मुख्य बिंदु:
सहकारी संस्थाओं की सदस्यता छोड़ने, त्यागपत्र देने या मृत्यु होने पर किसानों को उनका बकाया ऋण चुकाने के बाद अंश पूंजी (Share Capital), लाभांश (Dividend) सहित वापस मिलने का प्रावधान है। राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2001 के तहत यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता से संचालित होती है।
विस्तृत
जयपुर (Jaipur):सहकारी जगत ग्राउंड रिपोर्ट 26 सितंबर प्रदेश के किसानों (Farmers) के लिए सहकारिता (Co-operation) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और जनहितैषी व्यवस्था लागू है। नियमों के मुताबिक, जब कोई कृषक सदस्य (Farmer Member) किसी सहकारी संस्था (Co-operative Institution) की सदस्यता (Membership) छोड़ता है या किन्हीं कारणों से उसकी मृत्यु (Death) हो जाती है, तो उसके द्वारा पूर्व में जमा की गई हिस्सा राशि (Share Capital) को लौटाए जाने का स्पष्ट प्रावधान (Provision) है। सहकारिता संस्थाएं (Co-operative Societies) अपने स्तर पर उपलब्ध तरल संसाधनों (Liquid Resources) और वित्तीय व्यवस्थाओं (Financial Arrangements) के जरिए सदस्य किसान (Member Farmer) की यह अंश पूंजी (Share Capital) वापस लौटाने के लिए अधिकृत हैं।
प्रदेश (State) के विभिन्न जिलों में कार्यरत केंद्रीय सहकारी बैंकों (Central Cooperative Banks) के अंतर्गत आने वाली तमाम पैक्स (Primary Agricultural Credit Societies) और समितियों (Societies) में किसानों की यह राशि नियमानुसार जमा होती है। इस पूरी प्रक्रिया का सुचारू संचालन संबंधित केंद्रीय सहकारी बैंकों (Central Cooperative Banks) के पंजीकृत उपनियमों ( Bye-laws) और राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2001 (Rajasthan Cooperative Societies Act, 2001) की धारा 16 (1) के प्रावधानों के तहत किया जाता है। इसके अंतर्गत यदि किसी सदस्य (Member) की सदस्यता (Membership) किसी अयोग्यता (Disqualification) के कारण समाप्त हो जाती है अथवा वह स्वेच्छा से सदस्यता (Membership) से त्याग पत्र (Resignation) दे देता है, और संस्था द्वारा उसका त्यागपत्र (Resignation) स्वीकार कर लिया जाता है, तो उसे नियमानुसार अपनी अंश पूंजी (Share Capital) प्राप्त करने का अधिकार रहता है।
बैंक (Bank) के दिशा-निर्देशों (Guidelines) के अनुसार, संबंधित किसान (Farmer) या उसके उत्तराधिकारियों को सबसे पहले अपनी बकाया ऋण राशि का पूर्ण भुगतान (Full Payment) करना होता है। इसके पश्चात, बैंक (Bank) द्वारा हिस्सा प्रमाण पत्र (Share Certificate) वापस लेकर उसकी अंश पूंजी (Share Capital), उस पर घोषित लाभांश (Dividend) सहित पूरी पारदर्शिता (Transparency) के साथ लौटा दी जाती है। इस व्यवस्था से ग्रामीण आंचल (Rural Areas) के किसानों (Farmers) को बड़ा वित्तीय संबल (Financial Support) मिलता है और सहकारिता तंत्र (Co-operative System) में पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित होती है।
सहकारी अधिनियम (Cooperative Act): बकाया ऋण (Outstanding Loan) का चुकता कर और औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर अन्नदाता प्राप्त कर सकते हैं अपनी अंश पूंजी (Share Capital)
सहकारिता विभाग (Co-operation Department) के प्रशासनिक ढांचे में किसानों के हितों की रक्षा के लिए पुख्ता कानूनी (Legal) और व्यावहारिक प्रावधान (Practical Provisions) तय किए गए हैं। जानकारों के अनुसार, प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (PACS) और केंद्रीय सहकारी बैंकों (Central Cooperative Banks) के बीच होने वाले वित्तीय लेन-देन (Financial Transactions) में किसानों की हिस्सेदारी (Participation) पूरी तरह सुरक्षित (Secure) रहती है। राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2001 (Rajasthan Cooperative Societies Act, 2001) के दायरे में यह स्पष्ट रूप से सुनिश्चित किया जाता है कि जब कोई कृषक अपनी सदस्यता (Membership) का त्याग करता है या वैधानिक कारणों (Legal Reasons) से उसकी सदस्यता (Membership) समाप्त होती है, तो उसे उसकी वैध पूंजी (Valid Capital) से वंचित न किया जाए। हालांकि, इस प्रक्रिया (Process) का लाभ उठाने के लिए यह अनिवार्य शर्त (Mandatory Condition) है कि किसान पर बैंक (Bank) का किसी भी प्रकार का ऋण (Loan) बकाया न हो। बकाए ऋण का पूरा भुगतान (Payment) करने के बाद ही हिस्सा राशि वापसी (Share Capital Refund) की पत्रावली (File) पर अग्रिम कार्रवाई की जाती है।


