- जालोर सहकारिता विभाग में प्रशासनिक उठापटक: 10 दिन में तीन अधिकारी बदले, फिर खाली हुआ उप रजिस्ट्रार का पद
- जिले के सबसे संवेदनशील और नियंत्रणकारी महकमे में प्रशासनिक अस्थिरता चरम पर
- विपक्षी काल के तीखे तेवर और सत्तापक्ष के दौर में जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सियासी सुगबुगाहट

जालोर | जिला ङेस्क 24 जुलाई| जिले में सहकारिता विभाग के महत्वपूर्ण प्रशासनिक और नियंत्रण वाले उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां कार्यालय में अधिकारियों के टिकने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालात यह हैं कि महज 10 दिन के भीतर इस पद पर तीन बार फेरबदल हो चुका है, और ताजा एपीओ आदेश के बाद जालोर में यह पद एक बार फिर रिक्त हो गया है। प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इस उठापटक को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।विभाग द्वारा 10 जुलाई को इस पद पर सहकारिता सेवा के अधिकारी सुनील वीरभान के स्थान पर सिरोही सीसीबी में प्रबंध निदेशक पद पर तैनात पुनाराम चौयल को जालोर उप रजिस्ट्रार पद पर लगाया गया था।
इसके महज दो दिन बाद जारी एक ऑफलाइन आदेश के जरिए सिरोही सीसीबी प्रबंध निदेशक पद पर तैनात किए सहकारिता सेवा के संयुक्त रजिस्ट्रार स्तर के अधिकारी शुद्धोधन उज्जवल को जालोर उप रजिस्ट्रार पद पर तैनात कर पुनाराम चौयल का स्थानांतरण आदेश निरस्त कर दिया गया था।इस फेरबदल के बाद अब विभाग ने ताजा आदेश जारी कर दिए हैं। सहकारिता विभाग के नए आदेश के अनुसार, जालोर के उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां पद पर कार्यरत सहकारिता सेवा के संयुक्त रजिस्ट्रार शुद्धोधन उज्जवल को प्रशासनिक कारणों से अग्रिम आदेशों तक तुरंत प्रभाव से पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा (एपीओ) में रखा गया है।
आदेश के तहत उन्हें अपनी उपस्थिति कार्यालय अतिरिक्त रजिस्ट्रार (अपील) जोधपुर में देने के निर्देश दिए गए हैं। यह पद जिले में प्रशासनिक सुदृढ़ता और कामकाज पर नियंत्रण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन बार-बार अधिकारियों के बदलने और पद के रिक्त होने से विभागीय योजनाओं पर गंभीर असर पड़ स्वाभाविक है।
अतीत के दाग: सहकारिता आंदोलन और राजनीतिक दखल का इतिहास
जिले में सहकारी संस्थाओं पर अतीत से ही राजनीतिक प्रभाव और खींचतान का साया रहा है। पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान, सीसीबी प्रबंध निदेशक (MD) के पद पर सहायक रजिस्ट्रार स्तर अधिकारी की नियुक्ति में क्षेत्र के तत्कालीन प्रदेश सरकार के प्रभावशाली सत्तारूढ़ नेतृत्व की कथित भूमिका सामने आई थी। इसके बाद सीसीबी मे स्कीनिग चयन प्रकिया मे बरती गई अनदेखी और उसके पश्चात उजागर हुई रिश्वतखोरी व प्रशासनिक अनियमितताओं की गूंज पूरे प्रदेश में गूंजी थी, जिससे जिले का सहकारी आंदोलन गंभीर रूप से दागदार हुआ था।वर्तमान में भी सत्तारूढ़ दल के एक प्रभावशाली नेतृत्व की शह पर जिले में तमाम घटनाक्रम चलने की चर्चाएं जोर-शोर से चल रही हैं। सियासी गलियारों में यह सबसे बड़ा और दबी जुबान से उठाया जाने वाला सवाल बना हुआ है कि— जो जनप्रतिनिधि पिछली सरकार के समय विधानसभा सदन में सहकारिता विभाग के जरिए जिले में हुई अनियमितताओं पर तीखे सवाल उठाते थे और जवाब मांगते थे, वे आज अपनी ही सरकार के कार्यकाल में हो रही ऐसी प्रशासनिक उठापटक और मनमाफिक विभागीय कार्रवाइयों पर पूरी तरह चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?
कृषि बाहुल्य जिले की जमीनी व्यवस्थाओं पर सीधा असर
जालोर एक प्रमुख कृषि बाहुल्य जिला है, जहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार खेती और सहकारिता से मिलने वाला ऋण है। उप रजिस्ट्रार का पद बार-बार रिक्त होने और अधिकारियों के स्थिर न रहने से पैक्स (PACS) समितियों के कामकाज, खाद-बीज वितरण, ऋण वितरण और ऑडिट जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर होने से वित्तीय अनुशासनहीनता का खतरा भी बढ़ गया है, जिसका खामियाजा अंततः जिले के आम किसानों को भुगतना पड़ रहा है।


