सार
Jaipur : राजस्थान बहुउद्देशीय सहकारी सोसायटी कर्मचारी यूनियन ने पैक्स (PACS) कंप्यूटरीकरण में आ रही तकनीकी खामियों, संसाधनों और प्रशिक्षण की कमी को दूर करने तथा नियम विरुद्ध वेतन रोकने के आदेश को वापस लेने हेतु सहकारिता विभाग शासन सचिव को ज्ञापन सौंपा…

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 29 मई | राजस्थान बहुउद्देशीय सहकारी सोसायटी कर्मचारी यूनियन (RMCSEU) के महामंत्री देवेन्द्र कुमार सैदावत के नेतृत्व में पैक्स (PACS) कम्प्यूटराईजेशन परियोजना के अंतर्गत जमीनी स्तर पर आ रही गंभीर तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं के निराकरण के संबंध में आज सहकारिता विभाग के शासन सचिव को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा गया । यह ज्ञापन सहकारिता विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा के साथ-साथ अमित शाह केंद्रीय सहकारिता मंत्री, आशीष भूटानी, केंद्रीय सहकारिता सचिव, गौतम कुमार दक सहकारिता राज्य मंत्री – स्वतंत्र प्रभार, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, नाबार्ड, मुख्य महाप्रबंधक नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय, जयपुर, प्रबंध निदेशक, राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक, प्रबंध निदेशक केंद्रीय सहकारी बैंक (CCB) को भी भेजा गया है,

महामंत्री देवेन्द्र कुमार सैदावत का कहना है कि वे प्रधानमंत्री के ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प और सहकारिता मंत्रालय की इस आधुनिकीकरण योजना का पूर्ण समर्थन करते हैं । संगठन इसे सहकारिता के सुदृढ़ीकरण में एक ऐतिहासिक और दूरगामी कदम मानता है । राज्य सहकारी बैंक के निर्देशों के क्रम में सभी समिति कार्मिक ERP सॉफ्टवेयर पर दैनिक कार्य एवं डायनेमिक डे-एंड सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं । परंतु, वर्तमान में सॉफ्टवेयर के संचालन में आ रही विसंगतियों के कारण पैक्स कार्मिकों को दैनिक वाउचर प्रविष्टि (पोस्टिंग) और दिवस-अंत (डे-एंड) का कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने में भारी व्यावहारिक और तकनीकी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है । इस ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों की महत्वपूर्ण नीतिगत और व्यावहारिक मांगों को त्वरित संज्ञान और स्थायी निस्तारण हेतु प्रस्तुत किया गया है ।
पैक्स कंप्यूटरीकरण में प्रशिक्षण, तकनीकी त्रुटियों और बुनियादी संसाधनों का अभाव
सभी समिति कार्मिकों (व्यवस्थापकों एवं सहायक स्टाफ) को ई.आर.पी. सॉफ्टवेयर का विधिवत व व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं मिलने से वास्तविक समय (लाइव) में त्रुटिरहित डेटा प्रविष्टि करना बेहद मुश्किल हो रहा है, इसलिए पैक्स मुख्यालय स्तर पर ही प्रशिक्षण आयोजित कराने की मांग की गई है । इसके साथ ही, सहकारी बैंकों और पैक्स के मध्य एफ.आई.जी. एकीकरण में गंभीर तकनीकी खामियों के कारण सॉफ्टवेयर में स्वतः ‘दोहरी प्रविष्टि’ (डबल एंट्री) हो रही है और पैक्स के पास ऋण स्वीकृति व डी.एम.आर. जैसी महत्वपूर्ण रिपोर्ट देखने या डाउनलोड करने का अधिकार न होने से कार्मिक आज भी मजबूरन सारा काम मैनुअल (कागजी तौर पर) कर रहे हैं । सॉफ्टवेयर की त्रुटियों के चलते पुराना खाता बंद किए बिना ही नया खाता खुल जाने से ऑडिट और वित्तीय रिकॉर्ड बिगड़ने का खतरा बना हुआ है, जिसे प्रणाली समाकलक के माध्यम से तुरंत ठीक कराया जाना जरूरी है । इसके अतिरिक्त, अनुबंधित प्रदाता कंपनी (वेंडर) के पास फील्ड में तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी है और वे जमीनी स्तर पर कोई सहयोग नहीं दे रहे हैं, जो निविदा शर्तों का सीधा उल्लंघन है । वहीं, राज्य की कई स्वीकृत समितियों में अभी तक आवश्यक हार्डवेयर और बुनियादी ढांचागत उपकरण भी पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिसके बिना कार्य को निर्धारित समय में पूरा करना संभव नहीं है
वेतन रोकने के ‘नियम विरुद्ध’ आदेश का कड़ा विरोध
इन तमाम ढांचागत और तकनीकी कमियों के बीच राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक द्वारा जारी उस आदेश का कड़ा विरोध किया गया है, जिसमें 01 जुलाई 2026 से दिवस-अंत (डे-एंड) न होने पर वेतन रोकने या अनुपातिक भुगतान की बात कही गई है । यूनियन ने सवाल उठाया कि सहकारिता नियमों के तहत व्यवस्थापक का नियोक्ता संबंधित पैक्स समिति (अध्यक्ष) होता है, ना कि बैंक । इसलिए बैंक स्तर से सीधे वेतन रोकने या अनुपातिक भुगतान का आदेश पूरी तरह से नियम विरुद्ध और उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है । कार्मिकों पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई या वेतन कटौती से पूर्व इन तकनीकी और ढांचागत समस्याओं का स्थायी समाधान शीर्ष स्तर से करवाया जाना न्यायसंगत होगा । यूनियन ने विशेष रूप से निवेदन किया है कि राजस्थान में लागू इस विसंगतिपूर्ण FIG पोर्टल व्यवस्था को या तो पूर्णतः बंद करवाया जाए अथवा इसमें व्यापक सुधार करते हुए पैक्स स्तर से ही DMR जनरेट करने की सुविधा और GRA के लिए मैनुअल व्यवस्था का विकल्प प्रदान किया जाए ।
सहानुभूतिपूर्वक सकारात्मक निर्णय की उम्मीद

