Home राज्य राजस्थान सहकारिता विभाग में तबादलों की हलचल: मेरिट और ‘सहकार से समृद्धि’ पर रहेगा जोर 

सहकारिता विभाग में तबादलों की हलचल: मेरिट और ‘सहकार से समृद्धि’ पर रहेगा जोर 

सार 

राजस्थान मे तबादलों पर लगी रोक हटने के बाद सहकारिता विभाग मे अब ‘मेरिट’ और ‘आवश्यकता’ के आधार पर नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज हो गई है। 10 जुलाई 2026 तक पूरी होने वाली इस कवायद का उद्देश्य ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को मजबूती देना और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना है। विभिन्न कर्मचारी संघों ने वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों को हटाने और प्रबंधकीय पदों पर योग्य एवं बेदाग अधिकारियों की नियुक्ति की मांग की है, ताकि बैंकों में व्याप्त अनियमितताओं पर अंकुश लगाकर सुशासन सुनिश्चित किया जा सके।

विस्तार 

​जयपुर ॥डिजिटल डेस्क 7 जुलाई ॥  राजस्थान में तबादलों से प्रतिबंध हटने के बाद अब सरकारी महकमों में तबादला सूचियों को अंतिम रूप देने की कवायद तेज हो गई है। इसी कड़ी में सहकारिता विभाग ने अपनी तबादला नीति को लेकर रणनीति तैयार की है। विभाग का मुख्य उद्देश्य ‘सहकार से समृद्धि‘ के विजन को धरातल पर उतारने और प्रशासनिक दक्षता को नई गति देना है। 10 जुलाई 2026 तक बढ़ाई गई समयसीमा के भीतर विभाग पूरी तरह से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की तैयारी में है विभागीय सूत्रों के अनुसार, तबादलों की यह प्रक्रिया पूरी तरह से ‘मेरिट’ और ‘आवश्यकता’ के आधार पर होगी। सरकार की मंशा स्पष्ट है कि सूचियों में जल्दबाजी के बजाय गुणात्मक बदलाव पर ध्यान केंद्रित किया जाए। विभाग यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि स्थानांतरण के बाद किसी भी सहकारी संस्था या कार्यालय का कामकाज प्रभावित न हो और स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।खास बात यह है कि जो अधिकारी वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं, उन्हें अब अनिवार्य रूप से स्थानांतरित करने की कार्य योजना तैयार को लेकर जानकारी सामने आ रही है माना जा रहा है कि इससे विभाग के कामकाज में नयापन आएगा सहकारिता विभाग के लिए यह तबादला प्रक्रिया एक बड़ी परीक्षा भी है। एक ओर जहाँ सरकार प्रशासनिक ढाँचे को मजबूत करने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर यूनियन नेतृत्व की बढ़ती सक्रियता यह दर्शाती है कि विभाग के भीतर ‘ट्रांसफर-पोस्टिंग’ को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव भी कम नहीं है। अब देखना यह होगा कि 10 जुलाई तक आने वाली सूचियों में विभाग की पारदर्शिता और सख्त मानकों की झलक कितनी दिखाई देती है।

 

अनियमितताओं पर बढ़ी चिंता, संगठनों ने शुरू की ‘लॉबिंग’

​तबादलों की सुगबुगाहट के बीच प्रदेश में सहकारी आंदोलन से जुड़े लोगों, यूनियन नेतृत्व और चिंतकों ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय सहकारी बैंकों में पूर्व में हुई अनियमितताओं के मामलों को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं।​इसे लेकर विभागीय स्तर पर परिवेदनाओं (शिकायतों) का दौर शुरू हो गया है। जानकारों का कहना है कि मुख्य रूप से इन दो बिंदुओं पर जोर दिया जा रहा है:

  • ​होम डिस्ट्रिक्ट का मोह: वर्षों से गृह जिले या उसके आसपास जमे हुए अधिकारियों का स्थानांतरण किया जाए।
  • ​खण्डीय कार्यालयों में जमावड़ा: निरीक्षक स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक, जो लंबे समय से खण्डीय कार्यालयों के ईद-गिर्द अपनी जड़ें जमाए हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए

 

