सार
बाड़मेर केंद्रीय सहकारी बैंक कर्मचारियों ने ‘समूह ऋण सुरक्षा’ और ‘जीवन बीमा योजना’ लागू करने की मांग की है। यूनियन ने प्रबंध निदेशक को ज्ञापन सौंपा है। प्रीमियम कर्मचारी खुद वहन करेंगे, जिससे बैंक पर वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। नाबार्ड ने भी निरीक्षण में ऋण बीमा न होने पर आपत्ति जताई थी।
विस्तार 
बाड़मेर |जिला डेस्क 19 सितंबर|बाड़मेर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड के कर्मचारियों और अधिकारियों ने बैंक प्रबंधन के समक्ष वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया है। ‘ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्पलाइज यूनियन एवं ऑफिसर्स एसोसिएशन’ बाड़मेर इकाई की ओर से इस संबंध में बैंक के प्रबंध निदेशक को एक ज्ञापन सौंपा गया है। यूनियन ने मांग की है कि बैंक के सभी स्टाफ सदस्यों के लिए ‘समूह ऋण सुरक्षा जीवन बीमा’ और ‘समूह जीवन बीमा योजना’ तत्काल प्रभाव से लागू की जाए।यूनियन के पदाधिकारियों—एम्पलाइज यूनियन के अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह, सचिव गौरव पारीक, ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भीखाराम बिश्नोई और सचिव विक्रम सिंह राठौड़ द्वारा दिए गए पत्र में बताया गया है कि बैंककर्मी वाहन ऋण, आवास ऋण और व्यक्तिगत ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ लेते हैं। आकस्मिक परिस्थितियों में ऋण दायित्वों और कर्मचारियों के परिवारों की आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से यह बीमा योजना बेहद जरूरी है।विशेष बात यह है कि इन दोनों बीमा योजनाओं का प्रीमियम संबंधित स्टाफ सदस्यों द्वारा स्वयं वहन किया जाएगा, जिससे बैंक पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। इसके अलावा, गत नाबार्ड निरीक्षण के दौरान स्टाफ सदस्यों के ऋणों का बीमा न होने पर आपत्ति भी दर्ज की गई थी, जिसका समाधान इस योजना के लागू होने से हो जाएगा।
नाबार्ड की आपत्ति और कर्मचारियों की सुरक्षा पर जोर
सहकारी बैंक कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा को लेकर यूनियन ने रुख अपनाया है। नाबार्ड के पिछले निरीक्षण के दौरान बैंक में स्टाफ सदस्यों के ऋणों का बीमा न होने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई गई थी। यूनियन ने प्रबंध निदेशक को याद दिलाया है कि नाबार्ड की इस आपत्ति का निराकरण करने और बैंक ऋणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह योजना लागू करना अनिवार्य है।अन्य सहकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों की तर्ज पर बाड़मेर में भी कर्मचारियों को यह सुविधा दिए जाने की मांग की जा रही है। इस संबंध में कर्मचारियों द्वारा व्यक्तिगत रूप से पहले ही आवेदन प्रस्तुत किए जा चुके हैं। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि इस दिशा में जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो कर्मचारियों में असंतोष बढ़ सकता है। बैंक प्रबंधन से आग्रह किया गया है कि कर्मचारी हित और नाबार्ड के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए इस पर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई की जाए।


