सार
सहकारी पैक्स व्यवस्थापक मांगीलाल चौधरी अधिवर्षिकी आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए। इस अवसर पर आयोजित समारोह में उनके सहकारिता क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान की सराहना की गई।
विस्तार
जालोर | जिला डेस्क, 31 अगस्त:|सहकारी आंदोलन की रीढ़ कहे जाने वाले त्रिस्तरीय ढांचे के धरातलीय योद्धा और गोदन बहुउद्देशीय ग्राम सेवा सहकारी समिति (पैक्स) के व्यवस्थापक मांगीलाल चौधरी सोमवार को अपनी अधिवर्षिकी आयु पूर्ण कर पैक्स सेवा से सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर सीसीबी मुख्य शाखा परिसर में एक गरिमामयी विदाई समारोह आयोजित किया गया, जहाँ क्षेत्र के पैक्स व्यवस्थापकों ने उन्हें साफा बंधाकर और माला पहनाकर भावभीनी विदाई दी।समारोह के दौरान सीसीबी शाखा प्रबंधक महेंद्रसिंह राव ने व्यवस्थापक मांगीलाल चौधरी के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में उनका योगदान अनुकरणीय रहा है। पैक्स में व्यवस्थापक को रीढ़ माने जाने वाले चौधरी ने हमेशा किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा। इस अवसर पर पैक्स व्यवस्थापक कुंदन सिंह, भीमाराम, भंवरलाल, महावीरसिंह, नारायणसिंह, मफतलाल और प्रकाशसिंह सहित कई सहकार बंधु मौजूद रहे, जिन्होंने उनके आगामी जीवन के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।
अतीत से वर्तमान: पैक्स व्यवस्थापकों का बदलता कार्य-परिदृश्य
राजस्थान के ग्रामीण अंचल में सहकारिता का त्रिस्तरीय ढांचा—शीर्ष पर अपेक्स बैंक, मध्य स्तर पर केंद्रीय सहकारी बैंक और निचले स्तर पर ग्राम सेवा सहकारी समितियां—किसानों की आर्थिक रीढ़ है, जिसमें व्यवस्थापक केंद्रीय धुरी होते हैं।अतीत में पैक्स का कार्यक्षेत्र सीमित और कार्यप्रणाली पारंपरिक बही-खातों पर आधारित थी। खाद, बीज और ऋण वितरण मैन्युअल होने के कारण व्यवस्थापकों को अत्यधिक कागजी कार्रवाई करनी पड़ती थी। वहीं, आज डिजिटल इंडिया के दौर में पैक्स का कंप्यूटरीकरण हो चुका है, जिससे ऋण वितरण और उर्वरक प्रबंधन जैसी सेवाएं ऑनलाइन हो गई हैं। अब व्यवस्थापकों को अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर पर भी दक्षता हासिल करनी पड़ रही है।मांगीलाल चौधरी जैसे अनुभवी व्यवस्थापकों ने इस बदलाव को करीब से देखा है। पारंपरिक बही-खातों से डिजिटल युग तक हर चुनौती का सामना करते हुए, पैक्स व्यवस्थापकों की यह निष्ठावान सेवा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में हमेशा मील का पत्थर साबित होती रहेगी।


