Home स्‍पेशल 15 साल का लंबा इंतजार खत्म: अलवर केंद्रीय सहकारी बैंक में चुनाव का बिगुल बजा, निर्वाचन शेड्यूल जारी

15 साल का लंबा इंतजार खत्म: अलवर केंद्रीय सहकारी बैंक में चुनाव का बिगुल बजा, निर्वाचन शेड्यूल जारी

सार 

Alwar : केंद्रीय सहकारी बैंक में 15 साल बाद चुनाव का शेड्यूल जारी हो गया है। इससे प्रदेश के अन्य सहकारी बैंकों में लोकतांत्रिक बोर्ड की बहाली और पारदर्शी कार्यप्रणाली की उम्मीद जगी है।

विस्तार 

अलवर । सहकारी जगत की ग्राउंड रिपोर्ट | 25 अगस्त | राजस्थान में सहकारिता विभाग और राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण (Rajasthan State Cooperative Election Authority) की कार्यशैली भी वाकई कमाल की है। जिस बैंक में आखिरी बार साल 2009-10 में चुनाव कराए गए थे और जहां साल 2014 से लगातार जिला कलेक्टर प्रशासक बनकर बागडोर संभाले बैठे थे, वहां अचानक राजस्थान राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण की तंद्रा भंग हो गई है। लगभग 15 साल के लंबे इंतजार के बाद अब आनन-फानन में अलवर केंद्रीय सहकारी बैंक (CCB) के संचालक मंडल और पदाधिकारियों के चुनाव का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया गया है। जारी आदेश के तहत राजस्थान राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण ने अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारी समितियां खंड भरतपुर के निर्देशानुसार उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां खैरथल प्रकाश नारायण झा को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया है। प्राधिकरण द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 25 अगस्त को चुनाव का नोटिस जारी करने के साथ ही प्रस्तावित मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाना है। इसके बाद 31 अगस्त तक आक्षेप प्राप्त कर उनका निस्तारण किया जाएगा और उसी दिन अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। नामांकनों की प्रक्रिया 1 सितंबर को पूरी की जाएगी, जबकि 2 सितंबर को नाम वापसी के बाद अंतिम उम्मीदवारों की सूची सामने आएगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो 8 सितंबर को मतदान और मतगणना कराकर परिणाम घोषित किए जाएंगे तथा 9 सितंबर को पदाधिकारियों का चयन संपन्न होगा।

 जल्द केंद्रीय सहकारी बैंकों में चुनाव का बज सकता है बिगुल

अलवर सीसीबी में 15 सालों के लंबे अंतराल के बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से अब प्रदेश के अन्य जिलों में भी उम्मीद की किरण जाग उठी है। माना जा रहा है कि अलवर केंद्रीय सहकारी बैंक के चुनाव संपन्न होने के तुरंत बाद राज्य के अन्य अधिकतर केंद्रीय सहकारी बैंकों में भी जल्द ही चुनाव प्रक्रिया का बिगुल बज सकता है। पिछले लंबे समय से कई सहकारी बैंकों में निर्वाचित बोर्ड न होने से प्रशासक व्यवस्था लागू थी, लेकिन इस पहल से राज्य भर के सहकारी ढांचे में एक बार फिर से पूर्ण लोकतांत्रिक स्वरूप बहाल होने की प्रबल संभावना बन गई है।

सहकारिता के सिद्धांतों की अनदेखी बंद हो

अलवर केंद्रीय सहकारी बैंक के चुनाव कार्यक्रम के जारी होने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सहकार नेता सूरजभानसिंह आमेरा ने कहा कि सहकारी आंदोलन की वास्तविक आत्मा उसकी लोकतांत्रिक व्यवस्था में निहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 97वें संविधान संशोधन अधिनियम और सहकारिता के मूलभूत सिद्धांतों के तहत सभी सहकारी संस्थाओं का संचालन पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से होना अनिवार्य है। जब तक संस्थाओं में हर स्तर पर निर्वाचित जनप्रतिनिधि सामने नहीं आएंगे, तब तक किसानों के वित्तीय हितों की रक्षा और सरकारी योजनाओं का पारदर्शी व प्रभावी क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर संभव नहीं हो पाएगा। वर्षों तक प्रशासकों के भरोसे बैंक को चलाना सहकारिता के मूल उद्देश्यों के विपरीत है।

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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