सारांश
राजस्थान में खरीफ सत्र के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन की खरीद के लिए कुल 810 क्रय केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था और सहकार फसल खरीद मित्र योजना लागू की गई है, जिसके तहत किसानों को ऑनलाइन सीधा भुगतान किया जाएगा।
विस्तार

जयपुर।| सहकारी जगत रिपोर्ट्स — 12 अक्टूबर |राजस्थान राज्य सहकारी क्रय-विक्रय संघ लिमिटेड (राजफेड) ने खरीफ विपणन सत्र के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP ) योजना के तहत मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन की खरीद प्रक्रियाओं को सुचारू बनाने के लिए राज्यभर में 810 क्रय केंद्रों को हरी झंडी दे दी है। राजफेड के वाणिज्यिक महाप्रबंधक संदीप खंडेलवाल की ओर से जारी आदेशों में यह स्पष्ट किया गया है कि सक्षम स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद, जिला कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में खरीद केंद्रों से जुड़ी सभी तैयारियां समय पर मुकम्मल करनी होंगी।स्वीकृत किए गए कुल 810 क्रय केंद्रों में क्रय-विक्रय सहकारी समितियों (KVSS – Kray Vikray Sahakari Samiti) स्तर पर 356 केंद्र और ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSS ) स्तर पर 454 केंद्र शामिल हैं। फसलवार विवरण के तहत मूंग के लिए 314 (166 KVSS व 148 GSS), मूंगफली के लिए 283 (162 KVSS व 121 GSS), उड़द के लिए 136 (78 KVSS व 58 GSS) तथा सोयाबीन के लिए 77 (48 KVSS व 29 GSS) क्रय केंद्र तय किए गए हैं।राजफेड ने सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देश दिया है कि संबंधित क्रय केंद्रों पर भारत सरकार द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मापदंडों (FAQ) के अनुरूप खरीद सुनिश्चित की जाए। केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक तुलाई मशीनें, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी, बैटरी बैकअप और कृषि जिंसों को बारिश व नमी से सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल, खूंटे व रस्सियों की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। इसके अलावा, जिन ग्राम सेवा सहकारी समितियों के पास GST (Goods and Services Tax) नंबर नहीं है, उन्हें जल्द से जल्द GST पंजीयन कराने तथा व्यवस्थापकों व ऑपरेटरों की SSO (Single Sign-On) आईडी बनवाकर राजफेड को प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं।खरीद केंद्रों पर सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुख्य सचिव के निर्देशों के तहत पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। साथ ही, प्रशासनिक सुधार विभाग के आदेशानुसार खरीद केंद्र स्तर पर गठित समन्वय एवं निगरानी समितियों को सक्रिय करने के आदेश दिए गए हैं।
सहकार फसल खरीद मित्र योजना: 500 रुपये के स्टाम्प पर होगा अनुबंध, पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सीधा खाते में होगा भुगतान
खरीफ के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन एवं तिलहन की खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए क्रय-विक्रय सहकारी समितियों (KVSS) और ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSS – सहकार फसल खरीद मित्र) के मध्य अनुबंध निष्पादित किया जाएगा। यह इकरारनामा 500 रुपये के स्टाम्प पेपर पर नोटरी पब्लिक से सत्यापित करवाकर जमा कराना अनिवार्य होगा।योजना के तहत ग्राम सेवा सहकारी समितियों (सहकार मित्र) को कुल समर्थन मूल्य क्रय दर का 0.60 प्रतिशत और संबंधित क्रय-विक्रय सहकारी समिति को 0.40 प्रतिशत राशि प्रशासनिक व्यय के रूप में देय होगी। यह राशि कार्य के पूर्ण होने, हिसाब मिलान तथा नेफेड (NAFED) से बजट प्राप्त होने के पश्चात हस्तांतरित की जाएगी।खरीदी गई जिंसों का भुगतान किसानों को सीधे उनके जनआधार या बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर किया जाएगा। किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण के समय जनआधार/कार्ड और हेक्टेयर में अंकित रकबे वाली मूल गिरदावरी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। गलत जानकारी देकर कराए गए पंजीकरण निरस्त किए जाएंगे। जिंस की गुणवत्ता जांचने के लिए मॉइश्चर मीटर और बारदाने का पूरा प्रबंधन सहकार मित्र समितियों द्वारा किया जाएगा।
त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था: जिला कलक्टर की अध्यक्षता में कमेटी रखेगी क्रय केंद्रों पर नजर ।
राज्य में मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर होने वाली खरीद को विवादमुक्त और पारदर्शी बनाए रखने के लिए राज्य स्तर से लेकर केंद्र स्तर तक त्रिस्तरीय निगरानी ढांचा सक्रिय किया गया है। मुख्य सचिव के निर्देशों के तहत संवेदनशील क्रय केंद्रों पर विशेष निगरानी के आदेश दिए गए हैं।जिला स्तर पर जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित ‘जिला स्तरीय समन्वय एवं निगरानी समिति’ में पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त रजिस्ट्रार, क्षेत्रीय अधिकारी (राजफेड), जिला रसद अधिकारी, उप निदेशक (कृषि) और उप रजिस्ट्रार शामिल होंगे। यह समिति खरीद के दौरान आने वाली राजस्व व लॉजिस्टिक समस्याओं का निस्तारण करेगी।खरीद के दौरान गिरदावरी व राजस्व संबंधी शिकायतों के मौके पर ही समाधान के लिए प्रत्येक क्रय केंद्र पर एक नायब तहसीलदार या गिरदावर मय हलका पटवारी की नामजद ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके साथ ही केंद्रों पर शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहेगा। खरीद केंद्र स्तर पर उपखंड अधिकारी (Sub-Divisional Officer) की अध्यक्षता में निगरानी समिति भी कार्य करेगी, जिसमें थाना इंचार्ज, कृषि उपज मंडी समिति के सचिव और केंद्र व्यवस्थापक शामिल रहेंगे।



