॥ डिजिटल ङेस्क 10 जुलाई ॥ प्रदेश के सहकारी पैक्स (PACS) कर्मियों की दयनीय स्थिति और सहकारी तंत्र की विसंगतियों को लेकर सहकार नेता सूरजभान सिंह आमेरा ने सरकार और सहकारी विभाग पर तीखा हमला बोला है धान मंडी स्थित ट्रेडर्स एसोसिएशन के विशाल सभागार में आयोजित पैक्स कर्मियों के भव्य जिला सम्मेलन में आमेरा ने दो-टूक कहा कि

जब तक पैक्स कर्मी का पेट खाली रहेगा और उसका भविष्य असुरक्षित रहेगा, तब तक ‘सहकार से समृद्धि’ का नारा केवल एक कागजी सपना बनकर रह जाएगा तथा आमेरा ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए गहरी चिंता जताई कि देश आज आजादी का अमृत काल मना रहा है, लेकिन प्रदेश के सहकारी पैक्स कर्मियों के लिए यह काल किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। उन्होंने कहा, “यह विडंबना ही है कि त्रि-स्तरीय सहकारी साख ढांचे में जहां बैंक करोड़ों रुपये का आयकर सरकार को दे रहे हैं, वहीं उस व्यवस्था के अभिन्न अंग—पैक्स कर्मी—दो जून की रोटी के लिए मोहताज हैं।”

आमेरा ने मंच से सरकार और सहकारिता विभाग से सवाल किया कि आखिर ऐसी व्यवस्था का क्या औचित्य है, जहां कर्मी को न तो नियमित वेतन मिलता है, न ही पीएफ कटौती, चिकित्सा सुविधा, ग्रेच्युटी या उपार्जित अवकाश जैसी बुनियादी सहूलियतें हासिल हैं। उन्होंने इसे सहकारिता की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति करार दिया और आमेरा ने अपने संबोधन के समापन पर सभी कर्मियों से आह्वान किया कि अनुशासित और मजबूत संगठन ही उनकी पीड़ा का अंतिम निवारण करेगा। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक प्रत्येक पैक्स कर्मी को सुरक्षित भविष्य और सम्मानजनक वेतन नहीं मिल जाता।

अव्यवहारिक ‘एम-पैक्स’ और टुकड़ों में बंटवारा

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह की सहकारी नवाचार पहल और तकनीकी क्रांति का स्वागत करते हुए आमेरा ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हर पंचायत में ‘कोई भी एक’ सहकारी समिति खोलने का निर्णय लिया है, न कि हर पंचायत में जबरन नई ‘एम-पैक्स’ (MPACS) खोलने का। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्तरों पर मौजूदा पैक्स के टुकड़े-टुकड़े कर नई पैक्स बनाने की जो कवायद की जा रही है, वह अव्यवहारिक और आर्थिक रूप से नुकसानदेह है। ऐसी मनमानीपूर्ण कार्यवाही पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए।

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संगठन की मजबूती पर जोर

जिला अध्यक्ष प्रगट सिंह ने आमेरा का साफा पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आमेरा के अनुभवी और ईमानदार नेतृत्व में ही पैक्स कर्मियों की पीड़ा का निवारण संभव है। सम्मेलन में वीरेंद्र यादव, राजकुमार वर्मा, रवि गोदारा, जसवंत पचार, सुखदीप सिंह संधू, जसविंदर सिंह बराड़, राम भक्त शर्मा, रमेश ढाँका (हनुमानगढ़) सहित पंजाब के पैक्स अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में आमेरा पर पूर्ण विश्वास जताते हुए बैंक कर्मियों की तर्ज पर पैक्स कर्मियों को सुविधाएं दिलाने का आह्वान किया।

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परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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