सार
जोधपुर संभाग के केंद्रीय सहकारी बैंकों की डीपीसी प्रक्रिया में तत्कालीन अतिरिक्त रजिस्ट्रार शुद्धोधन उज्ज्वल को अनियमितताओं के आरोपों से क्लीन चिट मिल गई है। जाँच में प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमानुसार पाई गई है।
विस्तार 
जोधपुर। सहकारी जगत की ग्राउंड रिपोर्ट 20 सितंबर |मारवाड़ अंचल के सहकारिता महकमे से जुड़ी एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। जोधपुर संभाग के विभिन्न जिलों के केंद्रीय सहकारी बैंकों में कार्मिकों की पदोन्नति (DPC) में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही लंबी जाँच आखिरकार समाप्त हो गई है। अतिरिक्त रजिस्ट्रार, सहकारी समितियाँ, जोधपुर खंड, प्रशांत कल्ला द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार, तत्कालीन अतिरिक्त रजिस्ट्रार (सहकारी समितियाँ) जोधपुर खंड, श्री शुद्धोधन उज्ज्वल के कार्यकाल में हुई डीपीसी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का दोष या अनियमितता प्रमाणित नहीं हुई है। जाँच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर इस प्रकरण से जुड़े संबंधित जाँच बिंदु को पूरी तरह से संचित (क्लोज) कर दिया गया है।
यह पूरा मामला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर तथा अन्य माननीय विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित एक शिकायती पत्र से शुरू हुआ था। इस शिकायती पत्र में उठाए गए विभिन्न बिंदुओं के संबंध में प्रधान कार्यालय जयपुर के निर्देशों पर तथ्यात्मक रिपोर्ट का परीक्षण किया गया था। इसके बाद, राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2001 की धारा 55 के अंतर्गत जोधपुर संभाग के विभिन्न केंद्रीय सहकारी बैंकों (पाली, जालोर, बाड़मेर, सिरोही, जैसलमेर और जोधपुर) में वर्ष 2022 से 2025 के दौरान हुई डीपीसी बैठकों के गहन जाँच के आदेश दिए गए थे। बिलाड़ा के प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक लिमिटेड के सचिव, श्री रामसुख को इस प्रकरण में जाँच अधिकारी नियुक्त किया गया था।जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत विस्तृत रिपोर्ट और दस्तावेजों के गहन अध्ययन के बाद यह स्पष्ट हुआ कि पाली, जालोर, बाड़मेर और सिरोही सहित अन्य बैंकों में आयोजित डीपीसी बैठकों के दौरान नियमों की पूरी पालना की गई थी।
इन समितियों की बैठकों की अध्यक्षता संबंधित जिलों के बैंक प्रशासक एवं जिला कलेक्टरों द्वारा की गई थी। इसके अलावा, रोस्टर प्रणाली, रिक्त पदों का निर्धारण, तथा कार्मिकों की योग्यता, अनुभव और वार्षिक कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट (ACR) का परीक्षण पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया था। समिति के सदस्यों और सीसीबी प्रबंध निदेशकों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों पर सामूहिक विचार-विमर्श के बाद ही पदोन्नतियाँ दी गई थीं। चूँकि इन सभी निर्णयों में समिति के अध्यक्ष (जिला कलेक्टर) का निर्णय अंतिम और सर्वमान्य होता है, इसलिए जाँच में श्री शुद्धोधन उज्ज्वल की किसी भी प्रकार की संलिप्तता या लापरवाही सामने नहीं आई। इस प्रकार, विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि उक्त डीपीसी प्रक्रिया पूरी तरह से नियमानुसार और पारदर्शी ढंग से संचालित हुई थी।
पारदर्शिता की मुहर: कलेक्टरों की अध्यक्षता में हुई डीपीसी पूरी तरह वैध, समितियों की कार्रवाई पर लगी कानूनी मुहर
केन्द्रीय सहकारी बैंकों की डीपीसी (पदोन्नति समिति) बैठकों को लेकर उठी शिकायतों के बाद प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है। जोधपुर संभाग के सहकारिता क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी डीपीसी जाँच में यह प्रमाणित हो गया है कि संपूर्ण प्रक्रिया में नियमों की अवहेलना नहीं की गई है। जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में हुई इन बैठकों में रोस्टर नियमों और योग्य कार्मिकों के मानदंडों का पूरी सख्ती से पालन किया गया था।जाँच रिपोर्ट में यह तथ्य प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि पाली, जालोर, बाड़मेर और सिरोही के केंद्रीय सहकारी बैंकों में पदोन्नति की प्रक्रिया पारदर्शी थी। संबंधित बैंकों के प्रबंध निदेशकों द्वारा डीपीसी के समक्ष समस्त रिकॉर्ड, गोपनीय रिपोर्ट और अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए थे। समिति के अध्यक्षों—जो कि जिलों के प्रशासनिक मुखिया (जिला कलेक्टर) थे—की देखरेख में सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही नियुक्तियाँ व पदोन्नतियाँ फाइनल की गईं। विभाग द्वारा इस मामले के निस्तारण से महकमे में लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लग गया है।


