Home राज्य राजस्थान सहकार की शक्ति से सजेगा ग्रामीण भारत: पैक्स कंप्यूटराइजेशन से गांवों में बैंकिंग क्रांति की दस्तक

सहकार की शक्ति से सजेगा ग्रामीण भारत: पैक्स कंप्यूटराइजेशन से गांवों में बैंकिंग क्रांति की दस्तक

सार 

Rajasthanकेंद्र सरकार के ‘पैक्स कंप्यूटराइजेशन’ से ग्रामीण भारत में बैंकिंग क्रांति आ रही है। गांवों में डिजिटल हो रही ग्राम सेवा सहकारी समितियां (PACS) अब किसानों को ऋण, कृषि इनपुट और सरकारी सेवाएं एक ही छत के नीचे पारदर्शी रूप से उपलब्ध कराएंगी।

विस्तार 

जोधपुर/बाड़मेर/जालोर।|डिजिटल डेस्क 19 जुलाई |सहकारिता के मूल मंत्र ‘एक सबके लिए, सब एक के लिए’ को धरातल पर उतारने वाले सहकारी आंदोलन का आधार स्तंभ ‘ग्राम सेवा सहकारी समितियां’ (PACS) अब नए डिजिटल युग के साथ कदमताल करने को तैयार हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली ये समितियां अब हाई-टेक होकर किसानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं।सहकारिता विभाग के जोधपुर खंड के अंतर्गत संचालित केंद्रीय सहकारी बैंक जालोर की चितलवाना शाखा क्षेत्र हो या फिर सीमावर्ती केंद्रीय सहकारी बैंक बाड़मेर की गिड़ा शाखा, वर्तमान में सहकारी आंदोलन का स्वरूप पूरी तरह बदल रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पैक्स कंप्यूटराइजेशन’ योजना के तहत इन क्षेत्रों में पैक्स का ‘ई-पैक्स‘ के रूप में घोषित होना न केवल तकनीकी बदलाव है, बल्कि सहकारी साख आंदोलन के भविष्य की एक बड़ी उपलब्धि है।

आधारभूत साख संरचना: जमीनी स्तर पर मजबूत कड़ी

सहकारी ऋण ढांचे की त्रिस्तरीय व्यवस्था में पैक्स सबसे अंतिम लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। ये समितियां न केवल ग्रामीण उधारकर्ताओं तक सीधे पहुंच बनाती हैं, बल्कि उन्हें ऋण वितरण और पुनर्भुगतान की सुगम सुविधा भी प्रदान करती हैं। आज ये समितियां मात्र ऋण देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि इनपुट—जैसे बीज और उर्वरकों—के वितरण से लेकर उपज के विपणन (मार्केटिंग) तक के कार्यों में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।​सहकारिता विशेषज्ञों का मानना है कि पैक्स, ग्रामीण उधारकर्ताओं और उच्च वित्तीय संस्थानों (एससीबी, नाबार्ड व आरबीआई) के बीच एक भरोसेमंद पुल का कार्य करते हैं। इनके बिना ग्रामीण वित्तीय समावेश की कल्पना करना कठिन है।

डिजिटलीकरण से पारदर्शी और आधुनिक सहकारिता

केंद्र सरकार की पैक्स कंप्यूटराइजेशन योजना ने इस पुराने और सबसे भरोसेमंद संस्थान को नई ऊर्जा दी है। एक राष्ट्र, एक सॉफ्टवेयर (ERP) के माध्यम से देश भर के 79,630 पैक्स में से 10 मार्च 2026 तक 61,842 पैक्स को सफलतापूर्वक माइग्रेट कर दिया गया है।

​डिजिटलीकरण के इस महायज्ञ से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि:

  • पारदर्शिता: किसानों को उनके ऋण खातों की रियल-टाइम जानकारी मिलेगी।
  • दक्षता: कागजी काम कम होने से ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी आएगी।
  • विविधता: पैक्स अब सीएससी (CSC) की तरह भी कार्य कर सकेंगे, जिससे किसानों को एक ही छत के नीचे बैंकिंग और सरकारी सुविधाएं मिलेंगी।

अतीत से आधुनिकता की ओर

सहकारी साख आंदोलन भारत में ग्रामीण समृद्धि का सबसे पुराना और भरोसेमंद माध्यम रहा है। चितलवाना और गिड़ा जैसी शाखाओं में हो रहा यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि यदि पुरानी नींव पर आधुनिक तकनीक की इमारत बनाई जाए, तो सहकारिता आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ बनी रह सकती है। आने वाला समय डिजिटल पैक्स का है, जो आत्मनिर्भर भारत के सपने को गांव की चौपाल तक ले जाने में मुख्य भूमिका निभाएगा।

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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