सार
फलोदी में बनेगी अलग केंद्रीय सहकारी बैंक, जोधपुर सीसीबी बैंक से पृथक्करण की प्रक्रिया शुरू; सर्वे रिपोर्ट में वित्तीय स्थिति मजबूत
विस्तार 
जयपुर/ फलोदी/ |सहकारी जगत की ग्राउंड रिपोर्ट | 3 अगस्त |राजस्थान के नए जिलों के गठन के बाद अब प्रशासनिक और वित्तीय सुगमता के लिहाज से फलोदी जिले को एक बड़ी सौगात मिलने की राह प्रशस्त हो गई है। लंबे समय से उठ रही मांग के बीच सहकारिता विभाग और नाबार्ड के मानकों के आधार पर फलोदी में एक पृथक केंद्रीय सहकारी बैंक (CCB) के गठन का खाका पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। अब सहकारिता विभाग की सर्वे रिपोर्ट और विधानसभा में आए जवाबों से फलोदी में त्रिस्तरीय सहकारी ढांचे के सुदृढ़ होने के द्वार खुलते नजर आ रहे हैं। कि फलोदी में बैंक गठन की प्रक्रिया और सर्वेक्षण रिपोर्ट पर गंभीरता से काम चल रहा है। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा, तो जल्द ही फलोदी का अपना स्वतंत्र केंद्रीय सहकारी बैंक होगा, जिससे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व गति मिलेगी।
अतीत से वर्तमान का सफर: जोधपुर की छांव से निकलकर स्वायत्तता की ओर
अतीत में फलोदी क्षेत्र सहकारिता और बैंकिंग सेवाओं के लिए पूरी तरह जोधपुर केंद्रीय सहकारी बैंक पर निर्भर रहा है। भौगोलिक रूप से जोधपुर और फलोदी का दायरा काफी बड़ा होने के कारण ग्रामीण इलाकों के किसानों और पैक्स (PACS) प्रबंधकों को छोटी-छोटी वित्तीय स्वीकृतियों और मदों के लिए लंबी दूरियां तय करनी पड़ती थीं।जब फलोदी को नया जिला घोषित किया गया, तभी से यह सवाल मुखर होने लगा था कि क्या यहां प्रशासनिक और वित्तीय विकेंद्रीकरण के तहत स्वतंत्र केंद्रीय सहकारी बैंक की स्थापना होगी या नहीं। वर्तमान कार्य-परिदृश्य यह गवाही देता है कि फलोदी अब केवल एक उप-क्षेत्र नहीं, बल्कि अपने दम पर एक सक्षम और लाभ कमाने वाली वित्तीय इकाई के रूप में उभर चुका है।
वर्तमान कार्य-परिदृश्य: आंकड़ों के आईने में फलोदी की ताकत
हाल ही में सामने आई सर्वे रिपोर्ट (31 मार्च 2024 के अंकेक्षित आंकड़ों के आधार पर) यह साबित करती है कि प्रस्तावित फलोदी केंद्रीय सहकारी बैंक पूरी तरह ‘पोटेंशियल वायेबल’ (संभावित रूप से सक्षम) है:

वित्तीय सक्षमता और नाबार्ड के पैमाने
विशेषज्ञों के मुताबिक, नाबार्ड की नीति के तहत ‘ब्रेक इवन लेवल’ (Break Even Level) के आधार पर नए बैंक के गठन की शर्तें पूरी होती हैं। प्रस्तावित फलोदी बैंक का वित्तीय मार्जिन 3.22 प्रतिशत आंका गया है।प्रस्तावित बैंक की कुल वार्षिक प्रबंधकीय लागत (कर्मचारी वेतन, मुख्यालय और शाखा खर्च आदि मिलाकर) 318.12 लाख रुपये अनुमानित की गई है। इसके बावजूद, फलोदी बैंक का विशाल ऋण व्यवसाय और संचयी लाभ (लगभग 1,908.19 लाख रुपये जो जोधपुर बैंक से स्थानांतरित होंगे) इसे एक मजबूत और आत्मनिर्भर बैंक बनाते हैं।
भविष्य का प्रोजेक्शन: अगले 5 साल तक दोनों बैंक रहेंगे फायदे में
सहकारिता विभाग के वित्तीय अनुमानों (Projections) के अनुसार, जोधपुर से फलोदी के अलग होने के बाद भी न केवल फलोदी बैंक बल्कि ‘रेसिडुअल’ जोधपुर बैंक भी लगातार मुनाफे में रहेगा।
- फलोदी बैंक का अनुमानित लाभ: वर्ष 2024-25 में लगभग 361.59 लाख रुपये से शुरू होकर वर्ष 2028-29 तक बढ़कर 696.52 लाख रुपये तक पहुंच जाएगा।
- इससे यह साफ है कि दोनों ही इकाइयां वित्तीय रूप से बेहद सुदृढ़ बनी रहेंगी।
एक्सपर्ट व्यु -:–निष्कर्ष और प्रशासनिक सुगमता
विशेषज्ञों और प्रशासनिक स्तर पर यह माना जा रहा है कि जोधपुर और फलोदी के भौगोलिक क्षेत्रफल तथा प्रधान कार्यालय से दूरी को देखते हुए पृथक बैंक का गठन बेहद जरूरी है। इससे न केवल किसानों को त्वरित ऋण और बैंकिंग सेवाएं मिलेंगी, बल्कि प्रशासनिक और पर्यवेक्षणीय सुगमता भी बढ़ेगी। राज्य सरकार से मिलने वाली शुरुआती सहायता (जैसे भवन निर्माण, निशुल्क भूमि और अंशदान अनुदान) यदि समय पर मिल जाए, तो फलोदी का यह नया केंद्रीय सहकारी बैंक राजस्थान के सहकारिता आंदोलन में मील का पत्थर साबित होगा।


