सारांश:
नाबार्ड व राष्ट्रीय योजनाओं के सहयोग से वलदरा पैक्स (सिरोही) ने 800 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। मिनी बैंक में ₹4.12 करोड़ से अधिक जमा हैं। 100% ऋण वसूली के साथ समिति ने ₹18.22 लाख का शुद्ध लाभ कमाया है।
विस्तृत

सिरोही | सहकारी जगत विशेष रिपोर्ट 1 नवंबर|राजस्थान के दक्षिण-पश्चिम छोर पर स्थित सिरोही जिला अपनी विशिष्ट भौगोलिक बनावट, अरावली की हरी-भरी वादियों और मुख्य रूप से कृषि व पशुपालन पर आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है। यहाँ का कार्य-परिदृश्य सदियों से कृषि-प्रधान रहा है, जहाँ मौसम की अनिश्चितताओं के बावजूद माटी से सोना उपजाना यहाँ के किसानों की प्रवृत्ति और पहचान रही है। इस कृषि-प्रधान अंचल में ग्रामीण विकास, वित्तीय संबल और किसानों को महाजनों के चंगुल से मुक्त कराने की दिशा में सहकारी आंदोलन (Cooperative Movement) ने एक मजबूत और भरोसेमंद आधारशिला रखी है। सिरोही की धरती पर सहकारिता का इतिहास संघर्ष, विश्वास और ग्रामीण स्वावलंबन की एक लंबी गाथा रहा है।
इसी ऐतिहासिक और वर्तमान परिदृश्य के बीच, सिरोही तहसील के वलदरा ग्राम में स्थित ‘श्री बजरंग बहुद्देशीय ग्राम सेवा सहकारी समिति लिमिटेड, वलदरा’ (पैक्स/PACS) ने सहकारिता के क्षेत्र में एक मॉडल संस्था के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। वर्ष 1962 में स्थापित यह पैक्स संस्था आज कृषि-बहुल क्षेत्र के लिए सबसे पुरानी और भरोसेमंद वित्तीय उधार सेवा (Credit Service) का पर्याय बन चुकी है।अतीत में जहाँ ग्रामीण अंचल के किसानों को अपनी छोटी-बड़ी कृषि आवश्यकताओं और आकस्मिक खर्चों के लिए ऊँची ब्याज दरों पर साहूकारों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं वलदरा पैक्स ने अपनी स्थापना के साथ ही इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया। वर्तमान समय में यह समिति डिजिटल युग के साथ कदमताल करते हुए पैक्स कंप्यूटरीकरण (PACS Computerization) के तहत ‘ई-पैक्स’ के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही है।वर्ष 2025-26 के नवीनतम ऑडिट वर्गीकरण में इस समिति ने ‘ब’ श्रेणी हासिल करते हुए अपनी वित्तीय सुदृढ़ता का लोहा मनवाया है। समिति ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ₹18.22 लाख का शुद्ध वार्षिक लाभ तथा ₹83.12 लाख का भारी-भरकम संचित लाभ (Accumulated Profit) अर्जित किया है, जो इसकी उत्कृष्ट कार्यशैली और पारदर्शी प्रबंधन का प्रमाण है।
किसानों के कल्याण के प्रति समर्पित इस संस्था से कुल 1004 सक्रिय किसान सदस्य जुड़े हैं, जिनमें से 557 कृषक नियमित ऋणी सदस्य हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान समिति द्वारा किसानों को समय पर खाद-बीज और कृषि कार्यों के लिए ₹258.10 लाख का अल्पकालीन फसली ऋण एवं ₹12.50 लाख का अन्य ऋण वितरित किया गया। सबसे गौरवशाली पहलू यह है कि समिति का ऋण वसूली प्रदर्शन शत-प्रतिशत (100%) रहा है, जो सिरोही अंचल के किसानों की ईमानदारी और सहकारिता के प्रति अटूट भरोसे को दर्शाता है। समिति के अध्यक्ष श्री जयसिंह और व्यवस्थापक श्री नरपतसिंह के कुशल नेतृत्व में यह पैक्स आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयाँ दे रहा है।
मिनी बैंक, लॉकर और राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं से जुड़कर वलदरा पैक्स ने रचे नए आयाम

ग्रामीण अंचल के निवासियों में वित्तीय अनुशासन और बचत की संस्कृति को बढ़ावा देने के मामले में वलदरा पैक्स ने आधुनिक बैंकों को भी पीछे छोड़ दिया है। समिति द्वारा अपने कार्यक्षेत्र के किसानों और आम नागरिकों के लिए हाई-टेक ‘मिनी बैंक एवं लॉकर सुविधा’ का सफल संचालन किया जा रहा है। गाँव में ही बैंक जैसी सुरक्षा और सहूलियतें मिलने के कारण 30 सितंबर 2026 की स्थिति के अनुसार समिति में ग्रामीण क्षेत्र की कुल ₹412.02 लाख (4.12 करोड़ रुपये) से अधिक की भारी-भरकम जमा राशि सुरक्षित रूप से संचित है।इसके अलावा, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के लाइसेंस के माध्यम से किसानों को डीएपी (DAP), यूरिया, सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP), एनपीके (NPK) और उच्च गुणवत्तायुक्त जैविक खाद रियायती दरों पर मिल रही है, जिससे वर्ष 2025-26 में इस केंद्र ने ₹63.68 लाख का शानदार व्यावसायिक टर्नओवर दर्ज किया है।सहकारिता के क्षेत्र में आ रहे वैश्विक और राष्ट्रीय बदलावों को अपनाते हुए वलदरा पैक्स ने अब देश की शीर्ष सहकारी संस्थाओं की औपचारिक सदस्यता प्राप्त कर ली है। समिति अब भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL), राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) और राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़ चुकी है। इसके साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत यूनिट्स को सुचारू रूप से खाद्यान्न वितरण का कार्य भी किया जा रहा है। प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र और इन राष्ट्रीय संस्थाओं के नेटवर्क से जुड़ने के कारण अब वलदरा क्षेत्र के किसानों को न केवल उच्च गुणवत्ता के बीज और खाद मिल रहे हैं, बल्कि उनकी जैविक उपज को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर दामों पर निर्यात करने का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है।
इनका कहना है:
“वर्ष 1962 से शुरू हुई हमारी इस सहकार यात्रा ने हर दौर में किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा है। हमने मिनी बैंक, अत्याधुनिक वेयरहाउस और जिले के पहले कस्टम हायरिंग सेंटर जैसी सौगातें देकर गांव के स्तर पर वित्तीय और कृषि सेवाएं मजबूत की हैं। हमारा एकमात्र लक्ष्य किसान की लागत कम करना और उसकी आय को कई गुना बढ़ाना है।”– नरपतसिंह चारण, व्यवस्थापक, श्री बजरंग बहुउद्देशीय ग्राम सेवा सहकारी समिति लि., वलदरा


