Home जयपुर सहकारिता में ’ब्याज का मायाजाल’: अपैक्स बैंक के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे केंद्रीय सहकारी बैंक, समितियों का वजूद खतरे में…

सहकारिता में ’ब्याज का मायाजाल’: अपैक्स बैंक के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे केंद्रीय सहकारी बैंक, समितियों का वजूद खतरे में…

सार 

Jaipur : राजस्थान की सहकारी समितियों से केंद्रीय सहकारी बैंकों द्वारा अवैध ब्याज वसूली और मार्जिन न देने का खुलासा हुआ है। अपैक्स बैंक ने अब वसूली रोकने और समितियों का हिस्सा तुरंत लौटाने के निर्देश दिए हैं।

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विस्तार 

​जयपुर । डिजिटल डेस्क | 22 अप्रैल | राजस्थान की सहकारी साख व्यवस्था में इन दिनों एक गंभीर विरोधाभास सतह पर आ गया है। एक तरफ सरकार ’ब्याज मुक्त फसली ऋण’ योजना के जरिए किसानों को राहत देने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय सहकारी बैंक और ग्राम सेवा सहकारी समितियों के बीच ब्याज वसूली का ऐसा अवैध खेल चल रहा है जो पूरे सिस्टम को खोखला कर रहा है। ​राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (अपैक्स बैंक) के प्रबंध निदेशक द्वारा 22 अप्रैल 2026 को जारी एक पत्र ने इस कड़वे सच पर मुहर लगा दी है। पत्र के अनुसार, जब किसान समय पर अपना फसली ऋण चुका देता है, तो नियमों के तहत उन ऋणों पर केंद्रीय सहकारी बैंकों को समितियों से कोई ब्याज नहीं लेना चाहिए। लेकिन धरातल पर बैंक न केवल ब्याज वसूल रहे हैं, बल्कि ’ब्याज पर ब्याज’ (चक्रवृद्धि ब्याज) का खेल भी खेल रहे हैं। बैंक 31 मार्च और 30 जून को बकाया ब्याज को मूलधन में जोड़कर समितियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाल रहे हैं। नियमानुसार, राज्य सरकार से प्राप्त होने वाली 4 प्रतिशत ब्याज सहायता राशि में से 2 प्रतिशत हिस्सा सीधे समितियों के बचत खातों में जमा होना चाहिए ताकि उनका ’वर्किंग मार्जिन’ सुरक्षित रहे। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक इस राशि को समितियों को देने के बजाय अपने स्तर पर ही तथाकथित बकाया ब्याज के नाम पर ’एडजस्ट’ (समायोजित) कर रहे हैं। इससे जमीनी स्तर पर काम करने वाली समितियां वित्तीय संकट से जूझ रही हैं।

​फाइलों में दफन हुई कमेटियों की रिपोर्ट

सहकारिता जगत में चर्चा है कि पूर्व में प्रबंध निदेशक की कुर्सी पर काबिज सहकारिता सेवा के एक अधिकारी ने सीसीबी और पैक्स के बीच बढ़ते इस वित्तीय असंतुलन को लेकर एक कमेटी गठित की थी। लेकिन विडंबना देखिए कि उस कमेटी की रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं हो पाई। वर्तमान में एफआईजी पोर्टल के माध्यम से फसली ऋण का व्यवसाय निष्पादित किया जा रहा है, लेकिन तकनीकी खामियों और बैंकों की मनमानी ने समितियों की कमर तोड़ दी है।

​प्रमुख मांगें और निर्देश

पैक्स-लैम्पस द्वारा निरंतर मांग की जा रही है कि ऋण वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए बीजीएल खाता खोला जाए। हाल ही के पत्र में अपैक्स बैंक ने निर्देश दिया है कि यदि टीसीएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से समितियों के खातों से स्वतः ब्याज कट रहा है, तो उसे तत्काल रिवर्स (वापस) किया जाए। सरकार से प्राप्त ब्याज अनुदान में से समितियों का 2 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से उनके बचत खाते में जमा करने के सख्त आदेश दिए गए हैं।

​बड़ा सवालः आदेश मानेंगे या फाइलों में दफन होंगे?

यह पहली बार नहीं है जब अपैक्स बैंक ने इस तरह के निर्देश जारी किए हैं। पत्र में वर्ष 2012 से लेकर 2024 तक के आधा दर्जन पुराने पत्रों का संदर्भ दिया गया है। सवाल यह है कि जब पिछले 14 सालों से निर्देश जारी हो रहे हैं, तो बैंकों ने अब तक अपनी कार्यप्रणाली क्यों नहीं बदली? क्या प्रशासन इन बैंकों पर कठोर कार्रवाई करेगा या फिर यह आदेश भी केवल ’कागजी खेल’ बनकर रह जाएगा?

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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