सार
Jodhpur : राजस्थान उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना को राहत देते हुए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार जांच की मंजूरी पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने 27 अप्रैल तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर पाबंदी लगाई है।

विस्तार
जोधपुर। डिजिटल डेस्क | 16 अप्रैल | राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर ने पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना को बड़ी राहत देते हुए उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17ए के तहत दी गई जांच की मंजूरी पर फिलहाल रोक लगा दी है । जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने यह अंतरिम आदेश उदयलाल आंजना द्वारा दायर सिविल रिट याचिका संख्या 6596/2026 पर सुनवाई करते हुए जारी किया । एकलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आगामी सुनवाई की तिथि तक, याचिकाकर्ता के खिलाफ 17 फरवरी 2026 और 26 फरवरी 2026 को जारी उन आदेशों के क्रम में कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, जिनके जरिए प्रारंभिक जांच की अनुमति दी गई थी । इस मामले में पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना की ओर से अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी, सारांश विज, गौरव कुमार सिंह और विजय चौधरी ने पैरवी की । अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को होगी ।
सहकारिता विभाग ने नियुक्त किया OIC
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद विभाग स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। अतिरिक्त रजिस्ट्रार (अपील्स) सहकारी समितियां, जोधपुर द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर जयपुर केंद्रीय सहकारी बैंक (CCB) के अधिशाषी अधिकारी राजेंद्र कुमार मीणा को प्रभारी अधिकारी (OIC) नियुक्त किया गया है । प्रभारी अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे तुरंत राजकीय अधिवक्ता से संपर्क कर प्रकरण के तथ्यों की जानकारी दें और न्यायालय में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें । आदेश के अनुसार, प्रभारी अधिकारी को प्रकरण से संबंधित सभी पत्रावलियां, नियम और दिशा-निर्देश एकत्रित करने तथा तथ्यात्मक प्रतिवेदन (Factual Report) तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है । इसके साथ ही, उन्हें प्रत्येक पेशी पर न्यायालय में उपस्थित रहने और प्रकरण की नवीनतम प्रगति से विभाग को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं । इस प्रकरण में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता नाथू सिंह राठौड़ पक्ष रखेंगे ।


