सार
Jaipur : सहकारिता विभाग ने वर्ष 2026-27 बजट के तहत भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए जिलों को लक्ष्य आवंटित किए हैं। इसके तहत 65 करोड़ की लागत से नए गोदामों का निर्माण और पुराने गोदामों का पुनर्निर्माण किया जाएगा..

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 17 मई | सहकारिता विभाग द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2026-27 के अंतर्गत भंडारण क्षमता बढ़ाने की घोषणा की पालना में अब जिलों को लक्ष्यों का आवंटन कर दिया गया है । सहकारिता विभाग पंजीयक (Registrar) कार्यालय द्वारा जारी पत्रानुसार, इस स्वीकृत योजना के तहत प्रदेश में भंडारण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नए गोदामों के निर्माण के साथ-साथ पुराने गोदामों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को गति दी जा रही है । विभाग का मुख्य उद्देश्य आगामी वर्ष 2047 तक राज्य की कुल भंडारण क्षमता को बढ़ाकर तीस लाख मीट्रिक टन तक पहुँचाना है । इसी निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब योग्य और पात्र सहकारी समितियों से अगले तीन दिनों के भीतर ई-डाक के माध्यम से नए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं ।
इस विभागीय योजना के अंतर्गत संपूर्ण राज्य में ढाई सौ मीट्रिक टन तथा पांच सौ मीट्रिक टन की क्षमता वाले पचास-पचास नए गोदामों का निर्माण करवाया जाएगा । इस महत्वपूर्ण निर्माण कार्य पर सरकार द्वारा लगभग बीस करोड़ रुपये की राशि व्यय की जाएगी । इसके अतिरिक्त झालावाड़ जिले के गुराडिया माना, सरोद और लावासल सहित राज्य की कुल सौ ग्राम सेवा सहकारी समितियों में पहले से बने हुए सौ मीट्रिक टन क्षमता के जीर्ण-शीर्ण गोदामों का चारदिवारी के साथ पुनर्निर्माण किया जाएगा । इस पुराने और जर्जर गोदामों को पूरी तरह सुधारने के लिए पंद्रह करोड़ रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है ।
ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता के दायरे को बढ़ाते हुए बूंदी के ठीकरिया चारणान और झालावाड़ के गैलानी, सालरिया, बडाय, पाडलिया, चाडा एवं सुनारी सहित कुल दो सौ नवगठित सहकारी समितियों को भी इस योजना में शामिल किया गया है । इन सभी नई और गोदाम विहीन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में सौ मीट्रिक टन की क्षमता वाले नए गोदाम और कार्यालय भवनों का निर्माण सुरक्षित चारदिवारी के साथ करवाया जाएगा । इस नवीन निर्माण कार्य को धरातल पर उतारने के लिए विभाग की ओर से कुल तीस करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी ।

स्पर्श पोर्टल और भुगतान की नई व्यवस्था
इस संपूर्ण परियोजना के सुचारू संचालन और भुगतान के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना मद से सीधे ‘स्पर्श पोर्टल’ का उपयोग किया जाएगा । इस पोर्टल पर चूंकि अग्रिम राशि भेजने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए विभाग प्रत्येक जिले के संबंधित केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड को एक सहायक एजेंसी (Child IA) बनाकर पीएफएमएस पर मैप करवा रहा है । इस व्यवस्था के तहत बैंक को आवश्यक बजट आवंटित किया जाएगा, जिसके बाद जीएसएस या केवीएसएस के माध्यम से कार्य के रनिंग और अंतिम बिल सीधे संबंधित बैंक को भुगतान हेतु प्रस्तुत किए जाएंगे ।
पारदर्शिता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय
इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सहकारिता विभाग शासन सचिव के निर्देशों के अनुसार सभी जिलों के लिए कुल 598 गोदामों का जिलावार लक्ष्य तय कर दिया गया है । जहां 500 मीट्रिक टन के नए गोदामों के लिए 1500 वर्ग मीटर और 250 मीट्रिक टन के लिए 812.50 वर्ग मीटर की वैध भूमि होना आवश्यक है, वहीं 100 मीट्रिक टन गोदामों के लिए कम से कम 160 वर्ग गज जमीन की उपलब्धता अनिवार्य की गई है । सभी संबंधित उप-रजिस्ट्रार सहकारी समितियां और सीसीबी प्रबंध निदेशकों को यह कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे जमीन के वैध दस्तावेजों और मौका-मुआयना की रिपोर्ट का स्वयं के स्तर पर सही परीक्षण करने के बाद ही अपनी स्पष्ट अनुशंसा के साथ इन प्रस्तावों को भिजवाएं क्योंकि भविष्य में किसी भी अपात्र समिति का चयन होने या विवाद होने पर संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी ।


