Home | cooperative | जालोर | रबी सीजन के लिए केंद्रीय सहकारी बैंक जालोर (Central Cooperative Bank) से 3 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ बंटेगा फसली ऋण (Crop Loan)।

रबी सीजन के लिए केंद्रीय सहकारी बैंक जालोर (Central Cooperative Bank) से 3 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ बंटेगा फसली ऋण (Crop Loan)।

सारांश:

अकाल पीड़ित जालोर के किसानों को राहत देते हुए केंद्रीय सहकारी बैंक रबी सीजन में 3% बढ़ोतरी के साथ फसली ऋण बांटेगा। साथ ही, नए सदस्यों को ₹15,000 तक का अल्पकालीन ऋण मिलेगा।

विस्तृत:IMG 20261022 WA0007

जालोर: |सहकारी जगत ग्राउंड रिपोर्ट, 22 अक्टूबर |रेगिस्तानी आबोहवा (Climate), धोरों और प्राचीन ऐतिहासिक विरासत के लिए पहचाने जाने वाले जालोर जिले का भूभाग और यहां का सहकारी आंदोलन (Cooperative Movement) हमेशा से अनूठा रहा है। अरावली की श्रृंखलाओं और जवाई-सुकड़ी नदी बेसिन से घिरे इस भूभाग में खेती और पशुपालन यहां की ग्रामीण आर्थिकी (Rural Economy) की रीढ़ रहे हैं। सहकारी आंदोलन के इतिहास पर नजर डालें तो जालोर में ग्रामीण स्तर पर पैक्स (PACS – Primary Agricultural Credit Societies) ने किसानों को वित्तीय संबल (Financial Support) देने में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है।वर्तमान में जिला अकाल (Drought) की चपेट में है, जिससे किसानों के सामने आजीविका (Livelihood) का संकट खड़ा हो गया है। इस कठिन परिस्थिति में अन्नदाताओं को संबल प्रदान करने के लिए केंद्रीय सहकारी बैंक जालोर द्वारा इस वित्तीय वर्ष में रबी सीजन (Rabi Season) के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले में अकाल की मार झेल रहे किसानों को गत खरीफ सीजन (Kharif Season) में लिए गए ऋणों के चुकारे के पश्चात, पुनः रबी सीजन में 3 प्रतिशत राशि की बढ़ोतरी के साथ सीजनली फसली सहकारी ऋण वितरित किया जाएगा।केंद्रीय सहकारी बैंक की मंशा है कि संकट के इस दौर में भी किसानों के खेतों में हरियाली बनी रहे और फसल उत्पादन (Crop Production) प्रभावित न हो। इसके अलावा, पैक्स से जुड़ने वाले नए सदस्यों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। नए सदस्यों को इस रबी सीजन में अधिकतम 15 हजार रुपये तक का अल्पकालीन (Short-term) फसली सहकारी ऋण जिले की ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से मुहैया कराया जाएगा।प्रदेश में किसानों को अल्पकालीन फसली सहकारी ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर (Interest Rate) पर उपलब्ध कराए जाते हैं। सरकार द्वारा निर्धारित अंतिम तिथि तक ऋण का चुकारा करने पर भारत सरकार द्वारा 3 प्रतिशत और राज्य सरकार द्वारा 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान (Interest Subsidy) दिया जाता है, जिससे किसानों पर ब्याज का कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ता है। सहकारिता के इस कदम से जालोर के ग्रामीण अंचल में किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

 शून्य प्रतिशत ब्याज योजना से संवर रही किसानों की तकदीर

अल्पकालीन फसली सहकारी ऋण योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। प्रदेश में किसानों को खेती से जुड़े कार्यों के लिए यह ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाता है। योजना के नियमों के अनुसार, यदि किसान सरकार द्वारा निर्धारित अंतिम तिथि तक अपने ऋण का पूरा चुकारा कर देते हैं, तो उन्हें दोहरा लाभ (Double Benefit) मिलता है। इसमें भारत सरकार की ओर से 3 प्रतिशत और राज्य सरकार की ओर से 4 प्रतिशत का ब्याज अनुदान देय होता है।समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को व्यावहारिक रूप से बिना किसी ब्याज के खाद (Fertilizer), बीज (Seeds) और कृषि उपकरण (Agricultural Equipment) खरीदने के लिए राशि मिल जाती है। जालोर जिले में केंद्रीय सहकारी बैंक और पैक्स के माध्यम से इस योजना का लाभ दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे किसान साहूकारों के चंगुल से बचकर सहकारी आंदोलन से जुड़ रहे हैं।

 पैक्स से जुड़ने वाले नए सदस्यों को मिलेगा 15 हजार तक का अल्पकालीन ऋण

सहकारिता के दायरे को व्यापक बनाने और अधिक से अधिक ग्रामीण किसानों को संस्थागत वित्त (Institutional Finance) से जोड़ने के लिए इस रबी सीजन विशेष पहल की गई है। जालोर जिले की ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स) से जुड़ने वाले नए सदस्यों को इस सीजन में अधिकतम 15 हजार रुपये तक का अल्पकालीन फसली सहकारी ऋण मुहैया कराया जाएगा।केंद्रीय सहकारी बैंक जालोर द्वारा पैक्स के जरिए यह राशि सीधे नए किसानों तक पहुंचेगी। कृषि कार्यों की शुरुआती जरूरतों जैसे बुवाई (Sowing) के वक्त खाद और बीज की खरीदी के लिए यह राशि नए किसानों के लिए बेहद मददगार साबित होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में इस पहल से न केवल पैक्स का सदस्यता दायरा (Membership Scope) बढ़ेगा, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था (Banking System) से वंचित किसानों को भी मुख्यधारा (Mainstream) से जुड़ने का सुनहरा अवसर प्राप्त होगा।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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