Home संपादकीय सहकार से समृद्धि’ के दावों के बीच रसातल में पहुंचता सहकार आंदोलन: लचर कार्यसंस्कृति, मनमाने फैसले और डगमगाता आमजन का विश्वास

सहकार से समृद्धि’ के दावों के बीच रसातल में पहुंचता सहकार आंदोलन: लचर कार्यसंस्कृति, मनमाने फैसले और डगमगाता आमजन का विश्वास

सार

सहकारी आंदोलन कागजी दावों और कुप्रबंधन से जूझ रहा है। जैसलमेर में पैक्स व्यवस्थापकों पर कार्रवाई लचर कार्यसंस्कृति, बढ़ते एनपीए और किसानों के घटते विश्वास का प्रमाण है।

विस्तार

​जैसलमेर/जयपुर। सहकारी जगत की ग्राउंड रिपोर्ट 15 सितंबर |देशभर में ‘सहकार से समृद्धि’ के हसीन सपने दिखाए जा रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इन दावों की पोल खोल रही है। कभी आम आदमी और किसानों के लिए आर्थिक संबल का सबसे बड़ा व भरोसेमंद जरिया रहे सहकारी आंदोलन से अब आमजन का मोहभंग होने लगा है। स्थिति यह है कि कागजी योजनाओं और महकमे के लचर रवैये के चलते सदियों पुराना यह ढांचा आज कराह रहा है। ताजा बानगी जैसलमेर जिले से सामने आई है, जहां अल्पकालीन फसली ऋणों की बेहद कम वसूली और एनपीए (NPA) के मामलों को लेकर केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक ने एक साथ दर्जनों ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स) के व्यवस्थापकों पर गाज गिराते हुए उन्हें निलंबित करने के निर्देश दिए हैं।यह सिर्फ एक जिले की तस्वीर नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के सहकारिता परिदृश्य का सच है। एक तरफ सरकार विभागीय स्तर से स्वायत्त सहकारी समितियों के मूल स्वरूप और अधिकारों में लगातार अत्यधिक दखलंदाजी कर रही है, तो दूसरी तरफ पैक्स और लैम्पस में पिछले एक दशक से व्यवस्थापकों के पद पर भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी है। नतीजा यह है कि सीमित और थके-हारे कर्मचारियों के कंधों पर पूरे सिस्टम का बोझ है। इसके अलावा, ब्याज मुक्त योजना मे ब्याज अनुदान राशि के आवंटन में विभागीय स्तर पर अपनाया जाने वाला मनमाफिक रवैया और पैक्स कंप्यूटराइजेशन के नाम पर वेंडर टीम की अकुशल प्रबंधन नीतियां व्यवस्था को सुधारने के बजाय और अधिक उलझा रही हैं।

लचर कार्य-परिदृश्य और व्यवस्थापकों पर निलंबन की कार्रवाई , सीसीबी ने कसे तेवर
जिले मे कमजोर होती व्यवस्था को सुधारने के लिए अब सीसीबी (CCB) प्रबंध निदेशक ने व्यवस्थापकीय सेवा नियम, 2022 के नियम-45 के तहत संज्ञान लेते हुए संबंधित 43 ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स) की प्रबंध कार्यकारिणी और अध्यक्षों को पत्र जारी किया है।निर्देशित किया गया है कि 43 समितियों में ऋण वितरण और वसूली लचर रही है तथा खाते एनपीए (NPA) हो गए हैं, उनके लापरवाह व्यवस्थापकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। साथ ही, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त रजिस्ट्रार (बैंकिंग), सहकारिता  विभाग राजस्थान ,अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारिता विभाग  जोधपुर खंड और जैसलमेर के उप-रजिस्ट्रार को भी प्रतिलिपि प्रेषित कर निर्देशित किया गया है कि वे अनुशासनात्मक समितियों के जरिए दोषी कार्मिकों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

अतीत के स्वर्णिम इतिहास पर भारी पड़ रहा वर्तमान विभागीय कुप्रबंधन, कर्ज के जाल में उलझते किसान

ऐतिहासिक रूप से राजस्थान का सहकारी आंदोलन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है, जिसने संकट के समय हमेशा किसानों और जरूरतमंदों को बिना शोषण के वित्तीय उधार सेवाएं उपलब्ध कराई हैं। लेकिन वर्तमान विभागीय कार्य-परिदृश्य इस गौरवशाली इतिहास पर बट्टा लगा रहा है। एक तरफ जिले की पैक्स समितियों में खरीफ ऋणों का वितरण महज शून्य से पंद्रह-पच्चीस प्रतिशत तक सिमटकर रह गया है, जिसके कारण किसानों के खाते तेजी से अवधिपार और एनपीए घोषित हो रहे हैं; वहीं दूसरी ओर शीर्ष स्तर से थोपे गए प्रशासनिक फरमान ज़मीनी हक़ीक़त से कोसों दूर हैं।​जब तक शासन-प्रशासन सहकारिता को केवल कागजी आंकड़ों और सरकारी नियंत्रण का जरिया बनाना बंद नहीं करेगा, और जब तक पारदर्शी भर्ती, समय पर अनुदान वितरण और स्वायत्तता का सम्मान नहीं होगा, तब तक ‘सहकार से समृद्धि’ का नारा कागजों तक ही सीमित रहेगा। ग्रामीण अंचल के किसानों और आमजन का इस पवित्र आंदोलन से पूरी तरह विश्वास उठ जाए, उससे पहले नीति-नियंताओं को अपनी कार्यसंस्कृति और प्राथमिकताओं में क्रांतिकारी बदलाव करना होगा।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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