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मनमाने तरीके से वेतन बढ़ाने वाली पैक्स समितियों पर कसेगा शिकंजा, बिना अनुमोदन वित्तीय लाभ बांटने पर होगी कार्रवाई

सार

करौली में सहकारिता विभाग ने पैक्स/लैम्पस समितियों के मनमाने वेतनमान और वित्तीय लाभों पर रोक लगा दी है। बिना पूर्व अनुमोदन, ऑडिट और तीन साल के शुद्ध लाभ के बिना वेतन वृद्धि देने वाली समितियों पर अनुशसनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विस्तार

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सवाई माधोपुर / जयपुर: जिला डेस्क रिपोर्ट्स 26 अक्टूबर|सहकारिता विभाग और सीसीबी (CCB) बैंकों के स्पष्ट दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर अपनी ही धुन में मनमानी करने वाले ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स/लैम्पस – PACS/LAMPS) के व्यवस्थापकों और संचालक मंडलों का रवैया अब और नहीं चलेगा। केंद्रीय सहकारी बैंक सवाई माधोपुर ने करौली जिले की पैक्स (PACS) समितियों में वेतनमान निर्धारण, ग्रेड-पे (Grade-Pay), नियुक्ति और अन्य भत्तों के नाम पर बरती जा रही वित्तीय अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाया है।सीसीबी (CCB) बैंक प्रबंधन ने दो टूक चेतावनी दी है कि बिना उच्चाधिकारियों और केंद्रीय सहकारी बैंक कार्यालय के अनिवार्य अनुमोदन के यदि किसी भी समिति ने वित्तीय लाभ बांटा, तो इसे पूरी तरह नियम विरुद्ध मानते हुए सीधा अनुशासनात्मक शिकंजा कसा जाएगा।हाल ही में उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियाँ, करौली द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के दौरान यह खुलासा हुआ था कि कई समितियों के संचालक मंडल और व्यवस्थापक नियमों को ताक पर रखकर अपने स्तर पर ही वेतनमान व ग्रेड-पे (Grade-Pay) के प्रस्ताव पारित कर रहे हैं। विशेष तौर पर मंडरायल पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली करणपुर और नीदर ग्राम सेवा सहकारी समितियों (PACS) के निरीक्षण में भारी अनियमितताएं सामने आईं।

बिना ऑडिट (Audit) और घाटे में चल रही समितियां नहीं दे पाएंगी बढ़ा हुआ वेतन 

सहकारिता विभाग और केंद्रीय सहकारी बैंक द्वारा पैक्स/लैम्पस (PACS/LAMPS) के व्यवस्थापकों के वेतन निर्धारण और वित्तीय लाभों के वितरण के लिए अब कड़े नियम तय कर दिए गए हैं। नए नियमों के मुताबिक केवल उन्हीं मुख्य कार्यकारियों (CEOs) और व्यवस्थापकों का वेतन निर्धारण किया जाएगा जो कैडर (Cadre) या स्क्रीनिंग के माध्यम से पूरी तरह नियमित रूप से चयनित होकर आए हैं। इसके अलावा, सबसे बड़ी शर्त यह जोड़ी गई है कि संबंधित समिति का गत वर्ष तक का ऑडिट (Audit) हर हाल में पूरा होना चाहिए।विभाग के आदेशों के अनुसार यदि किसी समिति की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है, उसमें किसी प्रकार का वित्तीय असंतुलन या संचित हानि चल रही है, तो उसे यह लाभ कदापि नहीं मिलेगा। समिति का पिछले लगातार तीन वर्षों से शुद्ध लाभ (Net Profit) में होना अनिवार्य शर्त बनाया गया है।इतना ही नहीं, नवीन वेतन निर्धारण के बाद समितियों के इन व्यवस्थापकों को मकान किराया भत्ता (House Rent Allowance) भी देय नहीं होगा। इन सख्त पैमानों से स्पष्ट है कि वित्तीय अनुशासन सुधारने के लिए विभाग अब किसी भी स्तर पर ढील देने के मूड में नहीं है।

नियमानुसार पैक्स (PACS) व्यवस्थापकों को एल-3 (L-3) वेतन श्रृंखला (18200-57900, ग्रेड पे – Grade Pay 1900) का लाभ देने और 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की तर्ज पर वेतन निर्धारण के लिए कड़े मानदंड तय किए गए हैं, जिसमें गत वर्षों की ऑडिट (Audit) रिपोर्ट, समिति का संचित हानि से मुक्त होना और पिछले तीन वर्षों से लगातार शुद्ध लाभ (Net Profit) में होना अनिवार्य है। इसके बावजूद कुछ लोग बिना पात्रता और बिना वैधानिक स्वीकृति के शॉर्टकट तरीके से आर्थिक लाभ उठाने की फिराक में थे।केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक द्वारा जारी सख्त आदेशों के मुताबिक, अब किसी भी समिति को वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता (DA) या अन्य भत्तों में संशोधन का प्रस्ताव पारित करने के उपरांत प्रधान कार्यालय केंद्रीय सहकारी बैंक सवाई माधोपुर और उप रजिस्ट्रार, करौली के समक्ष अनिवार्य रूप से भेजना होगा। बैंक की समस्त शाखाओं और ऋण पर्यवेक्षकों को भी पाबंद कर दिया गया है कि वे प्रस्तावों के पुख्ता निरीक्षण और विधिवत अनुमोदन के बाद ही वेतन के चेक (Cheque) जारी करें। साफ है कि सहकारिता के नाम पर चल रहे इस खेल पर प्रशासन ने अब नकेल कसनी शुरू कर दी है, जिससे नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों में हड़कंप मच गया है।

 

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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