सार
Jaipur : बैंकों द्वारा नियमों की अनदेखी और ‘ब्याज पर ब्याज’ लादने से राजस्थान की सहकारी समितियां (पैक्स) भारी घाटे में हैं, जिससे कर्मचारियों का वेतन रुक गया है। इसके खिलाफ कर्मचारी संघ ने उग्र संघर्ष की चेतावनी दी है।

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 4 जून | राजस्थान की ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स/लैम्पस) के सामने आज अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। सहकारिता विभाग और अपेक्स बैंक द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद, धरातल पर इनकी अनदेखी हो रही है, जिससे समितियों की आर्थिक स्थिति बदहाल हो गई है। प्रदेश के सहकारी कर्मचारियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि समितियों को ‘स्वतंत्र एवं स्वायत्त’ घोषित करने के बावजूद, बैंकों की कार्यप्रणाली उन्हें ‘रीढ़विहीन’ बना रही है। विभाग ने समितियों में असंतुलन (Imbalance) समाप्त करने के लिए स्पष्ट परिपत्र जारी किए थे। वर्ष 2013 के आदेशानुसार, यह निर्देश दिए गए थे कि केन्द्रीय सहकारी बैंक पैक्स के ऋण खातों का विश्लेषण करें, असंतुलन की राशि को फ्रीज करें, और उस पर अतिरिक्त ब्याज की गणना न करें। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2020 में भी ‘ब्याज मुक्त फसली ऋण’ के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे कि समितियों द्वारा समय पर ऋण जमा कराने वाले किसानों से एरियर ब्याज की वसूली न की जाए। बावजूद इसके, धरातल पर स्थिति यह है कि जिला सहकारी बैंक इन आदेशों को नजरअंदाज कर रहे हैं। जब कर्मचारी बैंक शाखा प्रबंधकों से ‘ब्याज पर ब्याज’ और ‘एरियर ब्याज’ के बारे में शिकायत करते हैं, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि सिस्टम ही ऐसा है।

राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नंदलाल वैष्णव ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अपेक्स बैंक स्तर पर विकसित सिस्टम के कारण समितियों पर लगातार एरियर ब्याज का बोझ बढ़ रहा है। इससे समितियों का असंतुलन बढ़ता जा रहा है और वे घाटे में जा रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई समितियों में कार्यरत कर्मचारियों को वेतन मिलना तक बंद हो गया है। विभाग ने समितियों की आय बढ़ाने के लिए विकास कार्ययोजना बनाने और खर्चों को नियंत्रित करने के लिए संचालक मंडल स्तर पर वार्षिक बजट तैयार करने जैसे कड़े निर्देश दिए थे। लेकिन इन आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए गठित कमेटियों की रिपोर्ट न तो समय पर आ रही है और न ही उन पर प्रभावी कार्रवाई हो रही है।
संघ ने दी ‘संघर्ष’ की चेतावनी
राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ ने सभी पैक्स कर्मचारियों को सचेत किया है कि वे किसी चमत्कार के भरोसे न रहें। प्रदेश अध्यक्ष नंदलाल वैष्णव ने अपने आह्वान में कहा “समितियों को आर्थिक रूप से विकसित करने के लिए कर्मचारियों को स्वयं ‘भाग्य निर्माता’ बनना होगा।” ”प्रतिस्पर्धा के इस युग में अपना अस्तित्व बचाने के लिए चारों तरफ से सजग रहकर कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा।” ”बैंक अपने हितों को प्राथमिकता देते हुए समितियों की आर्थिक रीढ़ तोड़ रहे हैं, जिसे अब तार्किक और संगठित प्रयासों से ही रोका जा सकता है।”


