सार
बाड़मेर-बालोतरा में सहकारी PACS के मजबूत स्तंभ व व्यवस्थापक यूनियन जिलाध्यक्ष रायमलराम नेहरा सेवानिवृत्त हो गए हैं। गुड़ामालानी शाखा में आयोजित समारोह में उनके ऐतिहासिक संघर्षों, पैक्स कर्मियों के नियमितीकरण और सहकार आंदोलन में दिए गए अमूल्य योगदान को याद किया गया।
विस्तार
बालोतरा / बाड़मेर |जिला डेस्क 1 अक्टूबर।राजस्थान के ग्रामीण अंचल (Rural area) में सहकारी आंदोलन (Cooperative movement) की रीढ़ कहे जाने वाले त्रिस्तरीय ढांचे (Three-tier structure) की सबसे छोटी और मजबूत इकाई—ग्राम सेवा सहकारी समितियों (PACS – Primary Agricultural Credit Societies) के सुदृढ़ीकरण (Strengthening) में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ पैक्स कर्मी एवं व्यवस्थापक यूनियन (Manager Union) के जिलाध्यक्ष रायमलराम नेहरा 30 सितंबर को अपनी अधिवार्षिकी आयु (Superannuation age) पूर्ण कर व्यवस्थापक पद की सेवा से सेवानिवृत्त (Retired) हो गए।
इस अवसर पर केंद्रीय सहकारी बैंक (Central Cooperative Bank) बाड़मेर की गुड़ामालानी शाखा (Branch) में एक भव्य और सेवानिवृत्ती समारोह (Farewell ceremony) आयोजित किया गया।समारोह में सहकारी जगत से जुड़े दिग्गजों, शाखा प्रबंधक (Branch Manager) भीखाराम विश्नोई, बैंकिंग सहायक (Banking Assistant), भेड़ाना व्यवस्थापक मदन पटेल, भाखरपुरा व्यवस्थापक माधुदास वैष्णव, सहित विभिन्न पैक्स (PACS) के अध्यक्ष (Presidents), बैंकिंग स्टाफ (Banking staff) और बड़ी संख्या में स्थानीय किसान मौजूद रहे। वक्ताओं ने सहकारी आंदोलन में नेहरा के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए उनके सेवाकाल (Tenure) को प्रेरणादायी बताया।ऐतिहासिक दृष्टि से बाड़मेर और बालोतरा क्षेत्र का सहकार आंदोलन विषम भौगोलिक परिस्थितियों (Geographical conditions) और संघर्षों के बीच पल्लवित हुआ है। इस त्रिस्तरीय ढांचे (Three-tier structure) (शीर्ष बैंक, केंद्रीय सहकारी बैंक और प्राथमिक कृषि ऋण समितियां) में पैक्स धरातल पर किसानों की आर्थिक प्रगति (Economic progress) का मुख्य आधार रही हैं।
इसी व्यवस्था में रतनपुरा ग्राम सेवा सहकारी समिति के व्यवस्थापक (Manager) के रूप में रायमलराम नेहरा ने न सिर्फ अपनी प्रशासनिक दक्षता (Administrative efficiency) का लोहा मनवाया, बल्कि सहकार कर्मियों के अधिकारों के लिए एक जुझारू नेतृत्वकर्ता की भूमिका भी निभाई।उनके यूनियन नेतृत्वकाल (Union leadership tenure) को बाड़मेर जिले के सहकार इतिहास में एक स्वर्ण युग (Golden era) के रूप में याद किया जाएगा। नेहरा के कुशल नेतृत्व (Efficient leadership) में सहकार कर्मियों के हितों से जुड़े कई जटिल मुद्दों का समाधान हुआ। फसल बीमा (Crop insurance) सर्विसेज चार्ज राशि का सही आवंटन, जिले के लगभग 100 से अधिक पैक्स कार्मिकों का नियमितीकरण (Regularization) और एफआईजी पोर्टल नीति (FIG Portal policy) में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद दो प्रतिशत ब्याज अनुदान (Interest subsidy) को यथावत रखवाना उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियां हैं। इन संघर्षों ने न केवल कर्मचारियों को संबल (Support) दिया, बल्कि सहकारी आंदोलन को नई मजबूती प्रदान की।
संघर्ष और समर्पण की मिसाल: सहकार कर्मियों के अधिकारों के लिए लड़ी गईं ऐतिहासिक लड़ाइयां

बालोतरा-बाड़मेर क्षेत्र में सहकारी आंदोलन के इतिहास पर नजर डालें तो व्यवस्थापक यूनियन (Manager Union) का नेतृत्व हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। सेवानिवृत्त व्यवस्थापक एवं जिलाध्यक्ष रायमलराम नेहरा का कार्यकाल इस बात का गवाह है कि दृढ़ इच्छाशक्ति (Strong will) और वैचारिक स्पष्टता (Ideological clarity) से बड़े प्रशासनिक बदलाव (Administrative changes) लाए जा सकते हैं। अपने लंबे सेवाकाल के दौरान उन्होंने न केवल रतनपुरा समिति को आर्थिक रूप से सुदृढ़ किया, बल्कि संपूर्ण बाड़मेर जिले के पैक्स कार्मिकों के अधिकारों के लिए सड़क से लेकर कानूनी मंच तक मजबूत पैरवी की।विशेषज्ञों का मानना है कि जिले मे पैक्स कार्मिकों का नियमितीकरण (Regularization) करवाना और एफआईजी पोर्टल नीति (FIG Portal policy) के पेंच में फंसे दो प्रतिशत ब्याज अनुदान (Interest subsidy) को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुरक्षित रखना मील का पत्थर (Milestone) साबित हुआ है। इन ऐतिहासिक संघर्षों ने यह सिद्ध कर दिया कि सहकारिता केवल ऋण वितरण (Credit distribution) का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों और कार्मिकों के अधिकारों की रक्षा का एक सशक्त मंच भी है। गुड़ामालानी शाखा में आयोजित समारोह में वक्ताओं ने एक स्वर में स्वीकार किया कि नेहरा का यह संघर्षशील और निष्कलंक (Immaculate) कार्यकाल आने वाली पीढ़ी के PACS सहकार कर्मियों के लिए हमेशा एक मार्गदर्शक (Guiding) मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।


