सार
Jaipur : सहकारिता विभाग ने अल्पकालीन फसली ऋण प्रक्रिया में सुधार के लिए राजस्थान राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी अन्य राज्यों और नाबार्ड के नियमों के अनुसार सालाना (एक बारीय) ऋण व्यवस्था का अध्ययन कर एक माह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

विस्तार
जयपुर । 20 जून | डिजिटल डेस्क | सहकारिता विभाग ने राज्य में प्रचलित अल्पकालीन फसली ऋण प्रक्रिया का गहन अध्ययन करने और उसमें व्यावहारिक सुधार के लिए युक्तियुक्त सुझाव देने हेतु एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया है। सहकारिता विभाग पंजीयक (Rcs) द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, राज्य में वर्तमान में खरीफ और रबी फसलों के लिए अलग-अलग अल्पकालीन फसली ऋण दिया जाता है, जिनकी देय तिथियां क्रमशः 31 मार्च और 30 जून निर्धारित हैं। इसके विपरीत, अन्य राज्यों में इस प्रकार का अल्पकालीन फसली ऋण साल में केवल एक बार (एक बारीय) प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में भी इस तरह के अल्पकालीन फसली ऋण को एक वर्ष की अवधि के लिए दिए जाने का स्पष्ट प्रावधान है। इन्हीं भिन्नताओं और व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अब सहकारिता विभाग पंजीयक द्वारा पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया । इसमें राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (RSCB) के प्रबन्ध निदेशक को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके अलावा केन्द्रीय सहकारी बैंक जयपुर प्रबन्ध निदेशक, केन्द्रीय सहकारी बैंक कोटा प्रबन्ध निदेशक तथा केन्द्रीय सहकारी बैंक दौसा प्रबन्ध निदेशक को बतौर सदस्य इस कमेटी में शामिल किया गया है। वहीं, राजस्थान राज्य सहकारी बैंक जयपुर उप महाप्रबन्धक (परिचालन) को इस समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। यह नवगठित कमेटी राजस्थान की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में ऋण वितरण की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा करेगी और एक माह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सहकारिता विभाग को आवश्यक रूप से प्रस्तुत करेगी।