अंत में, प्रांतीय अध्यक्ष हनुमानसिंह राजावत और उपाध्यक्ष रामसिंह डूंमरा की ओर से शीर्ष स्तर से यह करबद्ध अनुरोध किया गया है कि जब तक कर्मचारियों को पूर्ण प्रशिक्षण, आवश्यक ढांचागत संसाधन, तकनीकी अधिकार और त्रुटिरहित सॉफ्टवेयर उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक राज्य सहकारी बैंक और केंद्रीय सहकारी बैंकों द्वारा वेतन रोकने जैसी किसी भी एकतरफा और दंडात्मक कार्रवाई पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाने हेतु निर्देशित किया जाए । प्रदेश के सभी व्यवस्थापक और कार्मिक पूरी निष्ठा से काम करने के लिए तैयार और प्रतिबद्ध हैं, बशर्ते उन्हें आवश्यक संसाधन, तकनीकी अधिकार और एक पारदर्शी, त्रुटिरहित तकनीकी माहौल उपलब्ध कराया जाए ।
एक्सपर्ट व्यू
PACS के डिजिटलीकरण में नीतिगत विसंगतियां और संरचनात्मक अपरिपक्वता एक गंभीर संकट बन चुकी हैं। संपूर्ण राष्ट्र में केवल राजस्थान ही एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां द्विस्तरीय पोर्टल (FIG और नाबार्ड ERP) की दुरूह तकनीकी व्यवस्था थोपी गई है, जबकि तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों ने व्यावहारिक कमियों के चलते इसे अंगीकार तक नहीं किया है। इस दोहरी व्यवस्था और नाबार्ड ERP में तकनीकी अक्षमताओं के कारण कार्मिकों को अंततः ‘मैनुअल’ कार्य के लिए विवश होना पड़ रहा है, जो कि पूरी तरह विसंगतिपूर्ण है और इसे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में चुनौती दी जाएगी। पैक्स स्तर पर सक्षम व पर्याप्त तकनीकी स्टाफ का सर्वथा अभाव है और वेंडर्स द्वारा अनुभवहीन मानव श्रम लगाने से वित्तीय शुद्धता खतरे में है। बुनियादी संसाधनों और सुव्यवस्थित प्रशिक्षण के बिना बैंक स्तर से कार्मिकों का वेतन रोकना विधिक क्षेत्राधिकार से बाहर और प्राकृतिक न्याय के प्रतिकूल है।

FIG ID ब्लॉक करने पर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
राजस्थान बहुउद्देशीय सहकारी सोसायटी कर्मचारी यूनियन (RMCSEU) की हनुमानगढ़ जिला इकाई ने बैंक प्रबंधन द्वारा समितियों की FIG ID पर रोक लगाने के आदेश का कड़ा विरोध किया है. जिला अध्यक्ष रमेश ढाका और महासचिव मैनपाल मान के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि इस निर्णय से ऋणी सदस्य ऋण का रोल-ओवर नहीं करवा पा रहे हैं, जिससे उन पर अवधिपार ब्याज का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ रहा है. यूनियन ने आरोप लगाया कि कंप्यूटरीकरण का कार्य संभाल रही तकनीकी फर्म ने न तो कार्मिकों को कोई प्रशिक्षण दिया है और न ही डेटा एंट्री का कार्य पूरा किया है, जिससे वर्तमान रिकॉर्ड में भारी वित्तीय विसंगतियां आ रही हैं. संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि FIG ID को तुरंत बहाल कर प्रत्येक बैंक शाखा स्तर पर एक तकनीकी ऑपरेटर नियुक्त नहीं किया गया, तो यूनियन जल्द ही रणनीति बनाकर उग्र आंदोलन शुरू करेगी ।
अनुभवहीन स्टाफ लगाने का आरोप, कार्य बहिष्कार की चेतावनी
सीमावर्ती बाड़मेर जिले में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के कंप्यूटरीकरण कार्य को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय पैक्स व्यवस्थापकों ने डिजिटल कार्य कर रही ‘ओसवाल टीम’ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि हेड ऑफिस में कंप्यूटरीकरण के नाम पर बेहद अनुभवहीन और स्कूली स्तर के स्टाफ को बिठा दिया गया है, जिन्हें काम की समझ नहीं है। ऐसे गैर-जानकार स्टाफ के भरोसे सभी समितियों को ऑनलाइन करने का दावा पूरी तरह अव्यावहारिक है। व्यवस्थापकों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक ओसवाल टीम तकनीकी रूप से सक्षम स्टाफ को फील्ड में नहीं भेजती, तब तक वे समितियों का कोई रिकॉर्ड उन्हें नहीं सौंपेंगे। इसके साथ ही पैक्स की लॉगिन आईडी को आए दिन बंद-चालू करने के नाटक को तुरंत बंद न करने पर बैंक प्रबंधन के खिलाफ बड़े आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा।


