सार
Jodhpur : राजस्थान हाईकोर्ट ने कोलायत सहकारी समिति का संचालक मंडल भंग करने और प्रशासक नियुक्त करने के रजिस्ट्रार के आदेश पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है।

विस्तार
जोधपुर। डिजिटल डेस्क | 5 मई | राजस्थान हाईकोर्ट ने बीकानेर की कोलायत क्रय विक्रय सहकारी समिति के संचालक मंडल को भंग करने और प्रशासक नियुक्त करने के सहकारिता विभाग पंजीयक के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। यह आदेश जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ द्वारा 4 मई 2026 को पारित किया गया। याचिकाकर्ता हरिराम, जो कि कोलायत केवीएसएस के अध्यक्ष हैं, ने रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, जयपुर द्वारा 21 अप्रैल 2026 को पारित आदेश को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने ‘भंवर लाल बनाम राजस्थान राज्य’ मामले में उच्च न्यायालय की खंडपीठ के फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2001 की धारा 30 के तहत रजिस्ट्रार के पास इस तरह बोर्ड को भंग करने और प्रशासक नियुक्त करने की शक्ति नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को प्रशासक के रूप में नियुक्त करना कानून के विपरीत है।
दूसरी ओर, राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के पास अधिनियम की धारा 105(10)(a) के तहत वैधानिक अपील का प्रभावी विकल्प मौजूद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खंडपीठ का फैसला रजिस्ट्रार को संचालक बोर्ड को भंग करने या हटाने की शक्ति से वंचित नहीं करता है, विशेषकर उन मामलों में जहां संचालक बोर्ड के सदस्य अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लगातार लापरवाही करते हैं या ऐसा कार्य करते हैं, जो संचालक बोर्ड के सदस्यों या स्वयं संचाल बोर्ड के हितों के विरुद्ध हो। मामले की सुनवाई के बाद, हाईकोर्ट ने पाया कि खंडपीठ के पूर्व फैसले का संबंध मुख्य रूप से चुनाव न होने के कारण लंबे समय तक प्रशासक के बने रहने से था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस निर्णय ने रजिस्ट्रार की उस शक्ति को सीमित नहीं किया है, जिसके तहत वे किसी संचालक बोर्ड को भंग करके प्रशासक नियुक्त कर सकते हैं। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया रजिस्ट्रार के आदेश को क्षेत्राधिकार के दायरे में माना और अंतरिम राहत के लिए लगाई गई याचिका को खारिज कर दिया।


