सार
Jaipur : राजस्थान हाई कोर्ट ने जयपुर पीठ के निर्णय में सहकारी होलसेल भंडार कर्मचारी से वेतन रिकवरी आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिनियम के तहत कार्रवाई घटना के 6 वर्ष के भीतर ही शुरू होनी चाहिए।

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जयपुर । डिजिटल डेस्क । 18 अप्रेल । राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने सहकारी होलसेल भंडार कर्मचारी के वेतन से रिकवरी के आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट किया है कि सरचार्ज की कार्रवाई निर्धारित समय सीमा के भीतर ही शुरू की जा सकती है। न्यायमूर्ति मुन्नूरी लक्ष्मण ने पृथ्वी सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता सीकर होलसेल को-ऑपरेटिव उपभोक्ता भंडार में क्लर्क के पद पर कार्यरत था। उसकी सेवाओं के नियमितीकरण के समय संविदा अवधि को ध्यान में रखते हुए वेतन निर्धारण किया गया था, जिसे बाद में विभाग ने गलत माना। इसके आधार पर अगस्त 2013 से मार्च 2015 की अवधि के दौरान हुए कथित अतिरिक्त भुगतान की वसूली के लिए 20 अगस्त 2025 को आदेश जारी किए गए थे। न्यायालय ने राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2001 की धारा 57 के दूसरे प्रावधान की व्याख्या करते हुए कहा कि किसी भी कार्य या चूक के संबंध में जांच उस घटना के छह वर्ष के भीतर शुरू हो जानी चाहिए। विभाग का तर्क था कि उन्हें मामले की जानकारी 3 सितंबर 2024 को हुई, इसलिए कार्रवाई समय सीमा के भीतर है। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि नए अधिनियम में ‘जो भी बाद में हो’ (whichever is latter) शब्दों को हटा दिया गया है। इसका अर्थ है कि विधायी मंशा छह वर्ष की बाहरी समय सीमा को बढ़ाने की नहीं थी। अदालत ने यह व्यवस्था दी कि अधिनियम के प्रावधानों को इस तरह पढ़ा जाना चाहिए कि ‘छह वर्ष की अवधि’ और ‘जानकारी होने के दो वर्ष’ में से जो भी पहले हो, उसे ही सीमा माना जाए। चूंकि यह मामला 2013-2015 के कालखंड से जुड़ा है और कार्रवाई बहुत बाद में शुरू की गई, इसलिए इसे काल-बाधित (barred by limitation) माना गया। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने रिकवरी के आदेश को अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया है।


