सार
नाबार्ड के खुलासे से स्पष्ट: वर्ष 2025-26 में 7,670.54 करोड़ रुपये के मुकाबले चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 24 जुलाई तक 770 करोड़ रुपये का अल्पकालीन पुनर्वित्त जारी; जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCB) को लेकर सामने आए अहम तकनीकी पहलू।
विस्तार

जयपुर / जालोर | सहकारी जगत की ग्राउंड रिपोर्ट |प्रदेश के अन्नदाताओं को समय पर और सुगम अल्पकालीन फसली ऋण उपलब्ध कराने वाले त्रिस्तरीय सहकारी साख ढांचे (Three-Tier Cooperative Credit Structure) की वित्तीय स्थिति और पुनर्वित्त (Refinance) आवंटन को लेकर राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने आरटीआई के तहत अधिकृत आंकड़े साझा किए हैं। इन ताजा दस्तावेजों ने प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारिता तंत्र की धुरी कहे जाने वाले इस ढांचे की कार्यप्रणाली पर नया प्रकाश डाला है।नाबार्ड के प्रावधानों के अनुसार, नाबार्ड द्वारा राज्य सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अल्पावधि एवं दीर्घावधि पुनर्वित्त उपलब्ध कराया जाता है। पात्र जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) द्वारा जमीनी स्तर पर किसानों को वितरित किए जाने वाले फसली ऋणों के विरुद्ध पुनर्वित्त सहायता सीधे उनके पक्ष में अपेक्स बैंक (RStCB) को जारी की जाती है। यही कारण है कि नाबार्ड के केंद्रीय अभिलेखों में सीधे बैंक-वार (DCCB-wise) ऋण वितरण के पृथक आंकड़े संधारित नहीं होते, बल्कि संपूर्ण आवंटन अपेक्स बैंक के माध्यम से प्रबंधित होता है।
चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में पुनर्वित्त आवंटन की स्थिति
उपलब्ध करवाई जानकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अन्नदाताओं को खाद, बीज और कृषि कार्यों के लिए आसानी से ऋण उपलब्ध करवाने के वास्ते नाबार्ड ने राजस्थान राज्य सहकारी बैंक को 7,670.54 करोड़ रुपये की भारी-भरकम पुनर्वित्त राशि जारी की थी। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 24 जुलाई 2026 तक 770.00 करोड़ रुपये का पुनर्वित्त जारी किया जा चुका है। सहकारिता विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे खरीफ और रबी सीजन की मांग आगे बढ़ेगी, इस पुनर्वित्त आवंटन में और अधिक तेजी आएगी।

जालोर केंद्रीय सहकारी बैंक और वैधानिक निरीक्षण का दायरा
रिपोर्ट के अनुसार, जालोर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCB) के वित्तीय वर्ष 2024-25 (31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति पर आधारित) के वैधानिक निरीक्षण (Statutory Inspection) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। नाबार्ड ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण रिपोर्टों में पर्यवेक्षी निष्कर्ष, विनियामक आकलन और बैंक-विशेष के वित्तीय आंकड़े शामिल होते हैं, जिनका प्रकटीकरण सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा के तहत छूट प्राप्त श्रेणियों में आता है। साथ ही, रिकॉर्ड के अनुसार इस निरीक्षण के सिलसिले में जालोर DCCB को कोई ‘शो कॉज नोटिस’ जारी नहीं किया गया था, जो कि बैंक के वित्तीय संचालन में एक सकारात्मक व राहत भरा संकेत माना जा रहा है।
एक्सपर्ट व्यू: किसानों के लिए पुनर्वित्त और सहकारी साख के मायने
सहकारिता से जुड़े जानकारों का कहना है कि प्रदेश के लाखों किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर या रियायती दरों पर मिलने वाले अल्पकालीन फसली ऋणों की रीढ़ यह नाबार्ड पुनर्वित्त ही है। त्रिस्तरीय साख ढांचे के मजबूत रहने से ग्रामीण आंचल में नकदी का प्रवाह सुचारू रहता है, जिससे किसानों को समय पर कृषि इनपुट खरीदने में सहूलियत मिलती है। चालू वित्त वर्ष में मिले आवंटन से यह तय है कि इस वर्ष भी किसानों को खाद-बीज के लिए वित्तीय संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।


