सार
# Rajasthan राजस्थान सरकार ने किसानों को किराए पर आधुनिक कृषि यंत्र और ट्रैक्टर उपलब्ध कराने के लिए 88 कस्टम हायरिंग केंद्रों की प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी की हैं।
विस्तार

#Rajasthan ! प्रदेश ङेस्क 22 जुलाई !राजस्थान में कृषि को आधुनिक और उन्नत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने किसानों के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। कृषि आयुक्तालय, राजस्थान, जयपुर द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 की बजट घोषणा के तहत ग्राम सेवा सहकारी समितियों और क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के माध्यम से विभिन्न जिलों में कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी कर दी गई हैं। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को किराए पर आधुनिक कृषि यंत्र और ट्रैक्टर आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। प्रशासनिक स्वीकृति के अनुसार, प्रत्येक स्वीकृत कस्टम हायरिंग केंद्र की अनुमानित परियोजना लागत 10.00 लाख रुपये है, जिस पर नियमानुसार अधिकतम 8.00 लाख रुपये तक का अनुदान सीधे देय होगा। इन केंद्रों को स्वीकृति जारी होने की तिथि से 3 महीने के भीतर कृषि यंत्रों का क्रय कर प्रभावी संचालन शुरू करना अनिवार्य होगा।
88 कस्टम हायरिंग केंद्र स्वीकृत
राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 88 कस्टम हायरिंग केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। इनमें बांसवाड़ा में 15 सिरोही मे 14, बाड़मेर में 10, डीग व डीडवाना-कुचामन में 8-8, अजमेर में 7, फलोदी व धौलपुर में 5-5, झुंझुनू में 4, सवाई माधोपुर, कोटपूतली-बहरोड व जोधपुर में 3-3, तथा डूंगरपुर, बालोतरा व हनुमानगढ़ में 1-1 केंद्र शामिल हैं

कस्टम हायरिंग केंद्र योजना के तहत समितियों को मिलेगा वित्तीय सहयोग
इसी कड़ी में, दी सिरोही सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, सिरोही द्वारा समितियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है। बैंक द्वारा जारी संशोधित ऋण स्वीकृति पत्र के अनुसार, ग्राम सेवा सहकारी समितियों के लिए कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापना ऋण योजना के अंतर्गत 9.00 लाख रुपये तक का ऋण 6 वर्ष (72 माह) की अवधि के लिए 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर स्वीकृत किया गया है, जिसकी अर्द्धवार्षिक किश्त ऋण योजना के अनुसार निर्धारित की गई है।
कृषि यंत्र खरीद और किराए पर लेने के संबंध में नई गाइडलाइंस
योजना के तहत किसानों को कृषि यंत्र किराए पर प्राप्त करने के लिए ‘राजकिसान कस्टम हायरिंग ऐप’ के माध्यम से अनिवार्य रूप से ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी, और ऑफलाइन आवेदन मान्य नहीं होंगे। इसके अलावा 1.00 लाख रुपये से अधिक कीमत के स्व-चालित यंत्रों (जैसे ट्रैक्टर, पावर टिलर) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टेलीमेटिक्स किट और जीपीएस का होना अनिवार्य किया गया है, जिससे मशीन की लाइव लोकेशन ट्रैक की जा सके। साथ ही, भारत सरकार के ‘कृषि मैपर ऐप’ पर इनका जियो-रेफरेंस होना भी जरूरी है। केवीएसएस और जीएसएस को नियमों के अनुसार ‘एसएनए स्पर्श’ पोर्टल के माध्यम से वेंडर बनाकर अनुदान राशि ट्रांसफर की जाएगी, और क्रय किए गए यंत्रों पर कम से कम 6 साल तक हस्तांतरण या विक्रय की पाबंदी रहेगी।


