सार:
पैक्स में खाद के साथ उत्पादों की जबरन ‘टैगिंग’ से उपजे विवाद पर सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा ने इफ्को-कृभको को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने इसे समितियों के लिए नुकसानदेह बताते हुए समाधान मांगा।
विस्तार:

जयपुर। डिजिटल डेस्क। 6 जुलाई। राज्य की सहकारी साख समितियों (पैक्स) पर यूरिया व अन्य खाद के साथ जबरन उत्पादों की ‘टैगिंग’ थोपे जाने का मुद्दा गरमा गया है। सहकारी साख समितियाँ एम्पलाईज यूनियन के प्रान्तीय अध्यक्ष सूरज भान सिंह आमेरा ने कृभको और इफ्को के राज्य विपणन प्रबंधकों से मुलाकात कर इस बाध्यकारी बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। आमेरा ने कृभको के मुख्य राज्य विपणन प्रबंधक रामजी लाल शर्मा एवं इफ्को के राज्य विपणन प्रबंधक पृथ्वी राज सिहाग को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि खाद के साथ अन्य अनावश्यक उत्पाद थोपे जाने से समितियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है आमेरा ने बताया कि राज्य सरकार के कृषि विभाग ने इन टैगिंग उत्पादों को लेकर कोई अनुमति नहीं दी है, जिसके चलते किसान इन्हें खरीदने से साफ इनकार कर देते हैं। इससे पैक्स कर्मचारियों और किसानों के बीच अनावश्यक विवाद और तनाव की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक निर्देश नहीं मिलते, तब तक किसानों पर कोई भी उत्पाद जबरन नहीं थोपा जाना चाहिए।
केंद्र और राज्य की नीतियों में टकराव

इफ्को प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि केंद्र सरकार नैनो यूरिया को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जिसके लिए राज्य सरकारों को पत्र लिखे गए हैं। वहीं दूसरी ओर, राज्य के कृषि और सहकारिता विभाग द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने से नीतिगत विरोधाभास पैदा हो गया है। सहकार नेता आमेरा ने दो टूक कहा कि इस भ्रम की स्थिति के कारण समितियों का काम प्रभावित हो रहा है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि न तो समितियों को आर्थिक नुकसान हो और न ही किसानों को परेशानी का सामना करना पड़े।