यूनियन का बड़ा कदम: योग्य अधिकारियों की नियुक्ति पर जोर

​इस तबादला प्रक्रिया के समानांतर, ऑल राजस्थान कॉ-ऑपरेटिव बैंक एम्प्लाइज एव बैक ऑफिसर्स एसोसिएशन युनियन ने सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक को पत्र भेजकर अपनी प्रमुख चिंताएं व्यक्त की हैं। यूनियन के महासचिव तथा सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा ने परिवेदना में कहा है कि सहकारी बैंकों में प्रबंध निदेशक (MD), अधिशाषी अधिकारी (EO) और सहायक अधिशाषी अधिकारी (AEO) के पदों पर केवल योग्य, कुशल और बेदाग छवि के अधिकारियों को ही पदस्थापित किया जाए

भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक जंग

​विधानसभा में हाल ही में सहकारी बैंकों में पिछले पांच वर्षों के दौरान कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के लेकर विभाग ने दिए लिखित जवाब के पश्चात मुद्दा छाया रहा है। विभाग अब इस स्थिति को सुधारने के लिए एक्शन मोड में है। पहली बार सहकारिता विभाग द्वारा पुलिस अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित की गई हैं, जो यह दर्शाती हैं कि अनियमितताओं को लेकर सरकार अब किसी भी प्रकार की ढिलाई के मूड में नहीं है। साथ ही, बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए रिजर्व बैंक और नाबार्ड के ‘फिट एंड प्रोपर’ मानदंडों की पालना अनिवार्य कर सकती है 

 

सहकारी बैंकों की साख बहाली के लिए केवल तबादले पर्याप्त नहीं हैं। हमें व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन और पूर्ण पारदर्शिता की आवश्यकता है। भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाना अनिवार्य है। साथ ही, प्रबंधन में ‘फिट एंड प्रॉपर’ मानदंडों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। संस्थाओं की साख और कार्यकुशलता तभी बहाल हो सकती है, जब निर्णयों में जवाबदेही हो और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष एवं योग्यताओं पर आधारित हो।

​— सूरज सिंह आमेरा, प्रांतीय महासचिव, ऑल राजस्थान कॉ-ऑपरेटिव बैंक एम्प्लॉइज यूनियन एवं बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन

 

सहकारी बैंकों में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए व्यापक प्रशासनिक सुधार अत्यंत आवश्यक हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों के कारण कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है, जिससे पारदर्शिता का अभाव है। अतः, निष्पक्ष पदस्थापना नीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इससे बैंकों की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होगी और किसानों के प्रति जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

​— रघुवीर शर्मा राजस्थान सहकारी कर्मचारी बैंक्स एसोसिएशन

सहकारिता का मूल मंत्र ‘स्वैच्छिक सहभागिता और ईमानदारी’ है, लेकिन गबन के बढ़ते मामलों ने इसकी नींव को झकझोर दिया है। सुशासन के लिए केवल चेहरों का बदलाव काफी नहीं है। ‘पैक्स’ से लेकर ‘अपेक्स’ तक कार्यप्रणाली का पूर्ण डिजिटलीकरण, तकनीकी पारदर्शिता और नियमित ऑडिट अब अनिवार्य हो गया है। एक स्वच्छ और सक्षम सहकारी ढांचा ही प्रधानमंत्री के ‘सहकार से समृद्धि’ के सपने को राजस्थान में धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक है।

​— नंदलाल वैष्णव, सहकार चिंतक एवं विशेषज्ञ

सहकारी बैंक (CCB) में व्यापक प्रशासनिक बदलाव की सख्त जरूरत है। ऋण और लेखा जैसे महत्वपूर्ण अनुभागों में वर्षों से जमे अधिकारियों व कर्मचारियों को तत्काल हटाकर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। बैंक की बिगड़ती वित्तीय स्थिति के लिए इन ‘स्थायी’ पदों पर बैठे लोगों का गठजोड़ जिम्मेदार है। बैंक की साख बचाने और पारदर्शिता लाने के लिए निहित स्वार्थों को खत्म कर नए और ईमानदार चेहरों को जिम्मेदारी सौंपना अनिवार्य है।

​— हनुमानसिंह राजावत प्रांतीय अध्यक्ष, राजस्थान सहकारी सोसायटी कर्मचारी यूनियन

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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