सार
#Rajasthan !राजस्थान में केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs)का NPA 883 करोड़ के पार पहुंच गया है। घाटे में चल रही ग्राम सेवा समितियों के सुधार के लिए सरकार प्रयास कर रही है।
विस्तार

जयपुर। |डिजिटल डेस्क 20 जुलाई |राजस्थान में सहकारिता विभाग के अंतर्गत आने वाली ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स) और केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) की वित्तीय स्थिति को लेकर विभाग ने विधानसभा में गंभीर स्वीकारोक्ति दी है। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न के जवाब में विभाग ने लिखित रूप से स्पष्ट किया है कि समितियों के लगातार घाटे में रहने और बैंकों के एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) बढ़ने की समस्या विकराल होती जा रही है।सहकारिता विभाग के अनुसार, राज्य के केंद्रीय सहकारी बैंकों में वित्तीय तरलता की भारी कमी है, जिसका सीधा असर ग्राम सेवा सहकारी समितियों पर पड़ रहा है। समितियों के घाटे में रहने के प्रमुख कारणों में ऋण वितरण की सीमित मात्रा, ऋण के अलावा आय बढ़ाने के लिए वैकल्पिक गतिविधियों का अभाव और संस्थापन व अन्य खर्चों का ब्याज मार्जिन से अधिक होना है।प्रश्न के जवाब में विभाग ने स्वीकार किया है कि सहकारी बैंकों का एनपीए लगातार बढ़ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में एनपीए राशि 881.42 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 883.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
वसूली के लिए विभाग के प्रयास
एनपीए प्रबंधन के लिए सहकारी विभाग ने सदन मे लिखित जवाब मे बताया कि विभाग स्तर पर कई कदम उठाए जा रहे हैं:
धारा 99 व 100 का उपयोग: राजस्थान सहकारी अधिनियम के तहत एनपीए ऋणों की वसूली के लिए प्रबंध निदेशक और अधिशासी अधिकारियों को अधिकृत किया गया है।
एकमुश्त समझौता योजना:
विभागीय अनुमोदन के माध्यम से एनपीए ऋणों की वसूली कर राशि को पुनः साख चक्र (credit cycle) में लाने का प्रयास किया जा रहा है।
- नियमित समीक्षा: बैंकों के प्रबंध निदेशकों के साथ मासिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
- ऋण प्रक्रिया में सावधानी: भविष्य में एनपीए न बढ़े, इसके लिए विभाग ने ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में कड़े निर्देशों और सावधानियों के परिपत्र जारी किए हैं।
डिजिटलीकरण पर पेंच
वहीं पैक्स के डिजिटलीकरण को लेकर विभाग ने बताया कि यह कार्य केंद्र सरकार की ‘पैक्स कंप्यूटराइजेशन परियोजना’ के तहत किया जा रहा है। फिलहाल सॉफ्टवेयर के माध्यम से समितियों को ऑनलाइन ‘गो-लाइव’ किया जा रहा है। हालांकि, विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में सॉफ्टवेयर में सीधे ग्राहकों के लिए ऑनलाइन लेनदेन का प्रावधान नहीं है, बल्कि यह समिति स्तर के लेनदेन तक ही सीमित है। सॉफ्टवेयर में आवश्यक अपडेट और प्रावधान मिलने के बाद ही ग्राहकों को ऑनलाइन लेनदेन की सुविधा मिल सकेगी।


