Home राज्य राज्य सहकारी बैंकों (StCBs)के दीर्घकालिक Long-Term Refinance )पुनर्वित्त नियमों में बदलाव, कृषि विकास को लगेंगे पंख

राज्य सहकारी बैंकों (StCBs)के दीर्घकालिक Long-Term Refinance )पुनर्वित्त नियमों में बदलाव, कृषि विकास को लगेंगे पंख

सार 

नाबार्ड द्वारा राज्य सहकारी बैंकों के दीर्घकालिक पुनर्वित्त नियमों में दी गई राहत और सौर ऊर्जा व ग्रामीण स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने से कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

विस्तार

जयपुर/मुंबई| Digital Desk 30 August:| राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) ने देश के सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक दूरगामी कदम उठाते हुए राज्य सहकारी बैंक (State Cooperative Banks )हेतु दीर्घकालिक पुनर्वित्त के नए और संशोधित परिचालन दिशानिर्देशों की घोषणा कर दी है। इस महत्वपूर्ण निर्णय का मुख्य ध्येय ग्रामीण अंचल में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और वानिकी जैसी गतिविधियों में पूंजी निर्माण की प्रक्रिया को अधिक तीव्र करना है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ आधार मिलेगा तथा किसानों तक समय पर पर्याप्त वित्तीय संसाधन पहुंच सकेंगे।

इस नई व्यवस्था के तहत नाबार्ड ने जरूरतमंद कृषि क्षेत्र में ऋण प्रवाह को सुगम बनाने के वास्ते पात्रता के पारंपरिक मापदंडों में बड़ी राहत दी है। अब तक बैंकों की राह में रोड़ा बनने वाले पूंजी से जोखिम-भारित परिसंपत्ति अनुपात, शुद्ध एनपीए और शुद्ध लाभ जैसे कड़े प्रारंभिक नियमों को फिलहाल हटा दिया गया है। इसके स्थान पर जिन भी राज्य सहकारी बैंकों की आंतरिक जोखिम रेटिंग निर्धारित संतोषजनक दायरे में आती है, वे इस योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र माने जाएंगे। हालांकि, जिन संस्थाओं का शुद्ध मूल्य नकारात्मक श्रेणी में होगा, उन्हें इस वित्तीय सुविधा से वंचित रखा जाएगा।

प्रक्रिया को अत्यधिक सरल और त्वरित स्वरूप देने के लिए स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा का दायरा भी बिना किसी वित्तीय ऊपरी सीमा के विस्तारित कर दिया गया है। इसके माध्यम से बैंक लंबी पूर्व-स्वीकृति प्रक्रियाओं के फेर में पड़े बिना, अपने स्तर पर पात्र परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के पश्चात सीधे नाबार्ड से पुनर्वित्त राशि का दावा प्रस्तुत कर सकेंगे। इसके अलावा क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को प्राथमिकता देते हुए पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम, प्रमुख पहाड़ी क्षेत्रों, लक्षद्वीप और छत्तीसगढ़ के संदर्भ में पुनर्वित्त की सीमा बढ़ाकर पात्र बैंक ऋणों का 95 प्रतिशत तक निर्धारित की गई है, जिससे देश के दूरदराज और पिछड़े इलाकों में विकास कार्यों को नया संबल प्राप्त होगा।

सौर ऊर्जा संयंत्रों और ग्रामीण स्टार्टअप्स को मिलेगा विशेष वित्तीय संबल

नाबार्ड द्वारा जारी इन ताजा दिशा-निर्देशों के दायरे में केवल पारंपरिक खेती-किसानी तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि आधुनिक तकनीक और ग्रामीण स्वरोजगार से जुड़ी कई नवीन संभावनाओं को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। इसके तहत किसानों द्वारा व्यक्तिगत तौर पर या उत्पादक संगठनों के माध्यम से स्थापित किए जाने वाले सौर ऊर्जा आधारित कृषि पंप संयंत्रों, बायोगैस इकाइयों और परती भूमि पर लगने वाले सोलर प्लांट प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता के आधार पर आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी।  विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दृष्टि से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के साथ-साथ कृषि से जुड़े स्टार्टअप्स को भी इस पुनर्वित्त ढांचे के अंतर्गत लाना एक परिवर्तनकारी कदम है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक शीत भंडारण गृहों, कृषि-विपणन ढांचागत सुविधाओं, ग्रामीण आवास योजनाओं और वाणिज्यिक वाहनों के वित्तपोषण को भी व्यापक रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। इस व्यवस्था के धरातल पर उतरने से किसानों के लिए वैकल्पिक आय के साधन विकसित होंगे तथा ग्रामीण अंचल से होने वाले पलायन पर भी प्रभावी अंकुश लग सकेगा।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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