सार
#Rajasthan अभियान के बावजूद जोधपुर खंड सहित प्रदेश की अधिकांश सहकारी संस्थाओं के वित्तीय खाते केंद्रीय सहकारी बैंकों के बजाय अन्य बैंकों में संचालित हो रहे हैं, जो विभागीय नियमों की अनदेखी को उजागर करता है।
विस्तार

जयपुर/जोधपुर। |प्रदेश ङेस्क 23 जुलाई |प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को सुदृढ़ करने और सरकारी संस्थाओं को वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए भले ही बड़े-बड़े अभियान चलाए जा रहे हों, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी पालना किस कदर हो रही है, इसकी बानगी सहकारिता विभाग के अपने ही आदेशों की अवहेलना से साफ झलकती है। विभाग द्वारा कड़े दिशा-निर्देश और विशेष अभियान चलाने के बावजूद आज भी जोधपुर खंड सहित प्रदेश के कई हिस्सों में अधिकांश सहकारी संस्थाओं (पैक्स-लैम्पस से लेकर क्रय-विक्रय सहकारी समितियों तक) के वित्तीय खाते केंद्रीय सहकारी बैंकों में संचालित होने के बजाय अन्य व्यावसायिक एवं निजी बैंकिंग सेक्टरों में धड़ल्ले से चल रहे हैं।
आरटीआई और अंकेक्षण रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
सहकारी संस्थाओं के पैसों का लेन-देन वापस सहकारिता के दायरे में लाने के दावों की पोल हाल ही में सामने आई अंकेक्षण (ऑडिट) रिपोर्ट्स ने खोल दी है। आरटीआई एक्ट के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत दिनों जब भीनमाल तथा जालोर की क्रय-विक्रय सहकारी समितियों (केवीएसएस) की ऑडिट रिपोर्ट निकाली गई, तो उसमें चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इन दोनों महत्वपूर्ण समितियों के संपूर्ण खाते केंद्रीय सहकारी बैंक में संचालित होने के बजाय अन्य बैंकिंग सेक्टरों में चल रहे हैं।ठीक इसी प्रकार की स्थिति पाली केंद्रीय सहकारी बैंक की सादड़ी शाखा के कार्यक्षेत्र में भी देखने को मिल रही है। यहाँ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स) के तमाम खाते भी सीसीबी (केंद्रीय सहकारी बैंक) के स्थान पर अन्य बैंकिंग सेक्टरों में संचालित किए जा रहे हैं।
म्हारो खातो म्हारो बैंक” अभियान और विभागीय सख्ती
सहकारी संस्थाओं के खातों को अन्य बैंकों से हटाकर वापस जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में लाने के उद्देश्य से कार्यालय रजिस्ट्रार सहकारी समितियाँ, राजस्थान, जयपुर द्वारा 1 जनवरी 2025 से एक अभिनव पहल “म्हारो खातो म्हारो बैंक” अभियान का शुभारंभ किया गया था। भारत सरकार के “सहकार से समृद्धि” विजन और “एक सब के लिए एवं सब एक के लिए” की विचारधारा के तहत यह कदम उठाया गया था। रजिस्ट्रार मंजू राजपाल द्वारा जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया था कि राज्य की समस्त प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों, दुग्ध संघों, उपभोक्ता होलसेल भंडारों, क्रय-विक्रय सहकारी समितियों, अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों और प्राथमिक भूमि विकास बैंकों से लेकर पैक्स तक अपने सभी चालू एवं बचत खाते संबंधित जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में ही खोलना सुनिश्चित करें। इसके लिए फरवरी 2025 तक के अलग-अलग चरण भी तय किए गए थे और उप रजिस्ट्रार व सहायक रजिस्ट्रार स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त कर साप्ताहिक मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए थे।

एक्सपर्ट व्यु _“म्हारो खातो म्हारो बैंक” अभियान की फरवरी 2025 की निर्धारित डेडलाइन बीत जाने के बावजूद, जुलाई 2026 में भी दुग्ध संघ, कॉन्फेड, राजफेड और उपभोक्ता भंडारों के खाते पूरी तरह केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCB) में नहीं खुल पाए हैं।सबसे बड़ी विडंबना यह है कि खुद सहकार भवन में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन खाते भी सहकारी बैंकों के बजाय निजी बैंकों में संचालित हो रहे हैं। आमेरा ने इसे केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के “सहकारिता से सहकार” संकल्प के साथ धोखा बताया है।जब तक सहकारी संस्थानों और विभागीय कर्मियों का पैसा सहकारी बैंकों में नहीं आएगा, तब तक “सहकार से समृद्धि” का सपना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने शासन सचिव और रजिस्ट्रार से प्रमुख मांग की है कि सहकार भवन स्थित सभी संस्थानों और कर्मियों के खाते तत्काल अपैक्स बैंक या सीसीबी (CCB) में स्थानांतरित किए जाएं
— सूरज भान सिंह आमेरा, सहकार नेता


